जिला पंचायत की बैठक में घोटालों की परत खुली — PHE, स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

मंदसौर की ज़िला पंचायत बैठक बनी घोटालों का आईना


मंदसौर
जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक बृहस्पतिवार को विकास के बजाय विवाद की भेंट चढ़ गई। जहां एक ओर कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने गेट पर धरना प्रदर्शन किया, वहीं बैठक के अंदर सदस्यों ने प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ ला दी।

इस दौरान जो आरोप लगे, वे न सिर्फ जिले की प्रशासनिक साख बल्कि सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत को भी कटघरे में खड़ा करते हैं।


1. जल जीवन मिशन में करोड़ों का घोटाला?

जिला पंचायत सदस्य रिंकेश डपकरा ने PHE विभाग पर सीधा आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत 125 गांवों में नल-जल योजना कागज़ों में पूरी दिखा दी गई, जबकि हकीकत में न नल लगे, न पानी पहुंचा।


2. महिला एवं बाल विकास विभाग में ‘फर्जी नियुक्तियों’ का जाल

डपकरा ने बताया कि सहायिकाओं की नियुक्तियों में बारहवीं पास जैसी शैक्षणिक पात्रता को नजरअंदाज कर के मनमानी भर्तियां की गईं।


3. स्वास्थ्य विभाग बना ‘फर्जी बिल विभाग’?

स्वास्थ्य विभाग में भी भारी घोटाले के आरोप लगे।


4. आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की ‘लूट’


अधिकारियों के जवाब बनाम जनप्रतिनिधियों का गुस्सा

जब सवाल पूछे गए तो अधिकारियों के जवाब बेहद औपचारिक और बचाव में नजर आए।
सीएमएचओ चौहान का जवाब:
“हम ईमानदारी से काम कर रहे हैं, शिकायतें देखी जाएंगी।”
इस पर सदस्यों ने तंज कसा: “यह जवाब नहीं, बहाना है!”


कांग्रेस का धरना और गेट बनाम सेट का संघर्ष

गेट पर विरोध में खड़े कांग्रेस नेता दीपक सिंह चौहान बोले:
“हम स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास, PHE और खनिज विभाग की बात करने आए थे, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। अंदर बैठे लोग भी निराश हैं। योजनाएं फाइलों में दबी पड़ी हैं।”


ये सिर्फ हंगामा नहीं, सिस्टम की सेटिंग का पर्दाफाश है

यह बैठक सिर्फ एक “औपचारिक सभा” नहीं थी, बल्कि भ्रष्टाचार और योजनाओं की असफलता की खुली किताब बन गई। अगर अब भी कार्यवाही नहीं हुई, तो यह साफ है कि सिस्टम के भीतर ‘सैटिंग’ है और बाहर सिर्फ ‘नाटक’


मुख्य सवाल जो अब जवाब मांगते हैं:

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