सनातन धर्म और संस्कृति को बचाना हमारा पहला कर्तव्य – संतश्री चिन्मयानंदजी(latest news in hindi danik patallok mandsaur)


प्रेस वार्ता में पत्रकारों से चर्चा की पूज्य संतश्री ने
मंदसौर।
शनिवार 3 सितम्बर 2022 को मंदसौर में रामकथा हेतु पधारें संतश्री चिन्मयानंदजी ने एक प्रेसवार्ता कथा स्थल माहेश्वरी धर्मशाला में हुई नगर के पत्रकारों से चर्चा करते हुए संतश्री ने कहा कि संत समाज, जागरूक लोग और मीडिया का पहला कर्तव्य है हमारी सनातनी धर्म और संस्कृति को बचाना। आपने कहा कि हमारी संस्कृति को खत्म करने का एक सुनियोजित तरीके से षडयंत्र रचा जा रहा है। संतश्री ने बताया कि हमारी सनातनी परम्पराएं और संस्कृति इतनी मजबूत है कि मुगल और अंग्रेज भी इसे खत्म नही कर पायें लेकिन अंग्रेज जाते – जाते हमारी मानसिकता में जो अंग्रेजी का और पश्चिमी सभ्यता का बीजारोपण कर गये उसक कारण हमारी संस्कृति को खतरा उत्पन्न होने लगा है। आज हम स्वयं ही हमारी संस्कृति के सबसे बडे दुश्मन हो गये है। पश्चिमी सभ्यता हमारे उपर हावी है।
प्रेस वार्ता में संतश्री ने बताया कि मंदसौर में उनकी यह 6ठीं रामकथा है वे जब भी यहां आते है भगवान पशुपतिनाथ की नगरी में उन्हें अच्छा और सुखद अनुभव होता है। आपने बताया कि सम्पूर्ण मालवाचंल में मंदसौर के लोग सर्वाधिक संस्कारवान है और धर्म को समझते है। आपने बताया कि मेरा एक मात्र उद्येश्य है सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा करते हुए उसका व्यापक प्रचार प्रचार करना। आपने कहा कि मैंने कथा के दौराना भी कहा था यहां भी कह रहा हूं कि हम स्वयं ही ब्राहम्णों, आचार्यो का काम करने लगें है जो घातक है आजकल कई आर्टिफिशियल ब्राहम्ण पैदा हो गये है लेकिन गुलाब को कितना भी निखारा जायें वह कमल नहीं बन सकता और ब्राहम्णों के बारे में भी आपने कहा कि ब्राहम्णों, आचार्यो को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

अपने धर्म के प्रति कट्टर रहें
संतश्री ने कहा कि हमें भी अपने धर्म के प्रति कट्टर रहना चाहिए। फिल्मी मीडिया के माध्यम से कई बार हिन्दू संस्कृति, साधु, संतों को गलत बताकर उनकी गलत छवि पेश कि जाती है। ऐसे में हमें अपने सनातनी धर्म को बचाने के लिए अपने धर्म के प्रति कट्टर होना चाहिए। आपने कहा कि संत को स्वतंत्र होना चाहिए तभी तो वह संत है यदि संत किसी राजनीतिक पार्टी या राजनेता के प्रचार प्रसार करें तो वह गलत है।

कथाओं के कारण ही हमारी संस्कृति आज तक जीवित
आपने कहा कि आज के समय में इंटरनेट के कारण अश्लील सामग्रीयों की बाढ सी आ गई है। उत्तेजक सामग्री आमजनों तक पहुंच रही है जिससे हमारी मानसिकता दूषित हो रही है और कुछ षडयंत्रकारी लोग यही चाह रहे है कि हमारी मानसिकता दूषित हो और हम और हमारी संस्कृति पिछड जाये। लेकिन कथाओं के कारण ही हमारी सनातनी संस्कृति आज तक जीवित है इसलिए जहां भी कथा हो श्रवण अवश्य करना चाहिए।

विरोधी होने चाहिए
चिन्मयानंद जी बापू ने प्रेस वार्त में पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर में कहा कि विरोधी होना चाहिए। विरोधी इस बात के परिचायक हैं कि आप सफल हो रहे है और विरोधी नहंीं होगे तो हमें हमारी गलतियों का अहसास नहीं होगा। आपने बताया कि नई पीढी में अच्छे संस्कार डालने और भारत की गौरवशाली परम्परा से वाकिफ करवाने के लिए भारत की शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है। आपने कहा कि हम सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित रह गये है अंग्रेज तो चले गये लेकिन जो अंग्रेजी छोड गये वह हमारे लिए घातक साबित हो रही है और आज हमने अंग्रेजी को इतना बढावा दे दिया कि चारवेदांे के ज्ञाता, पुराणों के ज्ञाता, ज्ञानवान पंडितों का ज्ञान भी अंग्रेजी के सामने कुछ नहीं यह हमारी मानसिकता पर किया गया वार ही तो है। प्रेसवार्ता में संतश्री ने उपस्थित सभी पत्रकारों का केशरिया दुपट्टा औढाकरा स्वागत किया प्रेसवार्ता का संचालन वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र अग्रवाल ने किया और अंत में आभार विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट शाखा मंदसौर के अनिल गुप्ता ने माना।