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फिर आगे पाट पीछे सपाट साबित होगी नपा की हरियाली

फिर आगे पाट पीछे सपाट साबित होगी नपा की हरियाली

फिर आगे पाट पीछे सपाट साबित होगी नपा की हरियाली

इस साल भी पौधा रोपण के साथ ही उन्हें सुरक्षित रखने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं

गत वर्ष लगाए पौधे इसी अव्यवस्था के कारण नष्ट हो चुके हैं
पालो रिपोर्टर ? मंदसौर

शहर को हरियाली पूर्ण माहोल देने के उद्देश्य से नपा हर साल शहर की सड़कों के बीच बने डिवायडरों पर पौधे रोपने का काम करती है। इस साल भी यह कार्य प्रारंभ हो चुका है, करीब 350 पौधे बौने के लिए गढ्डे किए गए हैं। खास बात यह है, कि प्रति वर्ष सिर्फ पौधा रोपण तक ही नपा के कारिंदे अपना ध्यान यहां लगाते हैं। जबकि कहीं भी पौधों को पशुओं से बचाने के लिए ट्री-गार्ड या इस तरह की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसी तरह पौधों के उचित देख रेख के अभाव में हर साल ये नष्ट हो जाते हैं। अभी गत वर्ष के पौधों पर ही गौर करें तो अधिकांश गायब हो चुके हैं।
नगरपालिका ने पौधरोपण की तैयारी तो कर ली लेकिन रोपे जाने के बाद पौधों को बचाने की प्लानिंग नहीं की है। पौधों को पशुओं से बचाने के लिए जाली लगाने की बजाय अधिकारी कह रहे है कि डिवाईडरों पर कनेर के पौधे लगाए जाएंगे जिन्हें पशु नहीं खाते है। हालांकि पिछले साल भी अधिकांश जगह कनेर के पौधेे ही लगाए थे। डिवाईडरों पर हरियाली के लिए पौधे लगाने के बाद पानी पिलाने एवं देखरेख की जिम्मेदारी भी नहीं निभाई जा रही है। पशुपतिनाथ व ओखा बावजी मंदिर के बीच मार्ग के डिवाइडर पर 350 पौधे नपा लगा रही है लेकिन पशुपतिनाथ मेले के दौरान इस डिवाइडर पर व्यवसाई अपनी दुकाने सजा लेते है, जिसके कारण हर साल पौधे नष्ट हो जाते है और नपा फिर रोपने की अलावा कुछ नहीं कर पा रही। बुद्धिजीवी वर्ग की माने तो कई लोगों ने नपा के जिम्मेदारों को पौधों की सुरक्षा का मशवहरा पिछले साल भी दिया था और इस साल भी दिया गया, लेकिन अब तक कोई उचित व्यवस्था मैदानी स्तर पर दिख नहीं रही।
इधर, वन विभाग ने वन देवता की पूजा कर शुरू किया पौधारोपण
शामगढ प्रतिनिधि के अनुसार नगर से 8 किलोमीटर दूर माकड़ी के जंगल पी-18 में 10 हेक्टियर वन क्षेत्र की भूमि पर 10 हजार पौधे लगाने का कार्य आज विधि विधान से वन देवता की पूजा के बाद शुरू हुआ। उप वन मंडल गरोठ अंतर्गत आने वाले इस जंगल मे 5 प्रजाति नीम, शीशम, करंज, बास और जंगल जलेबी के पौधों को लगाकर वृक्षारोपण किया गया और इन्हें जीवित रखने का संकल्प लिया गया इस अवसर पर वन समिति अध्यक्ष केसर सिंह, शहर कांग्रेस अध्यक्ष माणक सेठिया, बंटी अश्क़, पवन जोशी युवक ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष, पार्षद प्रतिनिधि फारूख मेव, सरपंच प्रतिनिधि अरविंद मेहर, रज्जाक भाई, बंटी विश्वकर्मा, भगवान सिंह सहित कई लोग मौजूद थे। उप वन मंडल अधिकारी गरोठ एस. के. रावत ने वृक्ष लगाने और उन्हें बचाने का संकल्प दिलाया। रेंजर कमलेश साल्वी द्वारा वृक्षो और जंगलों की उपलब्धता बताई और नगर में सामाजिक संगठनों के माध्यम से वृक्ष लगाने और उन्हें जीवित रखने और जनसहयोग से ट्री गार्ड दान देने के विकल्प पर बात की गई तो डिप्टी रेंजर अशोक कुमार तिवारी द्वारा बताया गया कि वृक्ष कितने कीमती होते है एक वृक्ष पूरे जीवन मे 25 लाख की ऑक्सीजन हमे देता है। उन्होंने बताया कि हमारे देश मे प्रति व्यक्ति 13 वृक्ष हैं जबकि विदेशों में प्रतिव्यक्ति 6400 वृक्ष आते हैं जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग और तापमान में वृद्धि हो रही हैं। वृक्षारोपण करने आये अतिथियों द्वारा वृक्ष लगाने और जंगलों को संरक्षित करने का संकल्प लिया गया। आभार डिप्टी रेंजर ए के तिवारी ने माना।
चंद्रपुरा डिवायडर पर 350 पौधे
मानसून पूर्व की बारिश होते ही नगरपालिका ने हर साल की तरह पौधारोपण की तैयारी शुरू कर दी है। इस साल नगरपालिका लगभग चार हजार पौधे रोपेगी। पौधे रोपने की लिए नपा ने जो जगह चिन्हित की है उनमें से अधिकांश वहीं जगह है जहां पर पिछले साल भी पौधे लगाए गए थे, लेकिन पौधों को रोपने के बाद न तो समय पर पानी दिया गया और न ही पशुओं से बचाने के लिए जाली लगाई, इसके कारण लगभग सभी जगह से पौधे नष्ट हो गए। चंद्रपुरा स्थित पशुपतिनाथ मंदिर से मेनपुरिया गेट के बीच डिवायडर पर, महू-नीमच राजमार्ग के डिवायडर आदि डिवायडरों पर 350 पौधे रोपने के लिए गड्ढे भी खोदे जा चुके हैं।
बगीचों व खुली भूमियों पर 3 हजार पौधे
नगरपालिका का उद्यान अमला शहर के बाग-बगीचों एवं अन्य खुली भूमियों पर तीन हजार पौधे डिवायडरों के अतिरिक्त रोपेगा। जिन डिवाईडरों पर पौधे रोपने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं उन डिवाईडरों पर पिछले साल भी पौधे लगाए थे। लेकिन बाद नपा ने ध्यान नहीं दिया इसके कारण कुछ ही दिनों में पौधों को पशु खा गए तो कुछ पानी नहीं मिलने के कारण सूख गए। उद्यान दरोगा सुनील मेहता ने बताया कि पिछले साल के पौधे चल नहीं पाए हैं। इस साल पौधे लगाने के साथ ही अधिकारियों से पौधों के आसपास लगाने के लिए जाली की भी मांग की गई है। जाली लगाना बहुत जरूरी है। पूरे शहर में चार हजार पौधे लगाए जाएंगे जबकि पिछले साल तीन हजार पौधे लगाए थे।

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