गंजेड़ी बनते युवा स्कूलों तक पहुंचा कारोबार

मंदसौर। पुलिस की लापरवाही के चलते धीरे-धीरे जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र के युवा गांजे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो तकं गांजे का नशा करने वाले युवाओं को यह जहर आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इस बात की जानकारी संबंधित थाना प्रभारियों को भी है, इसके बाद भी कार्रवाई न होने से अवैध गांजे का व्यापार करने वालों के हौसले बुलंद हैं। जिला मुख्यालय पर आधा दर्जन ऐसे स्थान हैं, जहां आसानी से गांजा उपलब्ध हो रहा है। जिसमें खानपुरा, मदारपुरा, झुग्गी बस्ती सहित अन्य जगहों पर गांजे का व्यापार जमकर फलफूल रहा है। कई स्थानों पर पुलिस संरक्षण में तो कुछ स्थानों पर चोरी छिपे अवैध गांजे का व्यापार किया जा रहा है। लंबे समय से पुलिस ने सौ ग्राम गांजे को पकडऩे की कार्रवाई तक नहीं की है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली के कारण ही अब स्थिति यह हो गई है कि गांजे के इस धंधे में ही प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। घर या गंजेडिय़ों के बताए स्थान तक गांजा पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है।
कॉलेज तक पहुंच गए कई गंजेडिय़े
यहां गांजे का नशा एक स्कूल की तरह है। स्कूल के इस पड़ाव को पास करके युवा पहुंच रहा है नशे के कॉलेज में। मतलब स्मैक की और। इसी तरह से गांंजे की तो नशे की यह लत गंजेडिय़ों में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। स्थिति यह होती है कि गांजे से मन भरने के बाद पॉवर फूल नशे की आवश्यकता गंजेडिय़े महसूस कर रहे हैं। यहीं कारण है कि गांजे के नशे के बाद युवा स्मैक के नशे तक पहुंच रहे हैं।
पचास रुपए में भराती एक चिलम
इस धंधे के पुराने खिलाड़ी जमकर फलफूल रहे हैं। सप्लाई करने वाले तो एक कोरियर की तरह होते हैं। लेकिन कई बल्लम इस धंधे में पिछे से काम कर रहे हैं। गांजा शहर में पुडिय़ा में मिलता है। गांजे का नशा सिगरेट में या चिलम में भरकर किया जा सकता है, लेकिन शहर में चिलम में भरकर नशेड़ी गांजा पी रहे हैं। इसका कारण है कि चिलम में गांजा ज्यादा भरा जा सकता है। जबकि सिगरेट में गांजे की इतनी मात्रा नहीं आ सकती। इस पुडिय़ा की किमत होती है पचास रुपए।
पहुंच रहा संभ्रात परिवारों के युवाओं तक
यह नशा पहले झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले या फिर मजदूर वर्ग के युवाओं तक सीमित था, लेकिन समय के साथ संभ्रात परिवारों के युवा भी इस नशे की लत की गिरफ्त में आ गए है। यहीं कारण है कि दिन प्रतिदिन इस धंधे ने प्रोगे्रस की है। इसके अलावा इस अवैध कारोबार ने चोरी चकारी की घटनाएं भी बढाई है। गुटखे की तरह दिन में कई बार नशा उतरते ही इसकी फिर से लत लगती है। रुपए नहीं होने के कारण निम्न वर्ग के युवा चोरी चकारी तक को अंजाम दे रहे हैं।