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न्याय प्रणाली मानवीय संवेदना से ओतप्रोत होनी चाहिए

मन्दसौर। वर्तमान में सामान्य जनता के लिए न्यायालय से न्याय प्राप्त करना एक सपना बनकर रह गया है आजादी में सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय मिलने की प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए सरकारों का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए।
उक्त विचार राष्ट्रसंत श्री कमलमुनि कमलेश ने मंदसौर जिला सत्र न्यायालय द्वारा बार एसोसिएशन में मानवीय संवेदना और कानून सेमिनार को संबोधित करके कहे। आपनेे कहा कि न्याय प्रणाली मानवीय संवेदना से ओतप्रोत होनी चाहिए कानून मानवीय संवेदना की रक्षा के लिए है उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका का अपने आप में सर्वोपरि स्थान है जिसके माध्यम से देश के बड़े से बड़े अपराधी को सबक सिखाने का अधिकार है। जैन संत कहा कि कानून डंडे और दबाव से अपराध को दबाया जा सकता है मूल से खत्म नहीं किया जा सकता है। प्रेम और करुणा के साथ संवेदना का समावेश किया जाए तो ह्रदय परिवर्तन हो सकता है। राष्ट्रसंत ने बताया कि लोकतंत्र में आजादी के इतने वर्षों बाद भी सामान्य जनता को अपने अधिकारों की जानकारी ना होना एक दुखद पहलू है। आपने कहा कि दुआएं किसी से भी ली जाए हमारे नसीब परिवर्तन में ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
राष्ट्रसंत का अदालत परिसर में जिला एवं सत्र न्यायधीश तारकेश्वर सिंह एवं सभी न्यायाधीशों के द्वारा अभिनंदन किया गया। जिसमें विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा, रमेश कुमार गुप्ता, निशा गुप्ता, अपर जिला न्यायाधीश जयंत शर्मा, मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी संतोष कुमार चौहान, न्याय दंडाधिकारी अनिलसिंह जैन भी उपस्थित थे। बार एसोसिएशन के जयदेव सिंह चौहान, महेश शर्मा, राकेश शर्मा, अशोकसिंह तोमर, अजय सिखवाल, विमल तरवेचा, रिचा जैन, सुनील जैन, प्रकाश रातडिया, रजनी शर्मा, रचना परिहार, नरेंद्र छाजेड़, गोपाल कुमावत, गोपाल कृष्ण पाटील आदि ने सेमिनार ने सुंदर व्यवस्था की। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से आभार व्यक्त किया।

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