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साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक संपन्न

खनिज विभाग द्वारा पिछले 4 वर्षों में क्या क्या कार्यवाही की रिपोर्ट भेजें-कलेक्टर
मंदसौर। कलेक्टर मनोज पुष्प की अध्यक्षता में सुशासन भवन स्थित सभाकक्ष में प्रात: 11 बजे साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान खनिज विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि खनिज विभाग द्वारा पिछले 4 वर्षों क्या-क्या कार्यवाही की गई है। उसकी जानकारी रिपोर्ट बनाकर तुरंत प्रस्तुत करें। शासन स्तर से 1 वर्ष के जो लक्ष्य प्रदान किया जाता है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने में किस तरह से प्रयास होंगे, उनकी जानकारी बताएं। अब तक क्या-क्या कार्यवाही की गई एवं अवैध परिवहन एवं अवैध उत्खनन में आगामी और क्या-क्या कार्यवाही होगी, इसकी भी रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत करें। आदिम जाति कल्याण विभाग ने वन अधिकार पत्र पर क्या कार्यवाही की गई। इसकी नस्ती तुरंत प्रस्तुत करें। स्वास्थ्य अधिकारी डीप फ्रीजर के लिए तुरंत एमपीईबी से कनेक्शन करवाये एवं फ्रिजर शुरू करें। बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री क्षितिज सिंघल एवं सभी जिला अधिकारी मौजूद थे।
सभी विभाग रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कार्य अनिवार्य रूप से करें
बैठक के दौरान सभी जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अपने-अपने विभागों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कार्य पूर्ण करके रखें। जल शक्ति अभियान के अंतर्गत इसका व्यापक प्रचार प्रचार हो। इसके लिए कालेज, महिला बाल विकास विभाग, एनसीसी, होमगार्ड्स सभी मिलकर प्रयास करें। कालेजों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार हो। सम्मेलन एवं इसके लिए जागरूकता रैली का आयोजन भी किया जाए। जिला आपूर्ति अधिकारी बायोडीजल पंप की जांच करें एवं कार्यवाही समय-समय पर करते रहे। कृषि विभाग अमानक खाद एवं बीज की कार्यवाही निरंतर चलते रहने दे। अब तक जो कार्यवाही की गई है उसकी जानकारी प्रस्तुत करें। जिला शिक्षा अधिकारी स्थानांतरण की प्रक्रिया के लिए पोर्टल खोलते ही तुरंत प्रक्रिया प्रारंभ करें। जिला श्रम अधिकारी नया सवेरा के अंतर्गत कार्ड सत्यापित करें एवं अब तक क्या क्या कार्यवाही की गई, कितने नवीन कार्ड बनाए जा चुके है। प्रतिदिन की जानकारी भेजें। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत जिन-जिन विभागों के ज्यादा प्रकरण लम्बित है, निराकरण करने में प्रगति लाये, अगर निराकर नहीं होते हैं तो परिणाम के लिए तैयार रहे।
जल गुणवत्ता परीक्षण के तरीके जाने
मंदसौर। बारिश के मौसम में भू-जल के रासायनिक स्वरूप में परिवर्तन होता है। जल प्रदूषित होने की आशंका बड़ जाती है। इन समस्याओं से निपटने के लिये पीएचई विभाग का सहायक अमला ग्रामीण क्षेत्रो में जाकर फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से पेयजल स्त्रोतो से प्राप्त पानी का जल गुणवत्ता परीक्षण करने का प्रशिक्षण दे रहा है। फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से पानी के 8 प्रकार के टेस्ट जिनमें पीएच मान, फ्लोराइड, क्लोराइड, नाइट्रेट, कठोरता, क्लोरीन, आइरन, गंदलापन का परीक्षण किया जा सकता है। इस क्रम में पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री संदीप दुबे के निर्देशन में  मानव संसाधन विकास जिला सलाहकार मुकेश गुप्ता, सूचना शिक्षा व संचार जिला सलाहकार चसलि बर्डे व विकासखंड समन्वयक सोहनसिंह चौहान  ने मंदसौर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत पटलावद में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण करने का प्रशिक्षण दिया। साथ ही पेयजल स्त्रोतो को स्वच्छ  रखने, क्लोरीनेशन, जल का अपव्यय रोकने, भू जल संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रेरित किया।

दस्तक अभियान की समीक्षा बैठक संपन्न
रिपोर्ट तैयार करने की बजाय फील्ड पर ध्यान देवें-कलेक्टर

मंदसौर। जिले में चल रहे दस्तक अभियान के माध्यम से अब तक कितने बच्चे चिन्हित किए गए, कितनों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो चुका है। इसके संबंध में समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट भवन सभाकक्ष में कलेक्टर मनोज पुष्प की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान दस्तक अभियान के नोडल अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के स्थान पर फील्ड पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाए। जितना फील्ड स्तर पर काम होगा, रिपोर्ट उतनी ही आसानी से बन जाएगी। कोई भी बच्चा न छूटे इस बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें। एक-एक बच्चे को देखे एवं विजिट करें। ऐसे परिवार जो बच्चे का इलाज नहीं कराते हैं या डरते हैं, उनको अन्य किसी बच्चे का उदाहरण दे जो अस्पताल भर्ती हुआ हो। जिसको स्वास्थ लाभ मिला हो। उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए प्रेरित करें। ऐसे बच्चे जो अति कमवजन के बच्चे हैं, जिनको भर्ती करना है। उनको जननी एक्सप्रेस के माध्यम से अस्पताल में लाया जाये, वापस छोड़ा जाए। जो बच्चे भर्ती किए गए हैं उनका क्या इलाज किया गया है। कब उनको भर्ती किया गया, कब उनको रिलीव किया गया, उनका क्या-क्या उपचार किया गया। सभी जानकारी रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए। इसके लिए अलग से रजिस्टर तैयार करें। बैठक के दौरान महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, सुपरवाइजर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
अभियान में टीम बनाकर काम करें सभी विभाग समन्वय करके चले
बैठक के दौरान अभियान की सफलता के बारे में बताते हुए कहा कि, अभियान को सफल बनाने के लिए सभी टीम की तरह काम करें। आपस में समन्वय करे, कोई समस्या आती है, तो उसका आपस में मिलकर निराकरण करें। जिससे सफलता प्राप्त करना बहुत आसान होगा। इस अभियान को सरकारी अभियान मानकर ना छोड़े, इसमें व्यक्तिगत प्रयास भी करें। कोई भी बच्चा ना छूटे इस बात का विशेष ध्यान रखें। महिला बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग फील्ड विजिट पर ज्यादा ध्यान देवें। लोगों से मिले, लोगों से काउंसलिंग भी करें एवं फील्ड में बेहतरीन माहौल निर्मित करें।
जिससे बेहतर परिणाम मिलेंगे। अगर किसी क्षेत्र की प्रगति अच्छी नहीं है, तो वहां पर कैंप का आयोजन भी करें। अगर बच्चों को सामान्य डायरिया हैं, तो ओआरएस का घोल अनिवार्य रूप से पिलाये। ब्लॉक स्तर पर बैठकें भी आयोजित करें। लोगों को सामान्य भाषा में समझाये कि बच्चों को कौन सा रोग है, उपचार से क्या फायदे होंगे। उपचार में क्या सुविधा मिलेगी। जिससे आम व्यक्ति बच्चों को भर्ती कराने के महत्व को समझ सके। प्रत्येक बच्चे की समीक्षा करें।

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