
मंदसौर।
कृषि उपज मंडी अब व्यापार का केंद्र कम और अव्यवस्था का अड्डा अधिक बनती जा रही है। मंगलवार को अष्टविनायक ट्रेडिंग कम्पनी के संचालक महेश माहेश्वरी के साथ हुई मारपीट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मंडी में व्यापारी और किसान सुरक्षित हैं भी या नहीं?
महेश माहेश्वरी का आरोप है कि किसान से खरीदे गए माल को उतारते समय उन्होंने कच्चे हम्माल अमजद पिता अकरम (दाऊदखेड़ी) से केवल इतना कहा कि माल धीरे उतारा जाए, ताकि वह बिखरे नहीं और चुरा होने की आशंका न बने।
इतनी सी बात पर हम्माल बिफर गया, गाली-गलौच शुरू कर दी और कहा— “ऐसे ही उतरेगा माल।”
जब व्यापारी ने माल वापस ले जाने और एंट्री वाले व्यक्ति को बुलाने की बात कही तो मामला हिंसा में बदल गया। मारपीट के साथ जान से मारने की धमकी तक दी गई। घटना के सीसीटीवी फुटेज निकलने की बात भी सामने आई है।
व्यापारी-किसान उपेक्षित, मंडी में अराजकता का माहौल
यह कोई पहला मामला नहीं है। मंडी में आए दिन व्यापारी और किसानों के साथ उपेक्षित व्यवहार हो रहा है।
कभी माल तौल में गड़बड़ी, कभी भाषा की मर्यादा तार-तार, तो कभी सीधी मारपीट और हैरानी की बात यह कि जिम्मेदार अफसर अक्सर नदारद रहते हैं।
घटना के समय:
मंडी सचिव छुट्टी पर थे
भारसाधक मौजूद नहीं था
शिकायत सुनने वाला कोई नहीं
यानी पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही थी।
स्वाभिमान अभी जिंदा है, लेकिन सब्र की सीमा भी होती है – मनोज जैन
दशपुर व्यापारी संघ के अध्यक्ष मनोज जैन ने इस पूरे मामले में दो टूक शब्दों में कहा कि
“मंडी अब तक किसी तरह चल रही थी, लेकिन व्यापारी के साथ मारपीट ने सारी हदें पार कर दी हैं।
व्यापारी का अपराध सिर्फ इतना था कि वह माल सुरक्षित रखना चाहता था। क्या अब यह भी गुनाह हो गया है?”
मनोज जैन ने साफ कहा कि
“व्यापारियों के साथ आए दिन छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें अपमानित किया जाए। हमारा भी स्वाभिमान है, हमारी भी गरिमा है जो अभी खत्म नहीं हुई है।”
उन्होंने आगे कहा कि व्यापारी मंडी में किसानों की सेवा के लिए खड़े हैं, भीख मांगने के लिए नहीं लेकिन यहां किसानों के साथ भी अन्याय हो रहा है। हम्मालों द्वारा अभद्र भाषा और दबंगई आम होती जा रही है।
“जब तक मंडी में संतोषप्रद और सुरक्षित व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक व्यापारी मंडी में व्यापार नहीं करेंगे।”
नायब तहसीलदार पहुंचे, लेकिन सवाल कायम
व्यापारियों के आक्रोश के बाद नायब तहसीलदार अभिषेक चौरसिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने माना कि व्यापारी और हम्माल के बीच विवाद हुआ है और थप्पड़ मारने की बात सामने आई है। कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन व्यवस्था सुधार पर चुप्पी रही।
सवाल वही है…
मंडी में कानून का राज होगा या बाहुबल का?
व्यापारी और किसान कब तक उपेक्षा सहेंगे?
क्या मंडी प्रशासन सिर्फ फाइलों में सक्रिय है?
सवालों के कटघरे में मंडी व्यवस्था
जब मंडी में पहले भी अव्यवस्थाओं को लेकर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, तो अब तक सुधार क्यों नहीं हुआ?
क्या मंडी में हम्मालों की निगरानी और जवाबदेही तय करने की कोई ठोस व्यवस्था है या सब मनमर्जी पर चल रहा है?
माल की सुरक्षा की बात करना अगर गुनाह है, तो किसान और व्यापारी आखिर किस भरोसे मंडी में व्यापार करें?
घटना के समय मंडी सचिव छुट्टी पर और जिम्मेदार अधिकारी नदारद थे, क्या मंडी हमेशा ऐसे ही भगवान भरोसे चलती रहेगी?
सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं? क्या फुटेज सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?
आए दिन व्यापारी और किसानों के साथ उपेक्षित व्यवहार—क्या यह प्रशासनिक असफलता नहीं है?
आखिर मंडी में कानून चलेगा या दबंगई?
यह सिर्फ एक व्यापारी की मारपीट नहीं,
पूरी मंडी व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है।




