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भावांतर का जंतर-मंत्र

भावांतर का जंतर-मंत्र

भावांतर का जंतर-मंत्र

इस बार भी जमकर चला, मंडी में कटा प्याज का कद्दू और सब में बटा

भावांतर पंजीयन के अंतिम दिन तक चला तबियत से घालमेल, किसी ने किसानों को लिया घापे में तो किसी ने अपना ही माल फसाया किसान के पंजीयन में
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

महू-नीमच राजमार्ग स्थित कृषि उपज मंडी में जब से प्याज का पंजीयन चालू हुआ तब से प्याज का कद्दू यहां प्रतिदिन काट-काटकर ए से लेकर झेड तक में जमकर बटा। सूत्र बता रहे हैं, कि शनिवार को प्याज के भावांतर पंजीयन का अंतिम दिन था और इस दिन भी माल तोलने से लेकर पर्ची में चढ़ाने और भावांतर पंजीयन करने तक में तबियत से घालमेल किया गया। इधर, मंडी के सूत्र यह भी बता रहे है, कि खरीफ की सीजन में भावांतर के कंधे पर बंदूक रखकर मंडी के तीन तीलंगों ने एक करोड़ रूपयों का मांझा सूता था। बताया जा रहा है कि ये तीन तीलंगे अब खुन मुंह लगने के बाद प्याज के फिल्ड में उतर आए हैं और इस बार ये कद्दू काट-काटकर सबको बांट भी रहे हैं। मजे की बात यह है, कि इस बंदरबाट में खुद मंडी कमेटी के कुछ छर्रों की मुख्य भूमिका है। बावजूद इसके न मंडी प्रशासन इस ओर कोई कार्रवाई करने का राजी नहीं हो रहा है।
एक सूचना के बाद शनिवार को पालो रिपोर्टर मंडी स्थित प्याज के फिल्ड में पहुंचा और करीब-करीब खराब हो चुके प्याज के ढेर पर जाकर एक किसान से बात की कि आपका माल अब तक बिका क्यों नहीं तब किसान पालो रिपोर्टर को व्यापारी समझ बैठा और उसने यहां तक कह दिया कि अब तक नहीं बिका है। क्योंकि माल बारिश में खराब हो चुका है आप चाहें तो एक रूपए किलो का ही बिल दे दिजिए, भले रूपए मत दिजिए। बाकी मैं भावांतर के दामों में से आधे रूपए और उल्टे दे दूंगा। इस पर जब पालो रिपोर्टर ने भी अंजान बनकर किसान से कहा कि क्या भरोसा आप अपने खाते में आई भावांतर की राशि को मुझ से सांझा कर लोगे। इस पर किसान ने यहां तक कह दिया कि आप चाहें तो मंडी में मैं किसी से भी कहलवा दूं। इस बीच उसने भावांतर की राशि की जिम्मेदारी लेने वाले कुछ दलालों तक के नाम भी बताए। बाद में पालो रिपोर्टर यहां से कुछ देर बाद वापस लौटने का बहाना कर निकला और प्याज के शेड के अंदर पहुंचा तो पहले ही आधी से अधिक सूचना की पुष्टि तो उक्त किसान कर ही चुका था। बाकी पुष्टि शेड के अंदर चल रही तुलाई में हो गई। दरअसल यहां किसानों को जो पर्ची दी जा रही थी उसमें माल 100 बोरी था, लेकिन असल में माल 20 बोरी ही तोला जा रहा था। बताया जा रहा है, कि ये कांदा कांड मंडी में महज शनिवार के ही दिन नहीं चला बल्कि जब से प्याज के भावांतर पंजीयन की घोषणा हुई तब से ये कांड यहां किया जा रहा था।
प्याज की पर्ची लहसून के फिल्ड में
सूत्रों की माने तो किसी को कानों-कान भावांतर में इस तरह के घालमेल की खबर नहीं लगे इसके लिए इस कारस्तानी को अंजाम देने वाले कारिंदे पूरी प्लानिंग के तहत मंडी में सक्रिय रहे। बताया जा रहा है कि शनिवार को भी प्याज के फिल्ड में भले ही प्याज तोले जा रहे थे, लेकिन उसके सामने लहसून के फिल्ड के कोन-खोप्चों में बैठकर प्याज की पर्चियां काटी जा रही थी।
बल की मुछों पर वंत
बताया जा रहा है कि मंडी में यह काला काम एक बल के अपनी मुछों पर वंत लगाते हुए किया जा रहा है। यही बल बहादुर ए से लेकर झेड तक सबको सेट कर रहा है और रिटायरमेंट की ओर बढ़ रहे जादूगर की भी अच्छे से सेवा कर रहा है। क्रेता से लेकर विक्रेता तक भी सामंजस्य बैठाने में बल बहादूर की अपनी अलग ही महारथ है, जिसके इशारे पर घनश्याम अपनी बांसूरी बजा रहे हैं तो वहीं माधौपुर भी तबियत से माल सूत रहा है। खास बात यह है, कि ये लोग इस मामले से अनभिज्ञता तो कुछ एसे जताते फिर रहे हैं कि जैसे ये तो मंडी में पहली बार ही पहुंचे हैं और इन्हें कुछ मालूम ही नहीं। शनिवार को भी जब माधौपुर एसे ही अनभिज्ञता जता रहे थे तभी दूजे जिले के मंडी के एक बड़े अधिकारी ने मजाकिया अंदाज में इस पूरे घालमेल के बारे में यह तक कह दिया कि ये तो सभी दूर चल रहा है।
कलेक्टर को संज्ञान में लेना चाहिए मामला
बता दें कि इस मामले में यदि मंडी का ही कोई अधिकारी अपने तई किसी तरह की कार्रवाई करे तो ये सोचना भी बेइमानी होगी। क्योंकि सूत्र बता रहे हैं कि यहां तो पूरे कुएं में ही भांग मिली हुई है। एसे में स्वयं कलेक्टर मनोज पुष्प को मामले में संज्ञान लेकर भावांतर के बाद अब तक तुले कुल माल और पोर्टल पर चढ़े माल की जानकारी निकालने से लेकर पंजीयन में किस किसान से कितना माल एंठा गया इसकी भी जांच की जाना चाहिए। यदि ये जांच पूरी इमानदारी से होतीे है तो बताया जा रहा है कि कई सफेदपोश और बड़े नौकरशाह इसमें फाल्टेड निकल सकते हैं। साथ ही पंजीयन प्रारंभ होने से खत्म होने तक अकेले मंदसौर मंडी में भी पेटियों से नहीं बल्कि खोखो से घपला सामने आ सकता है।
आरी बदलती है हैक्टेअर में
भावांतर की सरकारी राशि हड़पने के चक्कर में मंडी के कई मगरमच्छ किसानों की खेतों की आरी भूमि को हैक्टेअर भूमि तक में बदल देते हैं। मान लिया जाए कि किसी किसान का खेत .35 आरी है तो कागजों में बड़ी सफाई से 35 के आगे का दशमलव हटा दिया जाएगा और यह हटते ही उक्त खेत 35 हैक्टेअर हो हो जाता है। अब पैदावार पर गौर करें तो प्रति हैक्टेअर करीब 20 क्ंिवटल प्याज की पैदावार होती है। एसे में 35 हैक्टेअर के मान से 700 क्ंिवटल प्याज और इसकी किमत इस साल भावांतर में तय 800 रूपए क्ंिवटल से 5.60 लाख होती है। अब महज आरी से हैक्टेअर करने के खेल में ही सीधे साढ़े पांच लाख से अधिक का घालमेल हो रहा है तो सोचिए पूरे पंजीयन काल में कितने बड़े-बड़े कांड मंडी में हो गए होंगे।
लहसून के
दाम ने तोड़े 6 साल के रिकॉर्ड
गत कुछ वर्षों से लहूसन के लगातार गिरते दामों के कारण परेशान किसानों की बांछे इस साल लहसून के अच्छे दामों के चलते खिलती दिखाई दे रही है। दरअसल ये संभव इसलिए भी हुआ है कि हर साल दाम लगातार गिर रहे थे। पीछले साल ही करीब 2 से 3 रूपए प्रति किलो में किसानों को लहसून बेचना पड़ा। एसे में इस साल कई किसानों ने लहसून नहीं बौई, जिसके चलते उत्पादन कम हुआ और मांग अधिक होने से इस साल अच्छे खासे दाम लहसून के किसानों को मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार को मंदसौर मंडी में लहसून दामों ने तकरीबन 6 साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस दौरान रियावन गांव के किसान प्रभुलाल की लहसून 35 हजार एक रूपए प्रति क्ंिवटल बिकी। गौरतलब है कि इस गांव की लहसून बार-बार अच्छे दामों पर बिक रही है। दो दिन पहले ही रियावन की लहसून 25 हजार में बिकी। शनिवार की ही सुबह एक ढेरी का सौदा 32 हजार में हुआ और दिन ढलते-ढलते 35 हजार में इसी गांव के प्रभुलाल की ढेरी बिकी।

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