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कन्या संकुल भानपुरा में भ्रष्टाचार चरम पर

भानपुरा। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के संकुल पर भ्रष्टाचार के नए-नए आयाम सामने आ रहे हैं कई वर्षों से यहां पर पदस्थ प्राचार्य और उनके बाबू के कारनामों से कन्या संकुल सुर्खियों में बना रहता है। कार्यरत और सेवानिवृत्त अध्यापकों को शिक्षकों से बिना लिए दिए कोई काम शायद ही अभी तक किसी का हुआ हो, सीधे-सीधे उनसे ना लेकर ट्रेजरी के नाम से, विकास खंड शिक्षा अधिकारी या फिर जिला शिक्षा अधिकारी के नाम से शुल्क लेकर ही काम किया जाता है।
यहां तक कि अगर आदेश निकल भी जाते हैं तो उन्हें दबा दिया जाता है और सेवानिवृत्त पेंशनरों को झांसे दिए जाते हैं कि हमने तो तुम्हारी फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेज दी है और वहां से आदेश नहीं आ रहा है बिना लिए वहाँ से कुछ नहीं होगा शिक्षक/सेवानिवृत्त परेशान हो करके और इनकी जायज नाजायज मांगे पूरी करते हैं तब जाकर उनके आर्थिक प्रकरणों का निराकरण होता है।
किंतु अभी जो एक मामला सामने आया है उसमें लगभग 7 लाख से ऊपर का घालमेल हुआ है रमेश चंद्र बागेरिया जो सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय कैलाशपुर में पदस्थ था उसका स्थानांतरण संकुल शासकीय विजयाराजे उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उज्जैन में हो गया था।
रमेश बागेरिया 19 अगस्त 2012 में यहां से कार्यमुक्त कर दिया गया था, और उसकी एलपीसी 27 जनवरी 2014 अर्थात 14 माह बाद भेजी गई। और उसका 14 माह का वेतन कन्या संकुल भानपुरा से दिया गया।
नियमानुसार जब शिक्षक का ट्रांसफर हो गया वहां से कार्यमुक्त कर दिया जाता है उस दिनांक से ही उसका एलपीसी अर्थात लास्ट पे सर्टिफिकेट भेज दिया जाता हैं, जहां पर उसका ट्रांसफर होता है वहां के वेतन केंद्र को या वेतन आहरण अधिकारी को उसका अंतिम वेतन भुगतान प्रमाण पत्र भेज दिया जाता है।
किंतु बागेरिया का यह प्रमाण पत्र नहीं भेजा जाना कई संदेहों को जन्म दे रहा है प्रमाण पत्र नहीं भेजा यह बात और है, किंतु 14 माह तक बागेरिया उज्जैन संकुल में काम कर रहा है और उसका वेतन का आहरण भानपुरा से हो रहा है यह आठवां आश्चर्य ही कहें तो कम नहीं होगा।
अगर संकुल केंद्र के अंतर्गत किसी शाला में किसी शिक्षक को पदस्थ कर दिया जाए तो कुछ समय तक वहां का वेतन उसी संकुल में होने के कारण निकाला जा सकता है, किंतु संकुल के बाहर का भी अगर शिक्षक होता है तो उसका एलपीसी जारी होता है यहां तो विकासखंड छोडिय़े जिला से बाहर संभाग स्तर पर ट्रांसफर हो गया किंतु यहां की प्राचार्य ज्योति सामेंरिया और बाबू तिवारी की मिलीभगत से 14 माह तक लगभग सात लाख रूपये का भुगतान संकुल केंद्र भानपुरा से हो गया।। इस मामले को पूर्व में भी उठाया गया था किंतु जिले में शिकायत सेक्शन का प्रभारी से बाबू की सेटिंग हो जाने के कारण मामले को दबा दिया गया ,किंतु अब जिला शिक्षा अधिकारी आर एल कारपेंटर ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। देखना है कि जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होता है या नहीं, क्योंकि इस मामले को दबाए जाना अब संभव नहीं होगा क्योंकि सात लाख रूपये का नुकसान कोषालय का हुआ है।
यह राशि दोषी व्यक्ति के वेतन से वसूल कर जिला कोषालय में या उप कोषालय भानपुरा जहां से यह राशि जितनी भी राशि आहरित हुई है वह जमा करवाई जाना चाहिए।
उक्त राशि संकुल प्राचार्य और बाबू के वेतन से वसूल ही नहीं की जाए अपितु उन्होंने जिस प्रकार से शासन के साथ धोखाधड़ी कर वेतन आहरण किया है इसके लिए इन्हें नियमानुसार सख्त से सख्त सजा दी जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी किसी दूसरे के साथ नहीं कर सके।

patallok

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