
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी के बीच 22–23 दिसंबर को अधिवक्ता कार्य से रहे विरत, अब गेंद एसपी के पाले में
भानपुरा।
जब कानून की किताब थामे काला कोट सवाल पूछे और खाकी जवाब देने से बचे, तब टकराव सिर्फ दो संस्थाओं का नहीं रहता—वह व्यवस्था की परीक्षा बन जाता है। भानपुरा में ठीक यही हुआ, जहां थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर उपजा विवाद दो दिन तक न्यायिक व्यवस्था ठप कर गया।
दिनांक 22/12/2025 को भानपुरा एवं गरोठ न्यायालय के सभी अभिभाषक न्यायिक कार्य से विरत रहे, वहीं 23/12/2025 को भी भानपुरा न्यायालय के समस्त अभिभाषक कार्य से विरत रहे। यह विरोध केवल हड़ताल नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र के प्रति गहरे अविश्वास की खुली अभिव्यक्ति था।
चोरी का मामला, कार्रवाई गायब
अभिभाषक संघ के अनुसार 17 अक्टूबर 2025 को अधिवक्ता सीताराम गौड गरोठ भानपुरा पर हुई चोरी के मामले में आज तक न तो खुलासा हुआ है। और न ही कोई ठोस कार्यवाही हुई है। बार बार अवगत कराने के बावजूद थाना स्तर पर प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया गया है। आरोप है कि जब अधिवक्ताओं ने मामले की प्रगति पूछी तो थाना प्रभारी दांगी द्वारा असंसदीय एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। यही से मामला व्यक्तित न रहकर संस्थागत सम्मान और गरिमा का बन गया।
न्यायालय पहुंचा विवाद, बढ़ा प्रशासनिक दबाव
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता वसीम खान द्वारा न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया। इसके बावजूद थाना स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई का अभाव रहा।
घटनाक्रम से आक्रोशित अभिभाषक संघ ने पुलिस अधीक्षक मंदसौर से भेंट कर लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें थाना प्रभारी के तत्काल स्थानांतरण और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
डांगी टीआई पर लगे आरोप:
अधिवक्ताओं के साथ असंसदीय व अपमानजनक व्यवहार
चोरी प्रकरण में अब तक कोई खुलासा नहीं
बार-बार सूचना के बावजूद लापरवाही
न्यायालयीन आवेदन के बाद भी कार्रवाई शून्य
थाना परिसर में अधिवक्ताओं को अपमानजनक स्थिति
अब गेंद एसपी के पाले में:
पुलिस अधीक्षक मंदसौर ने अभिभाषक संघ को आश्वासन दिया है कि डांगी टीआई के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच किसी अन्य अधिकारी से करवाई जाएगी।
एसपी के इस आश्वासन के बाद—
जांच की निष्पक्षता की जिम्मेदारी अब एसपी स्तर पर है
यह देखना बाकी है कि जांच ज़मीनी होगी या औपचारिक
अभिभाषक संघ की आगे की रणनीति जांच की दिशा और गति पर निर्भर करेगी
‘स्थानांतरण नहीं तो आंदोलन’
अभिभाषक संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि थाना प्रभारी का स्थानांतरण और प्रकरण का निष्पक्ष खुलासा शीघ्र नहीं हुआ, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा।
संघ का कहना है कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा है।
व्यवस्था का अहंकार
जब खाकी जवाबदेही से बचे और काला कोट सड़क पर उतर आए—तो समझ लीजिए मामला अपराध का नहीं, व्यवस्था के अहंकार का है।




