
जिला पंचायत की बैठक में घोटालों की परत खुली — PHE, स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
मंदसौर की ज़िला पंचायत बैठक बनी घोटालों का आईना
- कांग्रेस ने गेट पर किया विरोध प्रदर्शन, अंदर ‘सैटिंग’ से भरी बैठकों का पर्दाफाश
- 107 करोड़ की जल योजना, फर्जी नियुक्तियां और फर्जी बिलों के खुलासे
- जनता के पैसों से योजनाओं की लूट पर उठा सबसे बड़ा सवाल — जवाबदेही कहां है?
मंदसौर
जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक बृहस्पतिवार को विकास के बजाय विवाद की भेंट चढ़ गई। जहां एक ओर कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने गेट पर धरना प्रदर्शन किया, वहीं बैठक के अंदर सदस्यों ने प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ ला दी।
इस दौरान जो आरोप लगे, वे न सिर्फ जिले की प्रशासनिक साख बल्कि सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत को भी कटघरे में खड़ा करते हैं।
1. जल जीवन मिशन में करोड़ों का घोटाला?
जिला पंचायत सदस्य रिंकेश डपकरा ने PHE विभाग पर सीधा आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत 125 गांवों में नल-जल योजना कागज़ों में पूरी दिखा दी गई, जबकि हकीकत में न नल लगे, न पानी पहुंचा।
- योजना की लागत: 107 करोड़ रुपये
- ज़मीन पर खर्च: 25 करोड़ से भी कम
- गायब राशि: लगभग 75 करोड़ रुपये
- सवाल: क्या होगा इस घोटाले का ऑडिट?
2. महिला एवं बाल विकास विभाग में ‘फर्जी नियुक्तियों’ का जाल
डपकरा ने बताया कि सहायिकाओं की नियुक्तियों में बारहवीं पास जैसी शैक्षणिक पात्रता को नजरअंदाज कर के मनमानी भर्तियां की गईं।
- योग्यता शर्तों को दरकिनार कर भ्रष्टाचार
- लाखों की बंदरबांट का आरोप
- जांच की कोई स्थिति स्पष्ट नहीं
3. स्वास्थ्य विभाग बना ‘फर्जी बिल विभाग’?
स्वास्थ्य विभाग में भी भारी घोटाले के आरोप लगे।
- एम.एल. कश्यप द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर फर्जी बिलों के जरिए भुगतान लेने का आरोप
- मामले की जांच तीन साल से लटकी हुई है
- सीएमएचओ सी.एस. चौहान पर 260 कर्मचारियों के अवैध अटैचमेंट जारी रखने का गंभीर आरोप
4. आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की ‘लूट’
- फर्जी इलाज, झूठे क्लेम, और दस्तावेजी हेराफेरी की शिकायतें
- विभाग की भूमिका पर चुप्पी
- जांच और कार्रवाई का अब तक कोई अता-पता नहीं
अधिकारियों के जवाब बनाम जनप्रतिनिधियों का गुस्सा
जब सवाल पूछे गए तो अधिकारियों के जवाब बेहद औपचारिक और बचाव में नजर आए।
सीएमएचओ चौहान का जवाब:
“हम ईमानदारी से काम कर रहे हैं, शिकायतें देखी जाएंगी।”
इस पर सदस्यों ने तंज कसा: “यह जवाब नहीं, बहाना है!”
कांग्रेस का धरना और गेट बनाम सेट का संघर्ष
गेट पर विरोध में खड़े कांग्रेस नेता दीपक सिंह चौहान बोले:
“हम स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास, PHE और खनिज विभाग की बात करने आए थे, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। अंदर बैठे लोग भी निराश हैं। योजनाएं फाइलों में दबी पड़ी हैं।”
ये सिर्फ हंगामा नहीं, सिस्टम की सेटिंग का पर्दाफाश है
यह बैठक सिर्फ एक “औपचारिक सभा” नहीं थी, बल्कि भ्रष्टाचार और योजनाओं की असफलता की खुली किताब बन गई। अगर अब भी कार्यवाही नहीं हुई, तो यह साफ है कि सिस्टम के भीतर ‘सैटिंग’ है और बाहर सिर्फ ‘नाटक’।
मुख्य सवाल जो अब जवाब मांगते हैं:
- 107 करोड़ की जल योजना का ऑडिट कब होगा?
- महिला बाल विकास विभाग की फर्जी नियुक्तियों पर कार्रवाई कब?
- 260 अवैध अटैचमेंट हटेंगे या जारी रहेंगे?
- आयुष्मान योजना की धांधली पर जांच क्यों नहीं हो रही?