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शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों को विस में उठाया विधायक सिसौदिया ने

शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों को विस में उठाया विधायक सिसौदिया ने

शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों को विस में उठाया विधायक सिसौदिया ने

शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों को विस में उठाया विधायक सिसौदिया ने
मंदसौर।
विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने मंगलवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में चिकित्सा, शिक्षा एवं लोकायुक्त की कार्यवाहियों से जुड़े विभिन्न सवाल उठाकर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित कराया और कहा कि पीएससी सहित विभिन्न परीक्षाओं में बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता से प्रदेश के छात्रों का नुकसान हो रहा है। इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में सीटे आधी भी नही भरपाई है इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में थैलिसीमिया की रोकथाम के लिए चलाया गया अभियान भी ठप्प पड़ा है तथा निजी चिकित्सालयों में अनियमितताएं भी है तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकायुक्त जैसी संस्था कार्यवाही तो कर रही है लेकिन सजा दिलाने के मामलें में पिछड़ती दिख रही है।
विधायक यशपालसिंह सिसौदिया के शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सवालों के जवाब प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित लोक स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट एवं सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविन्दसिंह ने दिए। विधायक सिसौदिया ने सबसे पहले पीएससी सहित अन्य परीक्षाओं में प्रदेश के छात्रों के हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया और कहा कि एमपी-पीएससी सहित विभिन्न परीक्षाओं में विभिन्न राज्यों की तरह बाहरी उम्मीदवारों को भी प्रदेश की परीक्षाओं में भाग लेने पर कोई पाबंदी नही है बाहरी प्रदेशों के उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता के कारण मध्यप्रदेश के शिक्षित युवा दोहरी मार झेल रहे है।
सिसौदिया ने कहा कि क्या न्यायालय ने बाहरी उम्मीदवारों के लिए उम्र बंधन समाप्त करने के लिए निर्देशित किया है सरकार इन परीक्षाओं में बाहरी उम्मीदवारों को प्रदेश की परीक्षा में भाग लेने पर पाबंदी और स्थानीय उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के दृष्टिगत नियमों में कोई परिवर्तन करेगी? सिसौदिया ने कहा कि एमपी-पीएससी में आरक्षण नियमावली की त्रुटि के कारण उन्हें आरक्षण का लाभ नही मिल पा रहा है जिससे महिलाओं से कम अंक के बावजुद पुरूष परीक्षा में चयनित हो रहे है। सिसौदिया के सवाल पर सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविन्दसिंह ने कहा कि अंतिम चयन सूची तैयार करते समय महिलाओं को आरक्षण का लाभ देकर चयन किया गया है इस संबंध में 17 शिकायतें सरकार को प्राप्त हुई थी लेकिन ऐसी कोई भी महिला अभ्यर्थी नही है जिनके पुरूषों के अधिक अंक होने पर चयन नही किया गया हो।
आधी भी नहीं भर पाई इंजीनियरिंग की सीटें
विधायक सिसौदिया ने प्रदेश में इंजीनियरिंग के प्रति कम होते छात्रों के रूझान पर भी चिंता जताते हुए विधानसभा में सवाल उठाया जिसके जवाब में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि साल 2018-19 में बीई पाठयक्रम में शासकीय अनुदान प्राप्त संस्थाओं में कुल 3710 सीटों के विरुध्द 3660 सीटों पर प्रवेश दिए गए निजी संस्थाओं में उपलब्ध 58 हजार 105 सीटों के विरुध्द 25 हजार 481 अभ्यर्थियों को प्रवेश दिए गए तथा साल 2010-11 के बाद प्रदेश में 110 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए है उक्त अवधि में शासन ने नौगांव में एक इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की है।
सिसौदिया ने प्रश्न के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजो की जानकारी चाही, उन्होंने कहा कि स्थाई शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजो से विद्यार्थियों को मोह भंग हो गया है प्रदेश सरकार निजी इंजीनियरिंग एवं अन्य महाविद्यालयों पर पूर्व में हो रहे परीक्षा फीस जैसे महत्वपूर्ण बिन्दुओं के निर्धारण से अपना अधिकार हटाकर निजी महाविद्यालयों को सम्पूर्ण छूट दे रखी है। सिसौदिया के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि स्थाई शिक्षकों के अभाव के कारण छात्रों का मोह भंग नही हुआ है इस साल प्रदेश में 61 हजार 815 सीटों के विरूध्द 29 हजार 141 अभ्यर्थियों को ही प्रवेश दिया गया है।
थैलिसीमिया की रोकथाम के लिए चला अभियान बंद
विधायक सिसौदिया ने थैलिसीमिया की रोकथाम के लिए चलाए गए विशेष अभियान के बंद किए जाने पर भी सवाल उठाएं जिस पर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि मध्यप्रदेश के मंदसौर सहित बड़वानी, मण्डला, रीवा एवं शहडोल जिलों में थैलिसिमिया की रोकथाम हेतु प्रयोगशालाओं का सुदृढीकरण, चिकित्सकों एवं लेब टेक्निशियनन्स का प्रशिक्षण एवं औषधी का क्रयय एवं प्रचार प्रसार गतिविधियां सम्पादित की गई थी लेकिन बजट के अभाव में इस योजना को बंद कर दिया गया है इस योजना के तहत साल 2012-013 में दो करोड़ और 13-14 में एक करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया था। प्रश्न पुछते हुए सिसौदिया ने कहा कि थैलेसिमिया के तहत 1 जनवरी 2010 से प्रतिवर्ष कितने पीडि़त बच्चों का रजिस्ट्रेशन विभाग द्वारा किया गया? उक्त बिमारी में प्रदान की जाने वाली दवाईयां निम्न स्तर की है जिससे अभिभावक उनका उपयोग बच्चों पर नही कर रहे है। सवाल के जवाब में मंत्री सिलावट ने कहा कि थैलिसीमिया रोकथाम हेतु परियोजना स्वीकृत की गई थी लेकिन इसमें कोई सदस्य नही था अभी प्रदेश में उक्त बीमारी के उपचार हेतु कोई बच्चा रजिस्टर्ड भी नही है।
दिल्ली की तर्ज पर खुलेंगे मोहल्ला क्लिनिक
विधायक सिसौदिया ने प्रदेश के निजी चिकित्सालयों में अनियमितताओं का मामला भी उठाया और प्रदेश में मोहल्ला क्लिनिक खोले जाने की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी। इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि दिल्ली की तर्ज पर मध्यप्रदेश में 25 मोहल्ला क्लिनिक सरकार ने प्रस्ताविक किए है। मध्यप्रदेश की एक कमेटी ने दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक मॉडल का अध्ययन किया है इसके अभिमत अनुसार स्थानीय आवश्यकताओं एवं संसाधनों के अनुरूप आंशिक रूपांतरण करते हुए इस योजना को मध्यप्रदेश में भी लागू किया जा सकता है। सिसौदिया ने निजी चिकित्सालयों में अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उज्जैन संभाग में कुल कितने निजी चिकित्सालय रजिस्टर्ड है? इनमें से किस-किस व्यक्ति ने किस-किस तरह की शिकायत दर्ज की है और उन शिकायतों पर सरकार ने क्या कार्यवाही की है।
दो साल में 676 प्रकरण
लोकायुक्त ने बनाएं, लेकिन सजा सिर्फ 10 को मिली
विधायक सिसौदिया ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए गठित लोकायुक्त द्वारा बनाएं गए प्रकरणों की जांच में हो रही देरी पर भी चिंता जाहिर करते हुए विधानसभा में सवाल उठाया इसके जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविन्दसिंह ने कहा कि इदो सालों में लोकायुक्त ने 676 आपराधिक मामलें दर्ज किए लेकिन इनमें से 10 प्रकरणों में 10 लोगों को अब तक सजा मिल पाई, 114 प्रकरणों में न्यायालय में चालान प्रस्तुत किए गए और बाकि 552 प्रकरण अब तक विवेचनाधीन है। उन्होने कहा कि लोकायुक्त में 481 अधिकारी-कर्मचारी कार्यररत है और 143 पद रिक्त है। विधायक सिसौदिया ने प्रकरणों के निराकरण की देरी पर सवाल उठाया व मंत्री गोविन्दसिंह ने कहा कि उपलब्ध अमले से प्रकरणों का तीव्र गति से निराकरण कराया जा रहा है।
एमपीपीएससी में प्रदेश के छात्रहितों की चिंता करें सरकार
विधायक सिसौदिया के महत्वपूर्ण प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन कहा कानून बनाएंगी सरकार
मंदसौर। मध्यप्रदेश के युवाओं का बच्चों का एमपीपीएससी के माध्यम से अधिक से अधिक लाभ हो यह सभी चाहते है लेकिन बाहरी छात्रों को उच्च न्यायालय के तय मानदण्डों के आधार पर प्रवेश दिया जाता है इससे कोई आपत्ति नही है लेकिन प्रदेश के युवाओं का हित करने के लिए हमें कोई नीति बनानी पड़ेगी उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले इसकी चिन्ता करनी पड़ेगी। सरकार महिला आरक्षण की बात करती है इसका प्रावधान भी है लेकिन रतलाम में एक छात्रा के अंक ज्यादा होने के बावजुद भी कम अंक वाले पुरूष को लाभ दिया गया लेकिन बिटियां को न्याय नही मिल सका वह न्यायालय की शरण में गई वहां से भी निर्देश मिले बावजुद इसके बिटियां का भला नही हो सका।
यह बात मंदसौर विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने मध्यप्रदेश विधानसभा में सवाल उठाते हुए कहीं। आपने कहा कि पिछले दस वर्षो में एमपीपीएससी की खामियों, गलतियों और त्रुटियों को लेकर मैने सवाल उठाएं है लेकिन हर बार एमपीपीएससी त्रुटियां कर रही है जबकि स्कूल और उच्च शिक्षा में यदि कोई प्रोफेसर गलत प्रश्न पत्र दे देता है तो वह जीवन भर प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए अपात्र हो जाता है उसे निलंबित तक कर दिया जाता है। सिसौदिया ने कहा कि वर्तमान सरकार ने आयु सीमा को 35 से 40 किया है इसके लिए सरकार का धन्यवाद लेकिन सवाल अभी भी खड़ा है एमपीपीएससी के माध्यम से मध्यप्रदेश के बच्चों का अधिक से अधिक लाभ हो इसकी चिन्ता करनी पड़ेगी। उच्चतम न्यायालय के तय मानदण्डों के आधार पर बाहरी छात्रों को लिया जाता है इसमें आपत्ति नही है लेकिन प्रदेश के छात्रों के हित में यदि हमने 35 से 40 वर्ष की उम्र कर दी तो बाहरी छात्रों को 27 वर्ष पर ही लाकर खड़ा कर देंगे तो प्रदेश के बच्चों को इससे लाभ होगा और वे प्रतिस्पर्धा में शामिल हो जाएंगे। सिसौदिया ने कहा कि गलत निर्णयों के विरूद्ध कई छात्र न्यायालय नही जा पाते है जो जाते है उन्हें एक से दो लाख रू खर्च करना पड़ते है।
सिसौदिया ने रतलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि सुनीता जैन के अंक ज्यादा थे लेकिन पुरूष छात्र के कम अंक होने के बाद भी उसे लाभ दिया गया इसको लेकर बिटियां न्यायालय में गई वहां से भी निर्देश मिले लेकिन फिर भी बिटियां का भला नही हो सका। सिसौदिया ने कहा कि सरकार कहती है 17 शिकायतें एमपीपीएससी की मिली है लेकिन मंत्रालय और संबंधित विभाग ने उन पर कितना संज्ञान लिया इसका कोई खुलासा सरकार नही कर रही है। सिसौदिया ने कहा कि पक्ष और विपक्ष प्रदेश के बच्चों का भला करना चाहते है लेकिन लगता है कि कतिपय अधिकारी गुमराह कर षडयंत्र कर रहे है ताकि उनके बाहरी रिश्तेदार लाभांवित हो सके जबकि मप्र के छात्र यदि बाहर गुजरात जाते है तो उनसे सामान्य ज्ञान के प्रश्न गुजराती में किए जाते है।
विधायक सिसौदिया के सवाल पर सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविन्दसिंह ने जवाब दिया इसी बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सदन में ही विधायक सिसौदिया के इस गंभीर प्रश्न पर संज्ञान लिया और कहा कि कई सालों से बाहर के बच्चों को प्रदेश में रोजगार मिल रहा है यह चिंता का विषय है प्रदेश के छात्रों को समुचित लाभ मिले इसके लिए सरकार कानून लाने पर विचार कर रही है।
विधायक सिसौदिया के इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भी चर्चा में भाग लिया और कहा कि एमपीपीएससी के संबंध में न्यायालय का जो आदेश हुआ था वह महाविद्यालयीन पदों की रिक्तियों को भरने के लिए था।
नियमों को ताक पर रखकर चल रहे
निजी कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालयों से छात्रों का भविष्य अंधकार में
शून्य काल में विधायक सिसौदिया ने उठाया मामला

मंदसौर। प्रदेश के निजी कृषि महाविद्यालयों की संख्या लगातार नियमों के विपरित बढ़ रही है प्रदेश के निजी उद्यानिकी एवं कृषि महाविद्यालयों में भारतीय अनुसंधान संस्थान दिल्ली के नियमों का पालन नही हो रहा है। जिसके कारण इनमें अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
शून्य काल के दौरान विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने विधानसभा में उठाते हुए कहा कि प्रदेश के निजी उद्यानिकी एवं कृषि महाविद्यालयों में प्रर्याप्त प्रयोगशालाएं नही है और ना ही पर्याप्त संसाधन है जबकि शासकीय उद्यानिकी एवं कृषि महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे छात्रों को पीएटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रवेश दिया जाता है तो दूसरी और निजी महाविद्यालयों में उच्च शैक्षणिक शुल्क के साथ अयोग्य विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है जिससे विद्यार्थियों की गुणवत्ता नही रहती है। विभाग के निर्देशों से निजी महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को भी पीजी कक्षा हेतु प्रवेश की पात्रता दी गई हे जो कि पुर्णत: नियमों के विपरित हे प्रदेश के हजारों छात्र शासन के इस नियम के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे है। छात्रों का कहना है कि निजी उद्यानिकी एवं कृषि महाविद्यालय मात्र डिग्री बेचकर व्यापार कर रहे है। इन निजी संस्थानों मे गुणवत्ता को अनदेखा कर केवल दुकानदारियां चल रही है तमिलनाडू सहित देश के पांच राज्यों में निजी महाविद्यालयों पर नकेल कसी गई है जिसमे तमिलनाडू राज्य पुरे देश में कृषि शिक्षा में अव्वल है मध्यप्रदेश में भी एग्री कल्चर कौसिंल एक्ट बनाकर निजी महाविद्यालयों पर नकेल कसी जानी चाहिए।
विधायक सिसौदिया सभापति तालिका में सम्मिलित
मंदसौर। वरिष्ठ विधायक यशपालसिेंह सिसौदिया को पुन: मध्यप्रदेश विधानसभा की सभापति तालिका में सम्मिलित किया गया।
मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने मंगलवार को विधानसभा में इसकी घोषणा की। सभापति तालिका में विधायक यशपालसिंह सिसौदिया के साथ ही वरिष्ठ विधायक बीसाहुलाल सिंह, लक्ष्मणसिंह, झुमा सोलंकी, गिरिश गौतम तथा नीना वर्मा को सम्मिलित किया गया। उल्लेखनीय है कि गत विधानसभा में भी विधायक सिसौदिया को सभापति तालिका में सम्मिलित किया गया था।

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