
टैक्स चोरी से सरकार को भारी नुकसान,
राजस्थान से मध्यप्रदेश तक तंबाकू ब्लैक मार्केट फैला, सरकार की नीतियाँ और टैक्स बढ़ोतरी इस धंधे को और तेज कर सकती हैं
इंदौर । (विशेष रिपोर्ट)।
सिगरेट और बीड़ी के दामों में बढ़ोतरी की आहट के बीच अब काला बाज़ार यानी ब्लैक मार्केट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। औपचारिक टैक्स और एक्साइज ड्यूटी के बोझ से बचने के लिए अवैध सिगरेट की सप्लाई राजस्थान से मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों की ओर आगे बढ़ रही है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है और उपभोक्ता झोलाझाप, नकली और बिना टैक्स वाला माल खरीदने की ओर मजबूर हो रहे हैं।
टैक्स बढ़ने से बढ़ा काला बाज़ार का चलन
भारत सरकार ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू करने का निर्णय लिया है।
• सिगरेट पर 40 % GST के अलावा नई एक्साइज ड्यूटी ₹2,050 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक तक लगेगी, जो सिगरेट की लंबाई के आधार पर तय होगी।
• इससे महंगी सिगरेटों के दाम में भौतिक वृद्धि आएगी और उपभोक्ता को भारी टैक्स देना पड़ेगा।
बताया जाता है
कि इसका मकसद स्वास्थ्य को बेहतर बनाना बताया जा रहा है, लेकिन इसका दूसरा पक्ष भारत भर में काले बाज़ार को बढ़ावा देना है। टैक्स चेंज की जानकारी मिलने के बाद अवैध सिगरेट की माँग पहले से कहीं अधिक बढ़ गयी है।
टैक्स चोरी से कितना नुकसा
क्स चोरी से कितना नुकसान?
विशेष रिपोर्टों के अनुसार सिगरेट और तंबाकू की टैक्स चोरी और काले बाज़ार में बिक्री ने वित्त वर्ष 2012–24 के बीच करोड़ों रुपये का नुकसान कराया है।
• काले बाज़ार की हिस्सेदारी अब तक तंबाकू मार्केट का लगभग 25 % तक बताई जाती है।
• एक जानकारी अनुसार इससे सरकार को सालाना लगभग ₹18,500 करोड़ से ऊपर का राजस्व नुकसान हुआ है, जो हर साल बढ़ रहा है।
राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी बिना टैक्स वाली सस्ती सिगरेट (काला बाजारी) अधिक बिक रही है, जो उपभोक्ताओं को कानूनी विकल्पों के मुकाबले सस्ता माल उपलब्ध कराती है और टैक्स चोरी के धंधे को बढ़ावा देती है। राजस्थान से मध्यप्रदेश तक सप्लाई नेटवर्क
सूत्रों का कहना है कि राजस्थान के कुछ जिलों से सस्ते दाम पर सिगरेट ब्लैक मार्केट में सप्लाई होती है और यह मध्यप्रदेश, गुजरात तथा अन्य क्षेत्रों में पहुँचने के बाद स्थानीय खुदरा विक्रेताओं तक पहुँच जाती है।
इन अवैध स्टॉक्स में अक्सर टैक्स न चुकाई गई सिगरेट के पैक, नकली बंडल और बिना टैक्स वाले उत्पाद मिलते हैं, जिनके जरिए लोग सस्ते दाम में सिगरेट ले पाते हैं।
राजस्थान के कुछ स्थानों पर तंबाकू और सिगरेट दुकानदारों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन द्वारा भी चैकिंग तथा चालान करने की कार्रवाइयाँ हुई हैं, लेकिन इसका असर सीमित रहा है।
नकली सिगरेट का बढ़ता व्यापार
दिल्ली में भी पुलिस ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की नकली सिगरेट की भारी खेप जब्त की है, जिसमें गोल्ड फ्लेक, मार्लबोरो जैसे प्रसिद्ध ब्रांडों के नकली पैक पाए गए।
यह संकेत देता है कि ब्लैक मार्केट सिर्फ टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि नकली सिगरेट बनाने और बेचने का बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो चुका है।
क्या इससे टैक्स चोरी रुकेगी या बढ़ेगी?
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि
ऊँचे टैक्स से कानूनी सिगरेट महंगी होगी,
लोग सस्ते और टैक्स-बिना सामान की ओर झुकेंगे,
और ब्लैक मार्केट की माँग और सप्लाई दोनों बढेंगे।
यानी, सरकार के स्वास्थ्य के नाम पर टैक्स बढ़ाने के कदम से वांछित परिणाम की बजाय काला बाज़ार और अवैध सप्लाई को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान होगा, बल्कि स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ेंगे क्योंकि नकली सिगरेट की गुणवत्ता पर कोई नियंत्रण नहीं होता।
सिगरेट की काला बाज़ार (ब्लैक मार्केट) पहले से ही बड़ा व्यवसाय बनता जा रहा है, और नए टैक्स लागू होने के बाद यह और तेज़ हो सकता है। राजस्थान से मध्यप्रदेश में बिना टैक्स वाले उत्पादों की सप्लाई, नकली सिगरेट नेटवर्क और काला बाज़ार में टैक्स चोरी—ये सभी मिलकर एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं, जिसका असर आम उपभोक्ता और सरकार दोनों पर पड़ेगा।







