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भाजपा को भी लगा परिवारवाद का रोग

भोपाल। कांग्रेस का मिशन 29 बनाम भाजपा का मिशन 29 को लेकर भाजपा पूरी सक्रियता से काम कर रही है प्रदेश चुनाव समिति के संयोजक स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन प्रभारी सुहास भगत, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अपनी बैठक में रणनीति तय की है।
जहां लगभग 15 से 17 सीटों पर एंटीइनकंबेंसी का डर भाजपा को सता रहा है, वहीं भाजपा के नेता भी परिवारवाद के चलते अपने पुत्र पुत्री या परिजनों के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने तो पत्रकारों को यह तक कह दिया कि मेरा बेटा अगर चुनाव नहीं लड़ेगा तो क्या भीख मांगेगा? ऐसे लग रहा है कि भाजपा में भी परिवारवाद का रोग लग गया है, जो भाजपा दिन रात कांग्रेस के परिवार वाद को कोसती थी उसी भाजपा में अब परिवारवाद भी सामने आने लगा है।
विदिशा से भाजपा शिवराजसिंह चौहान को उतारना चाहती थी पर उन्होंने अपनी बजाय अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाना ज्यादा बेहतर समझा और उन्होंने विदिशा से अपनी पत्नी साधनासिंह का नाम आगे कर दिया है, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बेटे आकाश को विधायक बना लिया और अब खुद ताई के स्थान पर भाई इंदौर से लोकसभा के लिए चुनावी तैयारी कर रहे हैं, ताकि इंदौर की सीट को बचाया जा सके और सुमित्रा महाजन को चुनाव के बाद सरकार बनती है तो राज्यपाल बनाने का झुनझुना थमा या जा सकता है वहीं भोपाल से बाबूलाल गौर कांग्रेस में जाने का दबाव बनाकर अपने लिए लोकसभा की सीट भी लडऩा चाहते हैं उन्होंने अपने सूत्रों से भाजपा के नेताओं को अवगत करा दिया है कि कांग्रेस भोपाल से चुनाव लड़ाने के लिए तैयार है और कांग्रेस ने खुलेआम उन्हें इसके लिए आमंत्रित भी किया है, अगर बाबूलाल गौर कांग्रेस में जाते हैं तो उनकी बहू भोपाल के गोविन्दपुरा से विधायक है वह भी इस्तीफा देकर के विधायक का चुनाव लड़कर कांग्रेस में जा सकती है जिससे भाजपा की एक सीट कम हो सकती है और कांग्रेस को पूर्ण बहुमत की ओर जाने का मौका मिल जाएगा इसलिए बाबूलाल गौर भी दबाव बनाए हुए हैं।
वहीं प्रभात झा अपने बेटे तुष्मुल झा लिए टिकट की दावेदारी कर सकते हैं नरेंद्रसिंह तोमर स्वयं भी दावेदार हैं और अपने बेटों को अगले चुनाव में दावेदारी करवा सकते हैं, वहीं विदिशा सीट के लिए पूर्व वित्त मंत्री राघवजी भाई अपनी पुत्री ज्योति शाह को विदिशा से चुनाव लडऩे के लिए हाईकमान से गुहार लगा चुके हैं। बीजेपी वैसे तो परिवारवाद की विरोधी रही है प्रदेश के नेता परिवारवाद की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

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