साहित्य परिषद मंदसौर की जिला उपजेल में कवि सम्मेलन  की अभिनव प्रस्तुति(latest news in hindi danik patallok mandsaur)

थकाती है, छकाती है, फिर भी लुभाती है जिन्दगी
नित नये मोहजाल  में  फसाती है जिन्दगी – डॉ. उर्मिला तोमर
साहित्य परिषद मंदसौर की जिला उपजेल में कवि सम्मेलन  की अभिनव प्रस्तुति
मन्दसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद (मालवा प्रान्त) की मंदसौर इकाई द्वारा               प्रांताध्यक्ष श्री त्रिपुरारीलाल शर्मा इन्दौर के मुख्य आतिथ्य, उपजेल मंदसौर अधीक्षक श्री प्रेमकुमार सिंह की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का उपजेल मंदसौर में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर अतिथियों के मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना पश्चात मंचासीन कवि त्रिपुरारीलाल शर्मा इंदौर, डॉ. उर्मिला तोमर, नरेन्द्र कुमार भावसार मंदसौर, नन्दकिशोर राठौर, सुरेश शर्मा, नरेन्द्र त्रिपाठी, चन्दा डांगी, अजय डांगी, धु्रव जैन का स्वागत पुष्पहारों से जेल प्रशासन द्वारा किया गया।
इस अवसर पर श्री शर्मा ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म जेल में हुआ, पं. नेहरू ने जेल में ही डिस्कवरी ऑफ इंडिया लिखी। जयप्रकाश नारायण ने जेल से ही जनता को जागरूक करने की मुहिम शुरू की अर्थात जेल महापुरूषों की जन्मस्थली के साथ क्रांतिकारक विचारों एवं आंदोलनों की प्रेरणा स्थली रही है। इसलिये जेल में समाज से भटके लोगों को पुनः समाज में रहने लायक होने तक रखा जाता है। साहित्य परिषद की मंदसौर इकाई ने जेल में निरूद्ध बंदी भाईयों को पुनः सामाजिक सरोकार से जोड़ने एवं आनंदित होने के मूल अधिकार के तहत गणेश उत्सव पर कवि सम्मेलन की अभिनव प्रस्तुती जेल में ‘‘कवि सम्मेलन’’ कार्यक्रम बनाकर इसे कार्यान्वित किया।
इस अवसर पर श्री शर्मा ने अपनी कविता ‘‘हिवड़ा में लगा गई आग, बरखा सावन की’’ सुनकर वर्षा ़ऋतु का मानवीय एहसास कराया।
डॉ. उर्मिला तोमर ने फिल्म का उदाहरण देकर जेल में रहकर भी सुधार की बात कही। इसी क्रम में फलसफा जिन्दगी का समझाने वाली कविता ‘‘थकाती है, छकाती है, फिर भी लुभाती है जिन्दगी नित नये मोहजाल मंे फसाती है जिन्दगी’’ सुनाकर जिन्दगी के खट्टे मीठे अनुभवों की जानकारी दी।
इस अवसर पर पहलवान के नाम से मशहूर कवि सुरेन्द्र शर्मा ने मुक्तकों से माहौल को गुदगुदाया तो मोहब्बत में आशिकी की तड़प ‘‘तुम देख लेना हमें झरोखे से हम दूर खड़े आऐंगे, खुदा जाने क्या दस्तुर है, मोहब्बत का, जिसे देखना है वो कब नजर आऐंगे’’ सुनाकर श्रोताओं का दिल टटोला। बाल कवि धु्रव जैन ने मन के रिश्तों की कविता ‘‘जो रिश्ता छवि का दर्पण है, इच्छाओं का है यौवन से…… ’’ सुनाकर दाद बटोरी।
  नरेंद्र त्रिवेदी ने अपनी सुमधुर गायकी के अंदाज में गीत ‘‘चार पैसे कमाने में आया शहर, गांव मेरा मुझे याद आता रहा’’ सुनाकर माहौल तरन्नुम सा बना दिया। वरिष्ठ कवि अजय डांगी ने मालवी कविता ‘‘मूॅ एकलो कई कई करू’’ सुनाकर मालवी हास्य बिखेरा। इसी क्रम में नंदकिशोर राठौर ने मालवी गीत पिता पुत्र संवाद ‘‘किश्न्या काम करया कर थोड़ो, अतरो मती उठ्या कर मोड़ो‘‘ सुनाकर मालवी हास्य प्रस्फुटित किया और श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश किया।
चंदा डांगी ने अपने जीवन में सिंगल यूज प्लास्टिक को जगह नहीं देने और इस का विकल्प अपनाने की अपील करके कपड़े की थैली स्वयं बनाकर निःशुल्क वितरण की बात कहते हुए जीवन में संगती का असर पर कविता ‘‘ कितना प्यार करती थी, कैकई श्री राम से, संगत मंथरा की कर राम को दूर किया’’ अपनी कविता से अच्छा संदेश दिया।
कवि नरेन्द्र भावसार ने अपने चिर परिचित अंदाज में हास्य बिखेरा उनकी रचना ‘‘ कभी स्कूल गया न कॉलेज, इसलिये मुझमें है नॉलेज’’ एवं ‘‘ वकील होकर एक भी केस नहीं हारा’’ और ‘‘भैर्या यूं तो हाँ जी हाँ जी करजे’’ ने श्रोताओं को हंसा हंसाकर लोटपोट कर दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना नंदकिशोर राठौर ने प्रस्तुत की। सफल संचालन हास्य कवि नरेन्द्र भावसार ने किया तो जेल में आकर बंदी भाईयों एवं पुलिस जवानों का स्वस्थ मनोरंजन करने के लिये आभार जेल अधीक्षक श्रीमती सुभद्रा ठाकुर ने माना।
नन्दकिशोर राठौर