52 खोखे पानी में बहे चम्बल बनी सपना

 

मंदसौर। बावन खोखे की चंबल योजना में किए गए काम की गुणवत्ता पहले ही सामने आ चुकी है। इसमें लगे पाईप शुरुआत से ही धोखा दे गए। स्थिति अभी भी पाईप की मरम्मत पूरी तरह से नहीं हो पाई है। पाईप ही चंबल योजना में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। रामघाट बैराज पर पहुंच रहा चंबल का पानी जितनी क्षमता से पहुंचना चाहिए, उतना नहीं आ रहा है। चंबल से आ रही पाइप लाइन में रामघाट बैराज पर बहुत ही कम मात्रा में पानी आ रहा है। इस कारण अब शहर में पेयजल सप्लाय में चंबल का पानी कम और शिवना का पानी ही अधिक उपयोग हो रहा है।
52 करोड़ की चंबल योजना मे एक मई को पहली बार शिवना में चंबल का पानी आया था। इसके बाद से ही चंबल से पानी लाने के लिए डाली गई लाइन में लगातार लीकेज आने के कारण पानी की आवक बंद ही होती रही। बारिश के बाद नपा ने योजना के ठेकेदार से लाइन में आ रही दिक्कतों को दूर करने के निर्देश दिये। इसके बाद ठेकेदार ने मरम्मत का कार्य किया और दोनों पाइप चलाकर शिवना नदी रामघाट बैराज पर पानी पहुंचना प्रारंभ हुआ। लेकिन अब फिर से चंबल के पानी की धार कम हो गई है।

ठेकेदार का काम अधूरा, पुलों को है इंतज़ार
मंदसौर। शिवना पर बन रहे नए ब्रिज और संजीत रोड बन रहे ओवरब्रिज का काम एक ही ठेकेदार कंपनी जुगल किशोर इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया गया है। शिवना नदी पर बने वर्तमान पुल के पास ही एक नए पुल के काम को तीन साल हो गए है। लेकिन पूरा नहीं हो पाया है। ठेकेदार ने आधे-अधूरे पिलर बनाकर काम बंद कर दिया है। मप्र सेतु विकास निगम ने ठेकेदार को कई बार नोटिस दिए लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद अब ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड घोषित कर दिया गया है। यहां ब्लैक लिस्टेड होने के बाद इसी ठेकेदार कंपनी ने संजीत रोड पर रेलवे ओवरब्रिज का काम भी रोक दिया है। संजीत रोड ब्रिज की बात करें तो संजीत रोड पर रेलवे लाइन के दोनों तरफ अभी महज 45 % काम ही हुआ है। इसका असर यह है कि पटरी पार के लोगों को अभी भी लगातार परेशानी झेलना ही है। ठेकेदार और सेतु विकास निगम के बीच चल रही तनातनी का असर लंबे समय लोगों को ही झेलना पड़ेगा।