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2019 हो रहा गंदा और नपा दे रही 2020 के लिए स्वच्छता प्रशिक्षण

2019 हो रहा गंदा और नपा दे रही 2020 के लिए स्वच्छता प्रशिक्षण

2019 हो रहा गंदा और नपा दे रही 2020 के लिए स्वच्छता प्रशिक्षण

शहर के गली मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों तक अस्वच्छता का आलम, स्वच्छता अभियान के नाम पर अनाप-शनाप खर्च कर कमिशनखोरी के धंधे में जूटे नपा के जिम्मेदार
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

कहीं नालों का पानी सड़क पर बह रहा है, तो कही सड़कें ही नाला बन चुकी है। कहीं डस्टबीन का कचरा सड़क पर बिखर रहा है, तो कहीं सड़कें ही डस्टबीन बन चुकी है। नए शहर में कोई प्लाट नहीं बचा जो रोड़ी न बना हो पुराने शहर में कोई गली नहीं बची है जहां गंदगी का अम्बार न हो। जी हां यहां बात हो रही है हर साल स्वच्छता की दौड़ में खुद का अव्वल साबित करने के प्रयास करने वाले अपने शहर की। वर्तमान की यदि बात करें तो साल 2019 के इन अस्वच्छता के आलम से तो नपा से निपटा नहीं जा रहा है और साल 2020 के स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दरागाओं और सफाईकर्मियों को प्रशिक्षण देने का प्रपोगंडा चल रहा है।
शहर का खानपुरा, जनकूपुरा, नयापुरा रोड, बालागंज, नरसिंहपुरा, जीवागंज हो या नए शहर की बसाहट मेघदूत नगर, अभिनंदन नगर, रामटेकरी, जनता कॉलोनी, स्नेह नगर, किटीयानी, नई आबादी, प्रेम कॉलोनी, कोठारी नगर, भागवत नगर, हनुमान नगर, सीतामउ फाटक क्षेत्र हो इस दिशा से लेकर उस दिशा तक तमाम-तमाम कॉलोनियों और मोहल्लों में गंदगी का जबरदस्त साम्राज्य पटा पड़ा है। जहां डस्टबीन लगाए गए हैं उन डस्टबीन का समय पर खाली करने का नपा के सफाई कर्मियों को टाइम नहीं मिल रहा, जिससे तमाम कचरा सड़कों पर बिखर रहा है, तो वहीं नालियां इतनी जबरदस्त जाम है, कि बदबू और मच्छरों से आम रहवासियों का जीना दूभर हो रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है, कि जब तक स्व नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार जीवीत रहे। भले उनके रहते हुए भी स्वच्छता के नाम पर अनाप-शनाप खरीदी कर कमिशन खौरी का खेल किया गया हो, लेकिन फिर भी शहर के आम नागरिकों में स्वच्छता के प्रति एक तगड़ा माहोल और जागरूकता खड़ी की गई थी। जमीनी स्तर पर एक बार के लिए शहर स्वच्छ दिखने लगा था, लेकिन दादा के जाते ही फिर वही ढाक के दो पात हो गए और आज नौबत यह आ गई कि हमारे शहर का आंचल फिर से गंदगी के साम्राज्य से मेला होता ही चला जा रहा है और मैदानी से लेकर एसी कमरों में बैठे कर्मचारी और अधिकारी महज कागजी खानापूर्ति के कुछ भी करने को राजी नहीं हो रहे हैं।
नालों की सफाई के नाम पर डिजल डकार गए
स्वच्छता के नाम पर शहर में कितना पाप काटा जाता है इस बात का झमाझम बारिश होते ही आसानी से लग जाता है। हाल ही में दो-तीन बार हुई झमाझम बारिश के दौरान नयापुरा रोड सहित शहर के कई इलाकों, मुख्य मार्गों पर पानी जमा हो गया, जिसने नपा के उन तमाम दावों की पोल खोल दी जो मानसून पूर्व नपा द्वारा नालों की सफाई करवाने को लेकर किए जा रहे थे। एसा पहली बार ही नहीं हुआ, बल्कि सालों से यह क्रम बा-दस्तुर जारी है कि नपा नालों की सफाई के नाम पर ट्रैक्टर, ट्रॉली, जेसीबी जैसे बड़े-बड़े संसाधनों को रामघाट वाटर वक्र्स से निकाल लाती है और मुश्किल से कुछेक नालों की सफाई करवाकर फोटो खिचाओं अभियान पूर्ण करके कागजों में शहर के तमाम नालों की सफाई में हुआ खर्च लिखकर ये तमाम खर्च डकार लिया जाता है।
खुद नपा भवन में गंदगी
अब बात शहर के किसी और स्थान की क्या की जाए, बल्कि शहर का स्वच्छता में अव्वल लाने का ख्याली पुलाव पका रही नपा के भवन में ही गंदगी का साम्राज्य साफ तौर पर दिखाई देता है। आजाद चौक से कालीखान तलाई में बने नए भवन में जब नपा स्थानांतरित हुई तो कुछ समय के लिए यहां नीचे परिसर में फव्वारे भी चले लेकिन आज इसी जल गृह की हालत दयनिय है और कांई सहित जबरदस्त गंदगी इसके पानी में पसरी हुई है, जिससे आम दुकानदार व यहां आने-जाने वाले लोग परेशान है। इसी तरह नपा के सुविधाघरों की भी हालत खराब है। नपा भवन की छत पर चले जाओ तो लगता है मानो दुनियाभर का कबाड़दान यही लाकर रख रखा हो। भवन चढ़ाओं, परसाल, हॉल आदि में जाले जम रहे हैं और दुनियाभर का धुला-धमासा हो रहा है, लेकिन किसी जिम्मेदार की उग्गत नहीं उढ रही कि शहर की सफाई करवाने से पहले नपा भवन में ही एक बार जबरदस्त सफाई अभियान चालू करवाया जाए।
रामटेकरी जैसे पॉश एरिये में हालत खराब
रामटेकरी का सुदामा नगर शहर के पॉश इलाकों में शुमार है, लेकिन इस क्षेत्र में भी रहवासियों को गंदगी से जबरदस्त परेशानी झेलना पड़ रही है। दरअसल वार्ड नंबर 38 स्थित पूर्व नपाध्यक्ष रेणुका रामावत वाली गली में अभिभाषक उमेश मौड़ के घर के पीछे एक सकड़ी सी गली सालों से गंदगी से पटी पड़ी है। किसी समय 4 से 5 फिट की यह गली मुख्य रेवास-देवड़ा रोड की ओर खुलती थी, लेकिन आसपास बने घरों के पिछले अतिक्रमण के चलते धीरे-धीरे गली मुख्य मार्ग की ओर से बिल्कुल बंद हो चुकी है और इसमें से बह रही एक नाली इतनी गंदी है कि इस क्षेत्र में रहने वालों का जीना मुहाल हो रहा है। खैर यह आलम यहीं का ही नहीं बल्कि शहरभर की इस तरह की कई गलियों में स्थित नालियों का हाल है, जहां क्षेत्र में प्रतिदिन आने वाले सफाईकर्मि या दारोगा कभी झांकते तक नहीं और क्षेत्रवासी इन से लेकर नपा के बड़े अधिकारियों तक मिन्नतें कर करके थक चुके होते हैं।
कचरा हो गए कचरा दान
स्वच्छ भारत अभियान के तहत मंदसौर नपा ने अब तक कितने जनता की गाढ़ी कमाई का किस तरह सत्यानाश किया है। इसका एक उदाहरण संजय गांधी उद्यान में स्पष्ट देखा जा सकता है। दरअसल पूर्व के सालों में इस अभियान के तहत खरीदे गए कचरे के डब्बों में कचरा भरने की बजाय उल्टा ये टूट-फूट गए और अब इन्हें संजय गांधी उद्यान में पड़े नपा के तमाम कबाडख़ाने में पटक रखे हैं। लाखों रूपए व्यय कर शहर की गंदगी समेटने के लिए खरीदे गए ये कचरा दान अब खुद कचरा हो चले हैं।

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