
लेप-कार्य शुरू, एक मुख दर्शनार्थ खुला रहेगा,
मंदसौर । पुष्य नक्षत्र के योग में सोमवार सुबह भगवान पशुपतिनाथ का विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और पूजन-अर्चन विधिवत संपन्न हुए। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिर प्रांगण में अलौकिक आभा फैल गई। श्रद्धालु परिवारों का तांता सुबह से ही लगना शुरू हो गया और हर किसी ने दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ पाया।
चारों मुखों पर पुष्प—चंदन—धूप—दीप से सुशोभित श्रृंगार ने वातावरण को सौम्य, पवित्र और पूर्णतः अध्यात्ममय बना दिया।
शिला-सुरक्षा हेतु लेप-कार्य प्रारंभ
मंदिर के विद्वान पंडित कैलाशचंद्र जी ने बताया कि भगवान पशुपतिनाथ की अनादि शिला पर परंपरागत संरक्षण-लेप (Protective Layer) का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बाहर से बुलाए गए विशेषज्ञ कला-कारिगरों एवं मूर्तिकारों की देखरेख में संचालित होगी।
उल्लेखनीय है शिला की मजबूती, प्राकृतिक क्षरण से बचाव और प्रतिमा की दीर्घकालीन सुरक्षा के लिए यह लेप
समय-समय पर किया जाता है।
कार्य के दौरान भगवान का एक मुख खुला रहेगा, जबकि शेष मुखों पर क्रमवार लेप किया जाएगा, जिससे भक्तों के नियमित दर्शन भी निर्बाध रहेंगे।




