देव गुरु बृहस्पति मीन राशि में हुआ वक्री पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर – डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी (mandsaur patallok news )

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को अपना एक राशि चक्र पूरा करने में लगभग 13 महीने का समय लगता है। शनि के बाद बृहस्पति दूसरे ऐसे ग्रह हैं। जिनकी गोचर अवधि सबसे लंबी होती है। श्रीकल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि जब सौर मंडल में बृहस्पति अपनी परिक्रमा करते हुए सामान्य रूप से आगे की ओर न जाकर पीछे की ओर चलना शुरू करते हैं या ऐसा प्रतीत हो कि वे पीछे की ओर चल रहे हैं। उस स्थित को ज्योतिष में ग्रह का वक्री होना कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ सतीश सोनी के अनुसार शुभ ग्रह गुरु ने 13 अप्रैल 2022 को अपनी स्वराशि मीन में गोचर किया था। अब यही गुरु एक बार फिर से परिवर्तन करते हुए 29 जुलाई 2022 शुक्रवार के दिन प्रातः 1:33 पर मीन राशि में वक्री हो गए हैं, उसके बाद 24 नवंबर 2022 गुरुवार सुबह 4:36 पर पुनः मीन राशि में मार्गी होंगे।

वक्री बृहस्पति डालेंगे ग्रहों पर दृष्टि

29 जुलाई को मीन राशि में वक्री होकर गुरु अपनी पंचम दृष्टि कर्क में मौजूद सूर्य और बुध पर नजर डालेंगे, वक्री गुरु का बुध व सूर्य को दृष्टिगत करना गुरु की शुभता और उसके बल में वृद्धि करेगा। इसके साथ ही 7 अगस्त को शुक्रवार कर्क में गोचर करते हुए उन पर भी गुरु की दृष्टि पड़ेगी। ऐसे में गुरु, शुक्र का दृष्टि संबंध शुक्र के प्रभाव को बढ़ाएगा। इससे जातकों के स्वभाव में भोगी और आध्यात्मिक दोनों रूप में बदलाव देखने को मिलेंगे। डॉ तिवारी के अनुसार खासतौर से मीन राशि के जातक अपनी भौतिक इच्छाओं में वृद्धि महसूस करते पाए जाएंगे। कई बड़े शेयर अचानक टूटेंगे, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आएगा, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में धार्मिक मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ सकता है। दैनिक उपयोगी चीजों की कीमतों में तेजी आने से आमजन में छटपटाहट दिखेगी। वहीं दुनिया की अर्थव्यवस्था में गिरावट होने के संकेत। सामान्य रूप से यह समय देश दुनिया के लिए चुनौती पूर्ण रहेगा। विश्व के नेताओं की बुद्धि विपरित होगी। जनता में आक्रोश बढ़ेगा। महंगाई पहले कि अपेक्षा बढ़ेगी। 10 सितंबर से 2 अक्टूबर तक शनि, गुरु के साथ बुध ग्रह भी वक्री रहेगा और शुक्र भी साथ होकर नीचभंग राजयोग का निर्माण करेगा।