
नगर पालिका में प्रशासनिक खींचतान का विस्फोट:
शासन के आदेश बेअसर, CMO को चार्ज नहीं नतीजा थप्पड़कांड!
मंदसौर।
नगर पालिका में सोमवार को हुआ थप्पड़कांड महज़ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक अराजकता का परिणाम है, जो बीते कई महीनों से नगर पालिका में पसरी हुई है। शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद नए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को चार्ज न मिलना और प्रभारी व्यवस्था का अनिश्चितकाल तक खिंचना अब खुले टकराव में बदलने लगा है।
सोमवार को अध्यक्ष कक्ष में विकास कार्यों के एस्टीमेट को लेकर हुए विवाद में एक पार्षद पति द्वारा इंजीनियर को थप्पड़ मारने की घटना ने इस जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया कि नगर पालिका में न निर्णय हो रहे हैं, न जवाबदेही तय है।
शासन का आदेश, फिर भी CMO बेचार्ज!
शासन द्वारा आदेश जारी होने के बाद भी नए CMO पी.के. सुमन को अब तक नगर पालिका मंदसौर का चार्ज नहीं दिया गया है। वर्तमान में नगर पालिका की कमान प्रभारी रूप से डिप्टी कलेक्टर अनीता मैडम के पास है।
सूत्रों के अनुसार यह प्रभारी व्यवस्था अस्थायी थी, लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो स्थायी CMO को चार्ज मिला और न ही प्रशासनिक स्पष्टता बनी।
फाइलें अटकीं, संवाद टूटा
इसी अस्थिर प्रशासनिक ढांचे का असर यह है कि
वार्डों के विकास कार्यों के एस्टीमेट अटके हुए हैं
जनप्रतिनिधि बार-बार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं
इंजीनियर और स्टाफ “व्यस्तता” का हवाला देकर जवाब टाल रहे हैं
सोमवार को भी पार्षद पति विक्रम बेरवा अपने वार्ड के विकास कार्यों के एस्टीमेट को लेकर इंजीनियर रोहित कैथवास से जवाब मांग रहे थे। जवाब टालने पर विवाद बढ़ा और बात हाथापाई तक पहुंच गई।
इंजीनियर कैथवास पहले भी विवादों में
इंजीनियर रोहित कैथवास की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। पूर्व में एक पार्षद को नोटिस थमाने का मामला हो या विकास कार्यों में देरी, इन घटनाओं ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच खाई और चौड़ी की है।
आर-पार सवाल
थप्पड़ मारना कानूनन अपराध है और इसकी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन के आदेश ही ज़मीन पर लागू नहीं होंगे,
जब CMO को महीनों तक चार्ज नहीं मिलेगा ?
जब प्रभारी व्यवस्था में कोई निर्णायक नेतृत्व नहीं होगा,
तो नगर पालिका कैसे चलेगी?
और जब सिस्टम पंगु होगा, तो टकराव सड़कों पर ही निकलेगा।
यह घटना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि नगर पालिका मंदसौर में प्रशासनिक शून्यता और आदेशों की अवहेलना का सीधा नतीजा है।
अब देखना यह है कि शासन इस अराजकता पर कब संज्ञान लेता है या फिर अगला विस्फोट किसी और दफ्तर में होगा।
| प्रभारी व्यवस्था का दबाव: अध्यक्ष को करना पड़ रहा है ‘बैलेंस’
नगर पालिका मंदसौर में स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को चार्ज न मिलने के कारण पूरी व्यवस्था प्रभारी मोड में चल रही है। ऐसे में नगर पालिका अध्यक्ष को न सिर्फ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच, बल्कि शासन के आदेश और जमीनी हकीकत के बीच भी लगातार संतुलन साधना पड़ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि प्रभारी व्यवस्था में स्पष्ट निर्णय लेने की सीमाएं होती हैं। कई मामलों में फाइलें आगे बढ़ाने से पहले “ऊपर से संकेत” का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है। इस स्थिति में अध्यक्ष को बार-बार समझाइश और सामंजस्य की भूमिका निभानी पड़ रही है, ताकि टकराव की स्थिति न बने।
लेकिन जब संवाद की जगह टालमटोल ले ले और फाइलें अटकी रहें, तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। सोमवार को हुआ विवाद इसी प्रभारी व्यवस्था के दबाव का लक्षण माना जा रहा है, जहां स्पष्ट नेतृत्व के अभाव में छोटी बात भी बड़ा रूप ले लेती है।




