पंचायत से चलेगी “राधेय रिटर्न” की पिक्चर ?

मंदसौर। जनसंघ के जमाने से सीतामऊ सुवासरा विस क्षेत्र के पूर्व विधायक स्व. नानालाल पाटीदार ने अपने क्षेत्र की जनता के दिलों पर एक तरफा राज किया…वंशवाद से दीगर चलने वाली भाजपा ने नानालाल पाटीदार के समर्पण के चलते उनके बेटे राधेश्याम पाटीदार को विधानसभा का टिकट देकर नानालाल जी को उपकृत किया । लेकिन हरदीपसिंह डंग की बदौलत भाजपा की वापसी के बाद हुई धमाकेदार इंट्री के बाद मानो जैसे राधेश्याम पाटीदार की स्थिति लूप लाईन में जाने जैसी हो गई । हकीकत यह है कि लंबे समय से राधेय और उनके समर्थकों की राजनीतिक राह थम सी गई या थाम दी गई..लेकिन एक बार फिर “द राधेय रिटर्न” की चर्चाएं विस क्षेत्र में होने लगी है। माना जा रहा है उनकी पूत्रवधु जिपं के वार्ड दस से भाजपा उम्मीदवार बनाने के बाद नए समीकरण पैदा होंगे जिसके चलते राधेय की पूत्रवधु के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष का रास्ता बनाने को समझा जा रहा है, जिला पंचायत तक पहुंचने के बाद यह माना जा रहा है कि राधेय का खोया हुआ फार्म एक बार फिर लौट सकता है।
पूरे प्रदेश में अगर कोई विस क्षेत्र चर्चाओं में रहा तो वह है सीतामऊ सुवासरा विस क्षेत्र। इसी विस क्षेत्र ने कांग्रेस की सरकार का तख्ता पलट किया था। तख्ता पलट करने वालों में महत्वपूर्ण भूमिका केबिनेट मंत्री, सुवासरा भाजपा विधायक और सुवासरा पूर्व कांग्रेसी विधायक हरदीपसिंह डंग की मानी जाती है। हरदीपसिंह डंग ने कांग्रेस की टिकीट पर राधेश्याम पाटीदार को हराया। इसके बाद भाजपा की टिकीट पर मंत्री डंग अच्छे खासे अंतर से विजय हुवे । पार्टी ने हरदीपसिंह डंग को मंत्री बनाकर नवाजा भी, इसके बाद मानो पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार की राजनीतिक गाड़ी रिजर्व में आती दिखी या यूं कहें कि गाड़ी का पेट्रोल लगभग खत्म ही हो गया हो। कई मौको पर हरदीपसिंह डंग और राधेश्याम पाटीदार के बीच मतभेद भी सामने आए। दोनों ने बयानबाजी भी की। हालांकि वार्ड दस से एक बार फिर राधेश्याम पाटीदार की पूत्रवधु दुर्गा विजय पाटीदार को टिकीट दिया गया है। इसको लेकर एक बार फिर राधेय काफी चर्चाएं में है। पाटीदार के समर्थकों में उत्साह है तो इसी टिकीट के जरिए राधेय जिला पंचायत तक अपनी पूत्रवधु को पहुंचाकर जनता के बीच फिर से अपनी उपस्थिति एक जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि के रूप में करा सकते हैं।
एक जंगल, एक राजा
कहावत है कि एक जंगल में एक ही शेर की हुकुम्मत चलती है। सीतामऊ-सुवासरा विस क्षेत्र की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। हरदीपसिंह डंग के भाजपा में शामिल होने के बाद राधेश्याम पाटीदार का टिकीट कटना तय था। इसके बाद अगर राधेश्याम पाटीदार का राजनीतिक सफर तेजी से आगे बढ़ता तो आने वाले समय में फिर से हरदीपसिंह डंग के राजनीतिक कद पर प्रभाव पड़ सकता था। कहा जा सकता है कि क्षेत्र में बने रहने के लिए यह एक रेस थी जो चली आ रही है। हालंाकि लंबे समय बाद अब एक मौका राधेश्याम पाटीदार को भी मिला है। जो शायद बेलेंस करने की सियासत भी हो ।
कार्ड में नाम तक नहीं था पाटीदार का
विस क्षेत्र के कई कार्यक्रमों में यह नोटिस किया गया कि जिसमें राधेश्याम पाटीदार को दूर रखा गया। इसका एक प्रमाणित उदाहरण है शामगढ़ सुवासरा में बने शासकीय महाविद्यालय का लोकार्पण। कई जनप्रतिनिधियों और भाजपा संगठन के लोगों के नाम कार्ड में लिखे गए। लेकिन क्षेत्र के पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार का नाम ही कार्ड में नहीं था। इसकी काफी चर्चाएं उस समय रही। राधेश्याम पाटीदार ने इस मामले में यहां तक कहा कि शायद मंत्रीजी मुझे मंच से दूर ही रखना चाहते हैं। वहीं हरदीपसिंह डंग ने इस कॉलेज के निर्माण अपने कार्यकाल में होने की बात कहीं थी।
जिलाध्यक्ष भी नहीं बनाया
भाजपा जिलाध्यक्ष नियुक्ति को लेकर राधेश्याम पाटीदार का नाम सबसे आगे और उनका दावा भी मजबूत था। लेकिन उन्हें जिलाध्यक्ष की कुर्सी से दूर रखा गया। इसके बाद पार्टी ने कोई बड़ा पद भी नहीं दिया। यहीं कारण रहा कि बड़े कार्र्यक्रमों में उनकी मंच से दूरी रही। यह एक सोची समझी साजिश भी कही जा रही थी कि जिससे राधेश्याम पाटीदार के राजनीतिक कॅरियर पर पुनःविराम लग जाए।
सीएम ने की थी नाराजगी दूर
हरदीपसिंह डंग का राजनीतिक कद बढ़ाकर कहीं न कहीं राधेश्याम पाटीदार का कद छोटा किया गया। इसको लेकर नाराजगी स्वाभाविक थी। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ खुद सीएम ने पाटीदार से चर्चा की थी। बताया जाता है कि इस चर्चा में उन्हें जिला पंचायत टिकीट को लेकर भी आश्वासन दिया गया था।
जिपं अध्यक्ष, विधायक के बराबर
वार्ड नौ से पूर्व विधायक पाटीदार की पूर्व वधु के टिकीट मिलने के बाद उनके जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की दावेदारी की अटकलें तेज हो गई है । इधर राजनीतिक जानकारों की माने तो जिपं अध्यक्ष का पद भी एक विधायक से कम नहीं होता। प्रदेश में हर जिले में अलग अलग विस के अलग अलग विधायक होते है, लेकिन प्रदेश के हर जिले में सिर्फ एक ही जिपं अध्यक्ष होता है। मतलब जिलेभर में कई क्षेत्रों में जनता से उसका सीधा संपर्क होता है।