श्रावण मास में क्रिस्टल के शिवलिंग की पूजा से पाएं अदभुत लाभ

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का माह है,कथा है कि माँ पार्वती ने इसी माह में भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी,इसलिए इस माह में भोलेनाथ आसानी से प्रसन्न हो जाते है
हम क्रिस्टल के शिवलिंग का उपयोग शिव की पूजा अर्चना में कर अद्भुत लाभ प्राप्त कर सकते हैं विशेष रूप से ग्रीन अवेंचूरिया और एमिथिस्ट से बने शिवलिंग का
वैसे भगवान शिव जो अपने वास्तविक स्वरूप में निराकार है, दुनिया के कई हिस्सों में विभिन्न रूपों में पूजे जाते हैं
सबसे लोकप्रिय शिवलिंग या लिंगम है। लिंग जिसका अर्थ है एक चिह्न या प्रतीक सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है।
ऐसा कहा जाता है कि सृष्टि ओएम या ओयूएम के रूप में उच्चारित ध्वनि के साथ हुई, जिसने ब्रह्मांड में जीवन के कंपन को ट्रिगर किया। यह शब्द स्वयं भगवान शिव का एक रूप माना जाता है।
: यद्यपि शिव की पूजा कई रूपों में की जाती है – शिवलिंग से लेकर मानव तक, लेकिन मूल अभी भी निराकार ऊर्जा की याद दिलाता है। क्रिस्टल से बने शिवलिंग आध्यात्मिक पहलू और शिव के प्रतिनिधि के प्रति समर्पण दोनों को एक साथ लाता है। प्रचुरता और समृद्धि के लिए जलधारी शिवलिंग को हरे रंग में अर्पित करें।
एमिथिस्ट से बने शिवलिंग तराशने के लिए पर्याप्त आकार होने के कारण ये बहुत ही अनोखे हैं और वह भी नीलम के इस गुण के साथ अपने आप में एक बड़ी ऊर्जा संचारित करते हैं
भौतिकी के कई सिद्धांतों में प्राचीन पूर्वी रहस्यवाद के समान समानता है,i: ग्रीन एवेंचुरीयन शिव लिंग का हार्ट चक्र या अनहद चक्र पर प्रभाव होता है
इस शिव लिंग पर अभिषेक करने से समृद्धि मानसिक शारीरिक आर्थिक में बढ़ोतरी होती है
इसकी स्थापना सावन मास में करके और जाप से तमाम समस्या से मुक्त हो जायेंगे

इसकी स्थापना सावन मास में करके और जाप से तमाम समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है
: एमेथिस्ट से बने शिवलिंगआज्ञा चक्र और क्राउन चक्र या सहस्त्रार पर प्रभाव पैदा कर उन्हें एक्टिवेट करते है
इन शिवलिंगों की पूजा अर्चना के साथ इन शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है

ॐ नमः शिवाय
या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

एस्ट्रोवाणी