
भगीरथपुरा, इंदौर | ग्राउंड रिपोर्ट
कहा जाता है, राजा भगीरथ ने तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर उतारा था ताकि जीवन बहे, राहत पहुँचे और प्यासे समुदाय को जल का आशीर्वाद मिले। लेकिन इंदौर के भगीरथपुरा में कहानी उलट गई है। यहाँ पानी जीवन नहीं, सदमे और भय लेकर आया। जिस बस्ती का नाम उस मिथक से जुड़ा है, जहाँ पानी मोक्ष का प्रतीक था वहीं आज लोग हर बूंद को शक की नज़र से देख रहे हैं। गलियों में दर्द, घरों में बीमारियाँ और अस्पताल की कतारों में इंतज़ार… भगीरथपुरा में पानी अब वरदान नहीं, एक कड़वा वाक्य बन चुका है “पानी ही बीमारी बन गया।”
भगीरथपुरा की सँकरी गलियों में आज भी सदमे और डर का साया है। दूषित पानी पी चुके लोग अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक भटक रहे हैं। OPD खचाखच भरी है — बुज़ुर्ग, महिलाएँ और बच्चे घंटों लाइन में खड़े हैं, लेकिन डॉक्टर तक पहुँचने के लिए भी लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है।

हर घर में एक-सी तस्वीर — बीमार परिजन, अस्पताल के कागज़, दवाइयों के बिलों के बंडल… और पानी की हर बूंद पर शक। कई परिवार इलाज और कर्ज़ के बीच टूट चुके हैं, जबकि कुछ अब भी ICU में ज़िंदगी से जूझ रहे हैं।

“एक दिन में ₹50 हज़ार का बिल… मजबूरी में हॉस्पिटल बदलना पड़ा”
मुस्कान शर्मा बताती हैं कि उनके ससुर नवीन शर्मा की तबीयत 25 दिसंबर को अचानक बिगड़ी। उल्टी-दस्त और बेहोशी के बाद उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा।
पहले शाल्बी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ
• दो दिन का ICU बिल ₹1,02,000
• दवाइयाँ और टेस्ट ₹45,000
• अन्य अस्पताल चार्ज ₹35,000
• अधिकतर भुगतान क्रेडिट कार्ड से करना पड़ा
मेडिक्लेम सिर्फ ₹40,000 का था – जबकि बिल उससे कई गुना ज़्यादा। मजबूर होकर मरीज को शाल्बी से रॉबर्ट्स नर्सिंग होम में शिफ्ट करना पड़ा।
बीते दिन डिस्चार्ज हुआ -₹30,000 का बिल, जिसमें से ₹10,000 फिलहाल अस्पताल ने नहीं लिया।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने खर्च वहन का आश्वासन दिया है, लेकिन फिलहाल परिवार पर बोझ बना हुआ है।
“अब बच्चे-बुज़ुर्ग भी पैक्ड पानी पर हैं… लोग पानी से डरने लगे हैं”

“स्वास्थ्य विभाग की वो टेबल दो दिन बाद गायब हो गई”
दो दिन पहले गलियों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्थायी डेस्क लगाई थी।
आज वह नज़र नहीं आई।
लोगों का तंज —
“दर्द यहीं रह गया… टेबल चला गया।”

किडनी तक असर प्रभुलाल ICU में
प्रभुलाल नावरे
• 25 दिसंबर से तेज़ उल्टी-दस्त
• रॉबर्ट्स नर्सिंग होम के ICU में भर्ती
• डॉक्टरों ने किडनी पर असर बताया
घर में कमाने वाला सिर्फ बेटा सूरज, जिसकी कमाई कम है,महीना है। वह कहता है
“पूरी जिंदगी यही पानी पिया… आज वही हमें ICU तक ले आया।उन्होंने ये भी बताया की जॉच उन्हे बहार से करवानी पड़ रही है जिसका मुआवज़ा मिलेगा यान नहीं ये अपसष्ट हैं , उन पर ये भार भी थोड़ा जायदा है ।
गीता बाई का टूटा परिवार
65 वर्षीय गीता बाई ध्रुव पहले टिफिन बनाती थीं।बहुत मेहनत कश महिला थी 60 -65 की उम्र में भी काम कर रही थी ।
बीमारी के बाद
• पहले MY अस्पताल
• फिर अरबिंदो
• BP लो, उल्टी-दस्त, लगातार कमजोरी
घर में अब खाना बनाने वाला तक नहीं।
बेटा ई-रिक्शा चलाता है, पति गैस एजेंसी में हेल्पर – घर किसी तरह चल रहा है।

कुंती सुनहरे ICU में, पति पहले से लकवाग्रस्त
कुंती सुनहरे इस समय ICU में भर्ती हैं। उनके पति कैलाश पहले से लकवे से अपाहिज और अरबिंदो में भर्ती।
घर में दो दिहाड़ी मज़दूर बेटे और 10 साल की बेटी राधिका।
पड़ोसी बताते हैं –
“कई दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला…”
“हम शिकायत करते रहे… मगर कोई नहीं सुनता था”
राधेश्याम परिहार कहते हैं
• 89 वर्षीय बरजो बाई लगातार बीमार
• दो छोटे बच्चे भी बीमार पड़े
• पानीके कई बार सैंपल दिए
• शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन हालात नहीं बदले
एम्बुलेंस तक पहुँचना भी मुश्किल ”
लक्ष्मी पंथी की बहन दया बताती हैं
बीमारी अचानक बढ़ी, घरवाले पहले ही आर्थिक संकट में थे।
इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा तक भी पहुँचना उनके लिए मुश्किल था समय पर नहीं पहुँची,
काफी देर तक परिवार मदद का इंतज़ार करता रहा और फिर एम्बुलेंस तक आना पड़ा फिर एम्बुलेंस मिली।
बीमारी सिर्फ शरीर तक नहीं घरों की रीढ़ टूट गई
भगीरथपुरा में यह बीमारी
सिर्फ शरीर को नहीं तोड़ रही
यह घरों की रसोई
बच्चों का मन
और परिवारों की आर्थिक रीढ़ चटका रही है।
यहाँ लोग पूछ रहे हैं
“हमारा कसूर क्या था…? बस इतना कि हमने नल का पानी पिया।”




