कुछ मीठा हो जाए” बना खतरनाक मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट नहीं(latest news in hindi danik patallok mandsaur

मंदसौर। फूड सेफ्टी एंड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दो साल पहले खाद्य सुरक्षा के नए नियम जारी किए थे। इसमें दुकानों पर हर मिठाई के बनाने का समय, उसकी एक्सपायरी सहित अन्य जानकारियां दाम के साथ लिखी जाना अनिवार्य किया था। आज तक नियम कागजों से बाहर नहीं आ सके। जिले में खाद्य अधिकारी भी निष्क्रिय हैं। रक्षाबंधन पर्व दहलीज पर है, लेकिन न कोई जांच हुई है और न कोई निरीक्षण।

शासन लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा कानून में आए दिन नए बदलाव कर इसे सख्त कर रहा है। सुरक्षा के लिए पैकिंग व खुली सामग्री विक्रय के लिए कई नियम बनाए है। जिलास्तरीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते आज तक इन नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। फूड सेफ्टी एंड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दो वर्ष पहले अक्टूबर में खुली मिठाइयों की ट्रे के सामने जिस तरह रेट की पर्ची लिखी जाती है उसी तरह बनाने का समय व एक्सपायरी डेट भी लिखना अनिवार्य किया था। इसको लेकर अक्टूबर में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मिठाई दुकान संचालकों की बैठक लेकर समझाइश दी व नियमों के बारे में बताया। उस समय कुछ ही दुकानदारों ने नियमों का पालन किया। अधिकारियों की लापरवाही के चलते सभी नियम हवा हो गए। रक्षाबंधन पर मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ रही लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक भी जगह जांच करना उचित नहीं समझा।

जिले में 600 दुकानों पर बिक रही मिठाईयां

शहर में बीपीएल चौराह पर दोनों मिठाई दुकान, घंटाघर, नईआबादी, संजीत नाका सहित जगह-जगह मिठाइयां बनीं व खुले में बिकती रहीं। कहीं एक्सपायरी डेट नहीं दी गई। ना ही अधिकारियों ने जांच करना उचित समझा।  जिले में करीब 600 दुकानें हैं। यहां से करीब 30 से 35 क्विंटल मावे की खपत हो जाती है। इससे केवल मिठाइयों का व्यापार ही 20 से 25 लाख रुपए का हो जाता है।

बॉक्स

कौन-सी मिठाई कितने दिन चल सकती है

एक दिन-कलाकंद, बटर स्कॉच कलाकंद, चॉकलेट कलांकद।

दो दिन-दूध से बने आयटम मिल्क बादाम, रसगुल्ला, रबड़ी, रसमलाई, शाही टोस्ट, मलाई रोल, बंगाली रबड़ी, रस काटा, खीर मोहन।

चार दिन-घेवर तिल बुग्गा, केसर कोकोनट लड्डू, मोतीचूर मोदक, खोया बादाम, फ्रूट केक, पेड़ा, प्लेन बर्फी, मिल्क बर्फी, सफेद पेड़ा, बूंदी लड्डू, लाल लड्डू व कोकोनट बर्फी।

सात दिन- काजू कतली, घेवर, मूंग बर्फी, आटा लड्डू, ड्रायफ्रूट गुजिया, काजू केसर बर्फी, काजू लड्डू, बेसन बर्फी, काजू रोल व बालूशाही।

30 दिन-आटा लड्डू, बेसन लड्डू, चना लड्डू, चना बर्फी आदि एक महीने तक चलते हैं।