इसलिए सभी को हैप्पी न्यू ईयर

शीतलहर की चपेट और ठंडी हवा के थपेड़ों के बीच इस बार 2019 दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है, हिंदुस्तान ऐसा मुल्क है जहां 1760 नव वर्ष आते हैं और हम भी हिम्मती इतने हैं कि हर बार बधाई देने से चूकते नहीं गुड़ी पड़वा, चेटीचंड, दिवाली, मकर सक्रांति, पोंगल, लोनी और हर प्रदेश के अपने-अपने नववर्ष हैं और हम सब में खुश होते हैं, लेकिन साहब 31 फस्र्ट की बात अलग है कुछ लोग इसे कैलेंडर बदली दिवस कहना पसंद करते हैं लेकिन गौरों के पीछे चल कर अपनी कालर ऊंची रखना हमें भाता हे फिर इस बहाने हम उमर खय्याम के वंशज बनने का मौका भी हासिल कर लेते हैं, कई लोग इसे विदेशी बतला कर उसकी आलोचना करते हैं लेकिन अगर कोई बंदा 1 जनवरी को पॉजिटिव वे में लेकर कोई बुराई छोडऩे या कुछ नया शुरू करने को संकल्पित होता है तो फिर हैप्पी न्यू ईयर में कोई पंगा नहीं
बहरहाल इधर मध्य प्रदेश में कांग्रेसियों के लिए जश्न मनाने का मौका है पर किसान कर्ज माफी से हल्का सा मुस्कुराया था कि पाला पडऩे से फसलें बर्बाद होने लगी वह करे तो क्या!
बेरोजगार खुश है कि शायद न्यू ईयर में कमलनाथ उनके कुछ नए मौके उपलब्ध कराएं भाजपा बेचैन है क्योंकि 15 साल की आदत कम नहीं होती शिवराज इसीलिए टाइगर जिंदा है जैसे जुमले उछाल रहे हैं।
खैर केलेंडर बदली का यह जश्न पूरी दुनिया में 25दिसम्बर याने प्रभु यीशु के जन्म से शुरू होता है और 1 जनवरी तक चलता है, बहरहाल हमारी आवाम 70 साल से ऐसे मसीहा की तलाश में हे जो उनके दुख दर्द लेकर सलीब पर चढ़ जाए या फिर थर्टी फस्र्ट की रात कोई ऐसा सांता क्लॉस प्रकट हो जिसकी पोटली में से रोटी कपड़ा और मकान निकले मगर आज तक तो उसे धोखे ही मिले हैं।
पर उम्मीद पर दुनिया कायम है और हिंदुस्तान भी, इसलिए सभी खास ओ आम को हैप्पी न्यू ईयर!!
-मोहन रामचंदानी
संस्थापक
दै. पाताल लोक

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