गुमटियां रखवाने का शहर में चलन बन गया है (latest news in hindi danik patallok mandsaur)

मंदसौर। शहर की अवैध गुमटियों पर पूर्व नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या के बाद कार्रवाई की थी, लेकिन यह सिर्फ एक दिखावा था। फिर से कुछ दिनों बाद राजनीतिक संरक्षण में अवैध गुमटियों का कारोबार शुरु हो गया। जहां सरकारी जमीन दिखी वहां अपने रसूख के चलते गुमटी रखवा दी जाती है फिर इसका किराया कौन वसूल रहा और यहां व्यवसाय कोन करता है। इसकी किसे जानकारी नहीं। इतना ही नहीं जितनी गुमटियां लगी हुई है, उनमें से आधी गुमटियों ही नपा की रसीद कटवाती है। नेताओं या रसूखदारों के हस्तक्षेप के कारण नपा और प्रशासन भी इन गुमटियों को हटाने की हिम्मत नहीं दिखा पाता है। जब कभी बड़ा घटनाक्रम होता है तो कुछ चुुनिंदा गुमटियों को हटाया जाता है। जबकि शहर में हर क्षेत्र में सडक़ों और चौराहों के किनारों पर अवैध गुमटियंा ंरखी हुई है।
तीन हजार गुमटिया
जिला अस्पताल के बाहर, स्टेशन चौराहा, स्टेशन रोड, महाराणा प्रताप बस स्टैंड चौराहा, नेहरु बस स्टैंड क्षेत्र, कंट्रोल रुम चौराहा, श्रीकोल्ड चौराहा के अलावा शहर के हर और गुमटियों रखी हुई है और संरक्षण के कारण गुमटियों का यह कांकस कोई तोड़ भी नहीं पा रहा है। पूरे शहर में 3 हजार से अधिक गुमटियां अवैध रुप से रखी हुई है। सरकारी जमीन पर कब्जा और गुमटी रखने के कारण नपा हर दिन 10 रुपए की रसीद काटकर राजस्व वसूलती तो है लेकिन वह बहुत कम लोगों का।
रसूखदार वसूलते किराया
गुमटियां रखवाने का शहर में चलन बन गया है। रसूख के दम पर नेता या रसूखदार गुमटियां रखवाते है और किराए पर देकर इनका किराया भी वहीं वसूलते है। नपा 10 रुपए की रसीदें फाडक़र वसूलती है, लेकिन जिनती संख्या में गुमटियां रखी उन सभी से राजस्व भी नहीं वसूली हो पाती है। इतना ही नहीं नपा सिर्फ राजस्व वसूली करती है। नपा के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है कि वह किन लोगों से गुमटियों का राजस्व ले रही है और किन क्षेत्रों में किन लोगों की गुमटियां संचालित हो रही है। इसी कारण गुमटियों के गिरोह का कोई बेनकाब भी नहीं कर पा रहा है। और गुमटियों का यह अवैध काम तेजी से बढ़ता जा रहा है।