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गुटबाजी है कि जाती नहीं

मंदसौर। गुटबाजी और कांग्रेस दोनों एक दूसरे के पर्याय हो चुके हैं मध्यप्रदेश में गुटबाजी ने इतनी गहरी जड़े जमा ली है कि वह उसे कोई उखाड़ भी नहीं सकता 10 जनपथ भी इसके सामने बेबस है, प्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य, सुरेश पचौरी, अजय सिंह के गुट ऐसे हावी हो गए हैं कि इस गुटबाजी के कारण ही 15 साल तक कांग्रेस सत्ता से दूर रही प्रदेश में गुटबाजी है कि कांग्रेस से जाती नहीं।
प्रदेश में टिकट वितरण हो से लगा कर मंत्रियों के विभाग वितरण तक इतने विवाद बड़े कि हर विवाद के कारण दिल्ली दरबार में जाकर इन्हें अपना दुखड़ा सुना ना पड़ रहा है, और दिल्ली दरबार अंतिम निर्णय देता है।
अगर गुटबाजी इसी तरह बढ़ती रही तो ग्राम पंचायतों के पंचो के लिए भी शायद इन नेताओं को दिल्ली दरबार में दस्तक देना पड़े। ताजा मामला मंत्रियों के विभागों के बंटवारे का है। जिसे लेकर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और सिंधिया तीनों अपनी अपनी जिद पर अड़े हैं सबसे ज्यादा महत्व विभाग गृह परिवहन और वित्त को लेकर है यहां कमलनाथ गृह और परिवहन अपने खास समर्थक आदिवासी नेता बाला बच्चन को दिलाना चाहते हैं, तो वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया यह विभाग अनुसूचित जाति के अपने का समर्थक इंदौर के तुलसी सिलावट को आगे कर रहे हैं, तो दिग्विजय सिंह सबसे वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह को इसके लिए काबिल मानते हैं, इसके साथ ही दिग्गी राजा अपने पुत्र जयवर्धन को वित्त विभाग दिला कर सभी मंत्रियों को अपने कब्जे में रखना चाहते हैं ताकि जयवर्धन के लिए मुख्यमंत्री की राह आसान हो सके, इसलिए लगातार दो दिन की माथापच्ची के बाद भी विभागों का वितरण नहीं हो पाया। जहां कमलनाथ ने सीधा राहुल गांधी पर यह मामला छोड़ दिया है तो, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अहमद पटेल को उसके लिए आगे कर दिया है। वहीं दिग्विजय सिंह राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अशोक गहलोत की मार्फत हाईकमान को अपनी बात पहुंचा चुके हैं। अब देखना है कि यह लाटरी किसके नाम लगती है।

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