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भाजपा हाईकमान की फटकार चुनाव लड़ो या सन्यास लो

लोकसभा चुनाव: काउंट डाउन 2४
भोपाल। 2018 में पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में उत्तर भारत के 3 राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में भाजपा की हार हो गई थी, उसके बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री अपने राज्य में अपनी दखल बनाए रखना चाहते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री है कि मानते नहीं तीनों मुख्यमंत्रियों को राज्य से दूर करने के लिए एक साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया था, इन्होंने फिर भी अपने राज्य में टांग अड़ाना नहीं छोड़ा, इससे बीजेपी हाई कमान नाराज है तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए कहा गया तो ये नाराज हो गए ये अपना राज्य छोडऩा नही चाहते क्योंकि तीनों विधायक हैं।
राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र अपने-अपने राज्य में सांसद है वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह झालावाड़ से सांसद है तो रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह राजनांदगांव से सांसद हैं ये २०१९ में भी सांसद का चुनाव लडऩा चाहते हैं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी साधना सिंह को विदिशा से चुनाव लड़ा कर जिताने की गारंटी ले रहे हैं पर हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि वे स्वयं चुनाव लड़े या फिर राजनीति से संयास ले ले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विधानसभा हारने के बाद भी और उसके बाद भी मध्य प्रदेश में है अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं भाजपा हाईकमान ने विदिशा से चुनाव लडऩे को कहा तो उन्होंने अपने स्थान पर अपनी पत्नी साधना सिंह को लोकसभा चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव केंद्र को दे दिया किंतु भाजपा हाईकमान ने एक नहीं सुनी और उन्हें सख्त निर्देश दे दिए हैं कि या तो वे चुनाव लड़े लोकसभा का या फिर राजनीति से संयास ले लें।
यही स्थिति राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने भी आई है वे विधायक हो करके राजस्थान में ही रहना चाहते हैं जबकि हाईकमान झालावाड़ संसदीय सीट से उनके पुत्र दुष्यंत सिंह के स्थान पर वसुंधरा राजे को चुनाव लडऩा चाहता है, पर अपने पुत्र को चुनाव लड़ाने के लिए अड़ी हुई है, वसुंधरा राजे समय-समय पर हाईकमान से पंगा लेने में भी नहीं चुकती है और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे विधायक ही रहेंगी और झालावाड़ से उनके पुत्र दुष्यंत सिंह को ही चुनाव लड़ाना चाहेंगी, पर इन्हें भी हाईकमान ने दो टूक कह दिया कि या तो आप चुनाव लड़ें या सन्यास ले ले।
ऐसी ही स्थिति छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के सामने भी पैदा हो गई है वह अपने पुत्र अभिषेक सिंह जो राजनांदगांव से सांसद हैं उन्हें रमन सिंह फिर राजनांदगांव से ही सांसद का चुनाव लड़ाना चाहते हैं जबकि भाजपा हाईकमान ने रमन सिंह को भी स्पष्ट बता दिया है कि वह अपने पुत्र अभिषेक सिंह के स्थान पर सांसद का चुनाव लड़े और अगर नहीं लडऩा चाहते हैं तो वे भी राजनीति से संयास ले कर अपने पुत्र को राजनीति करने दे, क्योंकि जिस प्रकार से राजनीति में परिवारवाद के आरोप भाजपा कांग्रेस को लगाती आई है इस प्रकार से कांग्रेस और विपक्ष बीजेपी पर परिवारवाद का आरोप लगा रही है।
भाजपा में भी मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मंत्री अपने पुत्र -पुत्री, परिजनों को लोकसभा चुनाव में लड़ाने के लिए दबाव बना रहे हैं इससे भाजपा के ऊपर भी परिवारवाद के आरोप लग रहे हैं ऐसी स्थिति में भाजपा हाईकमान सख्त हो गया है और तीनों राज्यों के पूर्व पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके परिजनों के स्थान पर चुनाव लडऩे के आदेश दे दिए है तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों में राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अडिय़ल स्वभाव की है और बीजेपी हाई कमान की बात मानने को तैयार नहीं होगी।
देखना होगा कि केंद्र किस तरह से उन्हें मनाता है अगर उन्हें नहीं मना पाया तो उनके साथ साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी विरोध में उतर सकते हैं पर भाजपा हाईकमान का फैसला कर लिया है कि वह अब किसी भी स्थिति में परिवारवाद सहन नहीं करेगा।

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