पहले फिल्मों मे आना सपना था अब फिल्मी देखना सपना हो गया है।

कई सालो बाद फिल्मे फिर सिनेमा घरों में लगी है , और फिल्मे देखना बड़े मुद्दो को आम आदमी को सरल भाषा मे समझना है , जब कश्मीर फाइल्स को टैक्स फ्री किया गया तब फिल्म देखने की इच्छा हुई कई नेताओ ने भी बयान दिया की ये सब कुछ सत्य घटनाओं पर आधारित है पर जब टिकट खरीद कर देखा तो भी टिकट उतनी ही महंगी पड़ी कुछ खास फर्क नहीं था फिल्मे एक मध्यम वर्गी परिवार वैसे भी कभी कभी देखता है उसमे मनोरंजन की बजाए जेबे कटी जा रही है।
जनता ब्लॉग जनता की समस्या समाधान और आम आदमी से जुड़े सारे मुद्दो को आवाज देने की एक कोशिश है ।
— नेहा जोशी