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फानी दुनिया से मातुश्री का यूं गुजर जाना …!

स्मृति शेष
आध्यात्मिक और रूहानी रंगरेज राधास्वामी जी के रंग में रंगी मॉं भगवती देवी रामचंदानी ने शिवरात्री के दिन फानी दुनिया को अलविदा कह दिया … रोज बनती बिगड़ती दुनिया के नियमों के बीच मॉं ने हमें मजबूत और तटस्थ रहने के लिये एक तरह से विधाता बनकर घड़ा अभावों की आंधियों के बीच उनका आध्यात्मिक और आत्मिय बल कभी डगमगाया नहीं।
राधास्वामी सत्संग व्यास मंदसौर की वे वह फांउडर्स थी जिन्होंने अपने अभाव ग्रस्त छोटे से कच्चे एक कमरे के घरोंदे राम मोहल्ले में सत्संग के इकतारें का राग छेड़ा … सत्संग की इस बयार में उनके हमकदम पति रामचंद्र रामचंदानी ने पाठी (गुरू महाराज के प्रवचनों को बांचने (पढऩे) की शुरूआत की) …. राधास्वामी जी के पंथ के हुजुर महाराज चरणसिंह जी से उन दिनों पति-पत्नि की बकायदा चिट्टी-पत्री के जर्ये न सिर्फ बात होती थी बल्कि इस सिलसिले के पल अभी भी स्व. भगवती देवी की धरोहर के रूप में हमारे पास मौजूद है … राम मोहल्ले के सत्संग की इस ज्योत का उजास बाद में कालाखेत में ‘मोती मांÓ के यहां (मोतीलाल सेवलदासानी) के निवास स्थान से चक्रवर्ती कालोनी और वर्तमान में सौंधनी चौराहा क्षेत्र में अखंड ज्योत के रूप में चहुं और उजास फैला रही है।
91 बरस की उम्र में भी मां अंतिम समय तक जींवटता, विशालता औैर सहनशीलता के साथ हर परिस्थितियों से जुझने में अक्षुण्ण रहती थी … वे हर पल हम पर आशीषों की बरखा बरसाती हुए फानी दुनिया से गुजर गयी और जाते जाते हमें अपनी दुवाओं के आलिंगन में हमेशा के लिये बांध गयी।
-रामचंदानी, परिवार

patallok

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