आंखों में समन्दर है…आशाओं का पानी है..! (latest news update danik patallok)

मन्दसौर। वाह प्रकृति ने भरपूर पानी बरसा दिया।नगर के दोनों मुख्य बड़े पेयजल स्रोतों में अथाह जल राशि जमा हो गई है शिवना नदी में दो बार ऐसी बाढ़ आई कि भगवान पशुपतिनाथ को ही जलमग्न कर गई।तेलिया तालाब की चादर बहुत तीव्र गति से चल गई। क्षेत्र में लगभग 35 इंच वर्षा हो चुकी है जो पर्याप्त मानी जाती है। भरपूर पानी चारों तरफ हो चुका है भारी वर्षा के दौरान जल स्त्रोतों को निहारने जब लोग पहुंचते हैं तो प्रचुर जलराशि देखकर उनकी आंखों को समंदर का सा अहसास हुआ और इस प्रचुर पानी में बहुत सी आशाओं का भी संचार हुआ है।पानी ही तो जीवन में सब कुछ होता है। इसीलिए संत कवि रहीम सही कह गए हैं “बिन पानी सब सून।”
प्रकृति ने तो अपना काम कर दिया। पर्याप्त पानी बरसा दिया
अब हमारी बारी है। कहीं ऐसा ना हो कि आज सब दूर पानी-पानी है और ग्रीष्मकाल में शहर के कुछ हिस्सों में जल संकट खड़ा हो जाए। क्योंकि हमारे संसाधन बेहद सीमित है।हमारी जिम्मेदार एजेंसियां पानी को सहेज ही नहीं पाती। बारिश और बाढ़ का यह पानी हमें मुंह चिढ़ाता आगे बढ़ जाता है और हम हाथ मलते रह जाते हैं। अन्यथा और क्या वजह रही होगी कि 2019 में वर्षाकाल में अकल्पनीय 90 इंच वर्षा हुई और मई जून में नगर की कुछ कॉलोनियों के रहवासियों को जल संकट भोगना पड़ा।
जिम्मेदारों को यह जरूर चिन्ता करना चाहिए कि मन्दसौर बारिश का स्टेशन मात्र बन कर क्यों रह जाता है। ऐसा स्टेशन जहां गाड़ी आती तो है पर रुकती नहीं। पानी बरसता तो खूब है पर टिकता नहीं। तो क्या यह भारी वर्षा हमें केवल नयन सुख ही देती है। रात भर पानी बरसा सुबह शिवना में इतनी बाढ़ आ गई कि पशुपतिनाथ की मूर्ति तक पानी पहुंच गया। उधर तेलिया तालाब पूरा भर गया झरना चलने लगा लोंगों की भीड़ ये नजारे देखने इकठ्ठी हो जाती हैं।
हमें सिर्फ विहंगम दृश्य देखने का नयनसुख मिल जाता है पानी तो और कहीं चला जाता है। काला भाटा बांध जब बनाया गया तो जोर-शोर से यह कहा गया कि अब 50 सालों तक हमें पीछे देखने की जरूरत नहीं नगर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। मगर क्या हुआ तकनीकी कमियों से यह बांध दिखाए गए सपने पूरे नहीं कर सका। चंबल का पानी लाने की जब बड़ी मंहगी योजना बनी तो कहा गया था कि इतना पानी हो जाएगा कि पहले की तरह सुबह-शाम नलों में पानी दिया जाएगा। किन्तु इस योजना का हश्र भी सबने देख लिया है योजना तो शुरू हो गई पर एक दिन पानी आता है 10 दिन बन्द रहता है।
नई नपा परिषद पानी को सहेजने की दिशा में ठोस कदम जरूर उठावें।

– ब्रजेश जोशी