थोक सप्लाई, ट्रकों की खेप और छापों की सेटिंग: सेहत से खिलवाड़ का संगठित खेल

मंदसौर।
सर्दी के मौसम में ड्राय फ्रूट की बढ़ती मांग के बीच मंदसौर में नकली, मिलावटी और घटिया सूखे मेवों का संगठित रैकेट सक्रिय है। यह कोई फुटकर ठगी नहीं, बल्कि ट्रकों से थोक में आने वाला सुनियोजित कारोबार है, जो विभागीय “सेटिंग” के सहारे खुलेआम फल-फूल रहा है।
ड्राय फ्रूट का नाम भले ही “ड्राय” हो, लेकिन इसके कारोबार में शामिल लोग पूरी तरह तर हैं, मुनाफे, मिलावट और मिलीभगत में।
थोक में आता है माल, ट्रकों से होती है सप्लाई
सूत्रों के अनुसार ड्राय फ्रूट का माल बोरियों और पैकिंग में ट्रकों से थोक में मंदसौर पहुंचता है।
न क्वालिटी टेस्ट,
न सही दस्तावेज,
न वास्तविक बिल,
सब कुछ पहले से तय सेटिंग के तहत चलता है। ट्रक आते हैं, माल उतरता है और बाजार में खप जाता है। कार्रवाई की भनक लगते ही “मैनेजमेंट” शुरू हो जाता है।
छापा नहीं, ‘छापे के नाम पर सर्वे’
जब कभी शिकायतें ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो
खाद्य विभाग
GST
या अन्य संबंधित अमला
“छापा” डालने पहुंचता है। लेकिन हकीकत में यह छापा नहीं बल्कि औपचारिक सर्वे होता है।
सैंपल सीमित,
रिपोर्ट कमजोर और अंत में तगड़ा सेटलमेंट,
कार्रवाई कागजों में दिखा दी जाती है और खेल फिर से शुरू हो जाता है।
काजू में झोल: ग्रेड बदलो, मुनाफा बढ़ाओ
काजू की ग्रेडिंग (320, 240, 210, 180) के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है।
आरोप है कि
उच्च ग्रेड काजू अलग निकाल लिए जाते हैं
उसी पैकिंग में लो ग्रेड या नकली काजू भर दिए जाते हैं
ग्राहक को महंगा दाम, व्यापारी को दोगुना मुनाफा
यह सीधा-सीधा धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन है।
इन ड्राय फ्रूट में भी है मिलावट और झोल
जांच में सामने आ रहा है कि काजू ही नहीं, बल्कि कई अन्य ड्राय फ्रूट में भी मिलावट और गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है
1. बादाम
पुराने स्टॉक को केमिकल से चमकाया जाता है
कड़वे या सड़े बादाम नई खेप में मिलाए जाते हैं,
2. किशमिश
नमी बढ़ाने के लिए केमिकल ट्रीटमेंट
फंगस लगी किशमिश को अच्छे माल में मिलाकर बेचना
3. पिस्ता
टूटे और खराब पिस्ता छांटकर अलग नहीं किए जाते
रंग और चमक के लिए कृत्रिम उपाय
4. अखरोट
अंदर से खराब अखरोट बाहर से सही दिखाकर बेचना
वजन बढ़ाने के लिए नमी का खेल
5. तरबूज के बीज
होटल और ढाबों में सप्लाई
घटिया और नकली बीज
ग्रेवी का स्वाद खराब, ग्राहक की सेहत पर सीधा असर
लाखों का कारोबार, पर्चियों पर हिसाब
पूरा कारोबार बिलविहीन और पर्चियों पर चल रहा है।
GST की चोरी,
आयकर की चोरी,
नकद लेन-देन
यानी सरकार को दोहरी मार, राजस्व का नुकसान और कानून की धज्जियां।
कानूनी धाराएं क्या कहती हैं?
इस पूरे मामले में कई गंभीर कानूनों का उल्लंघन साफ दिखाई देता है,
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006
धारा 26 – असुरक्षित भोजन का विक्रय
धारा 27 – खाद्य व्यवसाय संचालक की जिम्मेदारी
धारा 59 – मिलावटी/असुरक्षित भोजन पर जुर्माना और जेल
भारतीय न्याय संहिता (पूर्व IPC)
धारा 318/319 (धोखाधड़ी)
धारा 274/275 (हानिकारक खाद्य पदार्थ की बिक्री)
GST अधिनियम
धारा 122 – टैक्स चोरी पर जुर्माना,
धारा 132 – गंभीर मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान
आयकर अधिनियम
अघोषित आय,
फर्जी लेन-देन,
बेनामी कारोबार की आशंका
सवाल वही: विभाग मौन क्यों?
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद
खाद्य विभाग
GST विभाग
आयकर विभाग
की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए है?
क्या सेटलमेंट सिस्टम ने कानून को बंधक बना लिया है?
बीमारी, धोखा ओर काला कारोबार
ड्राय फ्रूट जो ताकत और सेहत का प्रतीक माने जाते हैं, वही मंदसौर में बीमारी, धोखे और काले कारोबार का जरिया बन चुके हैं। जब तक जिम्मेदार विभाग ईमानदारी से कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक आम आदमी महंगा दाम देकर नकली सेहत ही खरीदता रहेगा।




