

(10 गांवों से जुटे हजारों समाजजन, संतों के सानिध्य संगठन और संस्कार का संदेश)
दलौदा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलन श्रृंखला के अंतर्गत रविवार को दलौदा मंडल में विराट हिंदू सम्मेलन भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में दलौदा, दलौदा रेल, एलची, पिपलिया मुझावर, नाइखेड़ी, टोलखेड़ी, बानीखेड़ी, निम्बाखेड़ी, फतेहगढ़ एवं नई फतेहगढ़ सहित 10 गांवों से हजारों की संख्या में सर्व हिंदू समाजजन सम्मिलित हुए।
स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित सम्मेलन में संतों के सानिध्य के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समाज को संगठन, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया। सम्मेलन में आगमन पर साधु-संतों का निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा मार्चपास्ट व सलामी देकर स्वागत किया गया। विद्यार्थियों ने सामाजिक विषयों और राष्ट्रप्रेम से जुड़ी प्रभावशाली प्रस्तुतियां भी दीं।
संघ कार्य राष्ट्र निर्माण का आधार — राघवेंद्र देराश्री
मुख्य वक्ता विद्या भारती मालवा प्रांत, मंदसौर विभाग समन्वयक राघवेंद्र देराश्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होना केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज जागृत और संगठित नहीं रहा तो देश व समाज की स्थिति को हम भली-भांति समझ सकते हैं।
उन्होंने संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा किए जाने के ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित करते हुए कहा कि जाति, वर्ग, भाषा और भेदभाव में बंटे समाज को एक सूत्र में पिरोना ही संघ स्थापना का मूल उद्देश्य रहा है। संगठित समाज ही स्वतंत्रता और विकास का वास्तविक आनंद ले सकता है।
अहिंसा से ही विश्व शांति संभव — आचार्य महेंद्रसागर सूरीश्वर
जैन संत आचार्य महेंद्रसागर सूरीश्वर जी ने अपने प्रवचन में अहिंसा को मानवता का सर्वोच्च मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा, आतंकवाद और देशद्रोह की जड़ें समाज की विघटनकारी प्रवृत्तियों में हैं। यदि संसार का प्रत्येक व्यक्ति अहिंसा के व्रत को अपनाए तो विश्व शांति दूर नहीं।
उन्होंने नशे और मोबाइल की लत पर चिंता जताते हुए कहा कि युवा शक्ति का क्षरण राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती है। अहिंसा के साथ श्रमशीलता, जागरूकता और सकारात्मक सोच को अपनाकर ही भारत को विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलाया जा सकता है।
व्यवस्थित तैयारी, घर-घर निमंत्रण
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर पूर्व में कण-कण बालाजी मंदिर, दलौदा में नियमित बैठकों का आयोजन किया गया। विभिन्न व्यवस्थाओं हेतु समितियों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी गईं। समितियों द्वारा घर-घर जाकर पीले चावल एवं निमंत्रण पत्र देकर समाजजनों को आमंत्रित किया गया।
रामधुन टोलियों का नगर भ्रमण
आयोजन से पूर्व प्रतिदिन विभिन्न रामधुन टोलियों ने नगर भ्रमण किया। अंतिम दिन दलौदा नगर की 11 रामधुन टोलियों का संगम बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर पर हुआ। यहां से सभी टोलियां सामूहिक रूप से रामधुन गाते हुए सम्मेलन स्थल पहुंचीं, जहां कलश स्थापना की गई।
सामूहिक भोजन व बाजार बंद
सम्मेलन उपरांत सर्व हिंदू समाज के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आयोजकों के आह्वान पर दिनभर नगर के प्रतिष्ठान भी बंद रखे गए।
आयोजकों ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बताते हुए सभी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं समाजसेवियों के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे हिंदू समाज की एकता और संगठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।






