चली “कमल” की कलम तो कांग्रेस आई सूत सावल में

चिट्ठी आई है ,,,
अरमान अधूरे तो
सपने चकनाचूर

मंदसौर । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 12 जून को एक पत्र समस्त निर्वाचन के बनाए गए पर्यवेक्षको ,प्रभारियों एवं जिला कांग्रेस अध्यक्षों को लिखा।
इस पत्र क्रमांक 681/22 ने कई नगर पालिका निगम,नगर पालिका निगम, नगर परिषद नगर पंचायत के उम्मीदवारों की सपने चूर-चूर कर दिए।
पत्र के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के पास इस बात की शिकायतें पहुंच रही थी कि कई प्रभारी अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर रहे हैं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के फोन पर कई बड़े स्तर के नेताओं ने अपनी सेटिंग कर ली है और अपने वार्ड की जगह दूसरे वार्ड से उनकी उम्मीदवारी तय हो चुकी है, क्योंकि जो दिग्गज नेता अपने वार्डों में आरक्षण की वजह से खड़े नहीं हो पा रहे थे उन्होंने अपने रसूख और पहुंच के चलते दूसरे वार्डो से कांग्रेसी उम्मीदवार बनने के पूरी जुगाड़ कर ली थी और लगभग उनके नाम भी तय हो गए थे।
चिट्ठी का ये है मजमून,,,
जब कमलनाथ को इस संबंध में शिकायतें बहुत अधिक मिलने लगी की रसूखदार अपने 21 दूसरे वार्ड में जाकर येन केन प्रकारेण जुगाड़ कर रहे हैं तो उन्होंने 12 जून को एक पत्र जारी किया जिसका मजमून यह था कि “””वर्तमान में हो रहे नगर पालिक निगम ,नगर पालिका परिषद ,नगर परिषद के निर्वाचन हो में कांग्रेस पार्टी से उन्हें ही टिकट दिया जाए जो उस वार्ड का निवासी हो और वहां का मतदाता भी हो “””
,इससे कई उम्मीदवार जो आरक्षण की वजह से दूसरे वार्डो में अपनी सेटिंग कर ली थी उनकी उनके सपने अधूरे रह गए हैं उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पीसीसी तक अपनी पहुंच के चलते टिकट के जुगाड़ पर्यवेक्षकों से कर लिए थे और पर्यवेक्षक भी बहती गंगा में हाथ धो रहे थे और यह खबर कमलनाथ तक पहुंच गई थी, उन्होंने 12 जून को जो पत्र जारी किया है इससे कांग्रेस के पर्यवेक्षकों व प्रदेश स्तर के कांग्रेस पदाधिकारियों, विधायकों को भी धक्का लगा है तथा उनके समर्थक जो दूसरे वालों से अपनी गोटियां बिठा चुके थे अब उन्हें हताशा निराशा हाथ लगेगी क्योंकि अगर उन्होंने टिकट जुगाड़ भी लिया तो शिकायत सीधी पीसीसी तक जाएगी ।
एक्शन मोड़ पर कमलनाथ ,,,
अगर आदेश के बावजूद किसी पर्यवेक्षक जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने गड़बड़ की तो इसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ सकता है, इसलिए कोई भी पर्यवेक्षक या जिला कांग्रेस अध्यक्ष उम्मीदवार चयन समिति कोई रिस्क नहीं उठाएगें और अब उन्हें उसी वार्ड में मतदाता निवासी को ही टिकट देना है।
निराशा में आशा की किरण,,,
कई उम्मीदवार टिकट से वंचित हो रहे थे, अगर नाथ जी के फरमान का ईमानदारी से पालन किया गया तो अब उन्हें टिकट मिल सकेंगे जबकि जो उम्मीदवार दूसरे वार्डो से टिकट लेकर नगर परिषद अध्यक्ष या नगर पालिका अध्यक्ष के सपने जो रहे थे अब उनके सपने राख के ढेर में मिल गए हैं, फिलहाल नाथ जी के इस पत्र ने उनकी सब जुगाड़ को बेकार कर दिया क्योंकि कई उम्मीदवार अपने आप को नगर पालिका परिषद और नगर परिषद के अध्यक्ष के सपने देख ही नहीं रहे थे बल्कि उन्होंने मान लिया था कि अब अध्यक्ष की कुर्सी उनकी पहुंच के बिल्कुल नजदीक है और अति शीघ्र ही वे अध्यक्ष के रूप में नगर पालिका परिषद, नगर परिषद का आसन रास्ता देख रहे थे ।
भाजपा भी बैकफुट पर,,,
कांग्रेस में चलते भाई भतीजावाद और परिवारवाद को लेकर बीजेपी के नेता भी दूसरे वार्ड से अपने परिजनों के टिकट की जुगाड़ कर रहे थे जो लगभग फाइनल भी हो चुके थे पर अब उन्हें भी उसी वार्ड के कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाना पड़ेगा वरना बाहरी उम्मीदवार का ठप्पा उनके उम्मीदवार पर लगेगा, जिससे उनकी जीत प्रभावित हो सकती हैं ।