मंदसौर। नियति नहीं ये घोर मानवीय लापरवाही ही कहीं जायेगी..धरती मां को तृप्त करने वाली भारी वर्षा ने मांओ की कोख उजाड़ी है तो कहीं न कहीं स्कूली प्रबंधन की कमाई की हवस ही कारण मानी जाएगी… उन्हेल से फातिमा कॉन्वेंट स्कूल नागदा पढ़ने जा रहे हैं बच्चों की तूफान गाड़ी ट्रक से टकरा गई जिसमें 6 बच्चों की दुखद मौत हो गई और लगभग 12-13 बच्चे घायल हैं जो विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं । कहने को तो
स्कूल में बच्चों को लाने ले जाने के लिए शासन ने कई कड़े नियम बनाए हैं, पिछले समय इंदौर में हुई दुर्घटना के बाद सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए पर जैसे-जैसे समय बीतता है, हम एक दुर्घटना छोड़कर दूसरी दुर्घटना का इंतजार करने लग जाते हैं और इसी लापरवाही का ये खोफ़जदा नतीजा है यह एक्सीडेंट..
नौनिहाल सुबह खुशी-खुशी माता-पिता से विदा होकर स्कूल के लिए गए थे…माता पिता उनका शाम को लोटने का इंतजार कर रहे थे, पर दुर्घटना की खबर ने उन्हें सदा के लिए अंदर तक झकझोर कर रख दिया ।
इस दुर्घटना के बाद परिवहन विभाग फिर सख्त निर्देश जारी करेगा.. शिक्षा विभाग भी आदेश पर आदेश जारी करेंगा पर लागू कितने हो रहे हैं या होंगे यह सोचनीय हैं।
यह सब देखने की जहमत ना तो शिक्षा विभाग उठाता है, ना परिवहन ।
मंदसौर में रोज परिवहन विभाग के सामने ही सेंट थॉमस स्कूल में जाने वाले ऑटो टेंपो की स्थिति देख ले जिस प्रकार से भेड़ बकरी की तरह बच्चे भरकर जाते हैं और आसपास के गांव से भी टेंपो, ऑटो ,तूफान जैसी गाड़ियों में भरकर आते हैं यही स्थिति एक स्कूल की नहीं है अधिकांश स्कूलों की है।
मंदसौर जिले में भी गरोठ भानपुरा में पहले स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी है किंतु शायद हम किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं, स्कूलों में लाने ले जाने के लिए जो नियम परिवहन विभाग ने बनाए हैं लगभग 80% नियम कहीं लागू नहीं होते ।
बेरोकटोक ढेर सारे वाहन बिना परमिट के बच्चों को ले जा रहे हैं ,ले जा रहे हैं ।
अच्छे सुनहरे भविष्य की तलाश में मां बाप अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में इसलिए भेज रहे हैं कि वहां के बच्चे अच्छी शिक्षा लेंगे , अगर बच्चों को पास के स्कूल में भर्ती करवाते तो ऐसी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है ।
पर जिले में न तो परिवहन विभाग और ना ही शिक्षा विभाग नियम तोड़कर दौड़ते यमराज के वाहनों पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहा हैं। इसलिए कि उन्हें भी फिर ऐसी ही या इससे किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है..तब फिर शासकीय मशीनरी या नेता नगरी उनिंदी नींद से जागकर फिर सो जायेगी..सवाल यह हैं कि यह कब तक चलता रहेगा ।

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