फौजी मिलकर नवरात्र का महापर्व मनाते है।(latest news in hindi danik patallok mandsaur)

मंदसौर। समीप के गांव अफजलुपर में नवरात्र महापर्व का हर किसी को सालभर से इंतजार रहता है। वैसे तो क्षेत्र के हर गांव में इस पर्व को लेकर उत्साह है लेकिन अफजलपुर में यह खास इसलिए भी हो जाता है कि यहां फौजी मिलकर नवरात्र का महापर्व मनाते है। असम, श्रीनगर से लेकर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर व भारत-पाक सीमा में ड्युटी देने वाले सेना से लेकर अलग-अलग सुरक्षा बलों में पदस्थ युवा फौजी नवरात्र के समय गांव में आते है है और इस पर्व को आस्था व उत्साह के साथ अपने ग्रामीणों के साथ मनाते है।
सीआरपीएफ से रिटायर्ड कर्नल कमल सिंह चंद्रावत एवं आर्मी के रिटायर्ड मदन धनगर ने बताया गांव से अब तक 50 से 60 युवा बीएसएफ, आर्मी, सीआरपीएफ, आरपीएफ के विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जो प्रतिवर्ष नवरात्रि में नवरात्रि का पर्व मनाने के लिए छुट्टियां लेकर आते हैं। जिन्हें छुट्टियां नहीं मिलती है वह वहीं से अपना योगदान देते हैं। गांव के युवा देशभर में कई जगहों पर तो सीमा पर तैनात होकर मातृभूमि की रक्षा का काम कर रहे है। वर्तमान में अभी आठ युवा छुट्टी लेकर यहां नवरात्रि पर्व मनाने आए। जिनमें कैप्टन आदित्य राज सिंह चंद्रावत, सुभाष धनगर, ईश्वर परमार, देवीलाल धनगर, कपिल टेलर, प्रभुलाल गुर्जर, विनोद सुनार्थी एवं संजय सुथार अलग-अलग जगहों पर अपनी सेवाएं दे रहे है। जो छुट्टी लेकर यह नवरात्रि पर्व मनाने आए। इन्होंने बताया हम साल भर तक नवरात्रि पर्व का इंतजार करते हैं। 15 दिन पहले से तैयारियों में लगते हैं। जिन फौजी भाइयों को छुट्टी नहीं मिलती वह भी तन मन से जुडऩे का प्रयास करते हैं। एवं अपना योगदान देते हैं। गांव के किसी भी अन्य व्यक्तियों से ग्रामीणों से गरबा उत्सव मनाने के लिए सहयोग नहीं लेते है। फौजी गरबा मंडल द्वारा पिछले 13 सालों से गरबा उत्सव मनाया जा रहा है। यहां गांव की युवा पीढ़ी जो पुलिस, आर्मी, बीएसएफ, सीआरपीएफ में जाना चाहते हैं। वह तैयारियों के बारे में बारीकी से जानकारी लेते हैं। हमारी यही मंशा है कि इस तरह के आयोजन करने से यहां के युवा एकत्रित हो। और ज्यादा से ज्यादा गांव के युवा भारत माता की सेवा के लिए यहां से निकलकर जाए।
विभिन्न सुरक्षा बलों पर है यहां के युवा
गांव में फौजियों में इस पर्व को लेकर उत्साह ऐसा रहता है कि सभी अपनी-अपनी ड्यूटी से छुट्टी लेकर नवरात्र में गरबा उत्सव मनाने के लिए गांव आते हैं। यहां के 50 से 60 युवा देश के अलग-अलग हिसें में अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सेवाएं दे रहे हैं। यहां के युवा आर्मी, बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित विभिन्न पदों पर है। यहां गरबा मंडल का नाम भी इन्होंने फौजी गरबा मंडल रखा हुआ है। 50 से 60 युवा पूरे 9 दिन तक विभिन्न प्रकार के आयोजन रखते हैं। जिसमें भजन संध्या, प्रतिदिन डांडिया खेलना सम्मिलित है।