तहसीलदार के साथ मारपीट कर शासकीय कार्य में बाधा पँहुचाने वाले 04 आरोपीयों को 02-02 वर्ष का सश्रम कारावास।(latest news in hindi danik patallok mandsaur)

नीमच। सुश्री संध्या मरावी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नीमच द्वारा तहसीलदार के साथ मारपीट कर शासकीय कार्य में बाधा पँहुचाने वाले चार आरोपीगण (1) हेमराज उर्फ गुडडू पिता भंवरलाल गुर्जर, उम्र-39 वर्ष, (2) बबलू पिता जगदीश गुर्जर, उम्र-32 वर्ष, (3) छगनलाल पिता देवराम गुर्जर, उम्र-45 वर्ष तथा (4) कालूसिंह पिता लालाराम गुर्जर उम्र 39 वर्ष, चारो निवासी ग्राम मात्याखेडी तहसील जीरन जिला नीमच को धारा 332 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में 02 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 353 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 147 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष का सश्रम कारावास व धारा 186 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 माह के कारावास तथा कुल 2000-2000रू जुर्माने से दण्डित किया।


श्रीमती कीर्ति शर्मा, एडीपीओ द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि घटना 07 वर्ष पुरानी दिनांक 09.04.2015 की शाम के 06ः30 बजे जिला चिकित्सालय परिसर, नीमच की हैं। घटना दिनांक को अड़ानी फैक्ट्री, भाटखेड़ा पर हादसे में 05 व्यक्तियों की मृत्यु हो जाने से उनके शवों का पोस्टमार्टम किये जाने हेतु जिला चिकित्सालय, नीमच में लाया गया था। जिला चिकित्सालय में काफी भीड़ एकत्रित हो जाने से उसे नियंत्रीत किये जाने व कानून व्यवस्था बनाये जाने हेतु तहसीलदार एवं कार्यपालन दण्डाधिकारी गोपाल सोनी की ड्यूटी लगाई गई, इसी दौरान भीड़ में से आरोपीगण उत्तेजीत होकर तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की व मुक्के मारकर मारपीट करने लगे। स्थिति नियंत्रीत होने के बाद में फरियादी तहसीलदार गोपाल सोनी घटना की रिपोर्ट पुलिस थाना नीमच केंट पर की गई, जिस पर से अज्ञात आरोपीयों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 180/2015, धारा 332, 353, 147, 186 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत पंजीबद्ध किया गया। पुलिस नीमच केंट ने विवेचना के दौरान घटना की विडियोग्राफी के आधार पर आरोपीगण की पहचान करते हुवे उन्हें गिरफ्तार कर शेष आवश्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग-पत्र नीमच न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।


श्रीमती कीर्ति शर्मा, एडीपीओ द्वारा विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से न्यायालय में फरियादी, चश्मदीद व अन्य महत्वपूर्ण साक्षीगण के बयान करवा कर आरोपीगण द्वारा तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट कर शासकीय कार्य में बाधा पँहुचाये जाने के अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराते हुए आरोपीगण को कठोर दण्ड से दण्डित किए जाने का निवेदन किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा आरोपीगण को धारा 332 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में 02 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 353 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 147 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष का सश्रम कारावास व धारा 186 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 माह के कारावास तथा कुल 2000-2000रू जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्रीमती कीर्ति शर्मा, एडीपीओ द्वारा की गई।