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सीआरपीएफ जवान शहीद क्यों नहीं?

आतंकी हमले से देश में उपजा आक्रोश
मंदसौर। जैश ए मोहम्मद के आतंकी ने विस्फोटों से भरी गाड़ी से सेना के जवानों की गाड़ी उड़ा दी, इस वीभत्स नरसंहार में लगभग 40 सैनिकों की जान चली गई। सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए पूरे देश में शोक की लहर है।
सरकार के नुमाइंदे सभीमंत्री, प्रधानमंत्री सब कह रहे हैं कि शहीदों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी, पर कितनी विडंबना है कि कहने को सब इन सैनिकों को शहीद कह रहे हैं पर शासकीय रिकॉर्ड में ने शहीद नहीं माना जाएगा क्योंकि शहीद उन्हें माना जाता है जो जल, थल, नभे सेना के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय के अंदर कार्य करते हैं किंतु पैरामिलिट्री फोर्स जिसके अंतर्गत सीआरपीएफ़, एसएएफ, बीएसएफ, टीवीबीपी के जवान कार्य करते हैं यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।
अगर किसी आतंकी हमले में इनकी मौत होती है तो इन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। जबकि यह भी दुश्मन की गोली के शिकार या दुश्मन की साजिश के शिकार होते हैं, इन्हें वह समस्त सुविधाएं नहीं दी जाती जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले जवानों को दी जाती है। ना तो इन्हें राज्य सरकारों में नौकरियों का आरक्षण मिलता है, नहीं इनके बच्चों को पढ़ाई के लिए शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण है, यहां तक की उनके मरने के बाद उनके परिजनों को पेंशन की सुविधा भी नहीं है। इस प्रकार की दोनों ही बातें कल भी हो रही थी, आज भी हो रही है, और अगर ऐसा ही चला तो कल भी यही होगा।
चाहे रक्षा मंत्रालय हो या गृह मंत्रालय
अगर दुश्मन की गोली का शिकार कोई भी जवान होता है तो उसे शहीद का दर्जा शासकीय रिकॉर्ड में भी दिया जाए। वे समस्त सुविधाएं दी जाए जो रक्षा मंत्रालय के एक जवान को दी जाती है। अब आते हैं 56 इंच के सीने की तरफ मोदी जी ने 2014 में बड़े-बड़े वादे किए थे, हर मीटिंग में कहते थे लव लेटर लिखना बंद कर देना चाहिए, पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए, ५ साल तक आप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर बिरयानी खाने जाते रहे, उनकी माता के लिए शाल देते रहें और तोहफे लेते रहे। कितने ही जवान शहीद हो गए पर एक के बदले 10 सिर लाने की सुषमा स्वराज की ललकार आज भी संसद की दीवारों के बीच चीख रही है पर सिर्फ सख्त कदम उठाएंगे, बड़े भारी कदम उठाएंगे, असंवेदनशील नेताओं के कदम इतने भारी हो गए हैं कि वह आसानी से उठ भी नहीं पा रहे, जड़ हो गए है।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि हम सीमाओं से प्रतिबंधों से बंधित है, एकदम कार्यवाही नहीं कर सकते। आज देश इंदिरा गांधी को याद कर रहा है उस दुर्गा याद कर रहा है जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए, अगर और जिंदा रहती तो पाकिस्तान की आज तीन टुकड़े और होते, और पाकिस्तान इस नापाक हरकत को करने लायक नहीं बचता, किंतु दुर्भाग्य के हमारे बीच आज इंदिरा जी जैसे मजबूत इरादों का कोई नेता नहीं हैं।

patallok

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