हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने हिन्दी जागरूकता रैली निकाली (latest news update )

बाजार ने तो हिन्दी को मान्यता दे दी है सरकार भी देवे…

भाषा को सम्मान देने वाले देश ही उन्नति करते हैं

हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने हिन्दी जागरूकता रैली निकाली

मंदसौर। म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई के तत्वावधान में 14 सितंबर हिन्दी दिवस पर लोह पुरुष सरदार पटेल चौराहा से हिंदी जागरूकता रैली निकाली गई जिसका समापन गांधी चौराहा पर हुआ। रैली के पश्चात सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ निशा महाराणा ने सभी उपस्थित सुधी जनों को हिंदी दिवस पर हिंदी भाषा को उसका वास्तविक सम्मान दिए जाने के बिंदुओं पर आधारित शपथ दिलाई व संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रमों का माध्यम हिंदी भाषा को ही रखा गया है सरकार का पूरा प्रयास है कि  हिन्दी को व्यापकता मिले और इसे राष्ट्रभाषा का  स्वास्तिक सम्मान प्राप्त हो।

सम्मेलन की जिला इकाई के अध्यक्ष वेद मिश्रा ने कहा कि बाजार ने तो हिन्दी की ताकत को समझ लिया है काश सरकार भी हिन्दी की ताकत को समझें आज टेलीविजन व फ़िल्म उद्योह हिन्दी का सहारा लेकर ही अपने व्यावसायिक उद्देश्य में सफल हो रहे हैं।

 शिक्षाविद रमेश चंद्र ने कहा कि जिस देश की मातृभाषा हिन्दी है जिसे हम राष्ट्रभाषा का सम्मान देते हैं उस देश में हिन्दी दिवस मनाना ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 8 साल से  विचारधारा की सरकार है उससे यह अपेक्षा है के हिन्दी को पूरा महत्व मिले किंतु  अभी तक हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता देने का कोई प्रस्ताव इन 8 सालों में सरकार सरकार संसद में नहीं रख सकी है।

 सम्मेलन की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने कहा की हिन्दी केवल एक भाषा नहीं वरन एक संस्कार भी है गौरवशाली परंपरा भी है। संस्कृत रूपी गंगोत्री से निकली हिन्दी गंगा की तरह पवित्र-पावन है किन्तु हमारी कई तरह की विकृतियों से हिन्दी भाषा का सम्मान कम हुआ है हमें हिन्दी को उसका वास्तविक सम्मान दिलाना ही होगा।

 वरिष्ठ कवि नंदकिशोर राठौर ने कहा कि हिंदी भाषा  जैसी व्यापकता दुनिया की किसी भी भाषा में नहीं है हिंदी में उच्चारण का सबसे अधिक महत्व है सोशल मीडिया के में भी हिंदी का ही अधिक उपयोग होता है। समाजसेवी राजाराम तंवर ने कहा कि हमारे देश में हिंदी की अनदेखी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है  जिम्मेदारों को इस इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए। अजीजुल्लाह खान खालिद ने कहा कि एक देश एक राष्ट्र और एक भाषा जरूरी है हिन्दी का सम्मान देश की अस्मिता से जुड़ा है। श्रीमती ज्योति नवहाल ने कहा कि शासकीय विभागों में तकनीकी पक्ष पूरा अंग्रेजी में होने से कामकाज में बहुत बाधा आती है यांत्रिक तकनीक में भी हिंदी का ही उपयोग होना चाहिए।

दशपुर जागृति संगठन के संयोजक सत्येंद्र सिंह सोम ने कहा कि जिन देशों ने अपनी निज भाषा को सम्मान दिया है उन देशों ने ही विकास के शिखर को भी छुआ है, हमारे देश के कर्णधारों को भी यह बात समझनी चाहिए। उन्होंने म प्र  शासन के नीट की परीक्षा को हिंदी में लेने के निर्णय को सराहनीय बताया। हिन्दी साहित्य परिषद के अध्यक्ष हास्य कवि नरेंद्र भावसार ने कहा कि हिंदी के देश में अंग्रेजी का बोलबाला ठीक उसी तरह है जैसे केसर की क्यारी में कैक्टस को उगा दिया गया हो। नरेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि हिन्दी भारत की मूल भाषा है और साहित्य की आत्मा है इसे अपनाना भी चाहिए और सम्मान भी देना चाहिए। चन्दा डांगी ने कहा कि हिन्दी भाषा  देश के स्वतंत्रता आन्दोलन की भी वाहक रही है।

 इस अवसर पर योग गुरु बंसीलाल टांक प्रगतिशील लेखक संघ राज्य कार्यकारिणी सदस्य असहद अंसारी, अजय डांगी रूप नारायण मोदी,ओम प्रकाश व्यास संजय नीमा, विश्वनाथ गड़िया, शंभू सिंह राठौड़ आदि उपस्थित थे। संचालन सम्मेलन की जिला इकाई के वरिष्ठ सदस्य पत्रकार गायत्री प्रसाद शर्मा ने किया आभार सचिव जयेश नागर ने माना। रैली के दौरान हिंदी भाषा के समर्थन में नारे भी लगाए गये।साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि हिन्दी पखवाड़े में विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे व  क्षेत्रीय सांसद को संसद में हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव लाने की मांग का ज्ञापन भी दिया जाएगा।