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शंकर स्वीट्स ने रहन रख ली शुक्ला चौक की सड़क

शंकर स्वीट्स ने रहन रख ली शुक्ला चौक की सड़क

शंकर स्वीट्स ने रहन रख ली शुक्ला चौक की सड़क

यातायात विभाग हो या नपा का अतिक्रमण अमला कोई कुछ नहीं उखाड़ पाता शंकर दादा के अतिक्रमण के आगे, शाम ढलते ही बढ़ जाती है आवागमन की दिक्कत
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

पुराने शहर को नए शहर से जोडऩे वाली मुख्य नस नयापुरा रोड की शुरूआत में आने वाले घनी आबादी व धानमंडी और जनकूपुरा जैसे व्यस्ततम बाजार से लगे शुक्ला चौकी की सड़क पर शंकर स्वीट्स ने कुछ इस तरह अतिक्रमण फैला रखा है मानो ये सड़क शंकर दादा ने रहन जिम्मेदारों से रहन रख ली हो… दिनभर जहां आधी से अधिक दुकानदारी शंकर दादा की इस सड़क पर पसरी रहती है, वहीं शाम ढलते ही दुध का कड़ाव भी लग जाता है… जिससे यहां आवागमन की दिक्कत और अधिक बड़ जाती है और लोग परेशान होते हैं… चुंकि शंकर दादा का परिवार जनकूपुरा में पुरखों से बस रहा है और हर घर से इनके अच्छे संबंध है तो शर्माशर्मी में कोई कुछ नहीं कह पाता, लेकिन हकीकत यह है, कि खुद यहां से गुजरने वाले आसपास के लोग भी इस अतिक्रमण से काफी परेशान है।
शुक्ला चौक एक एसी जगह है… जहां से प्रतिदिन जनकूपुरा, धानमंडी, बसरे चौक के होलसेल किराना व्यापारियों के भारी वाहन गुजरते हैं… चुंकि आसपास का इलाका पूरी तरह रिहायशी है तो लोगों का आवागमन व बच्चों का यहां से पैदल गुजरना भी आम बात है… बावजूद इसके शंकर स्वीट्स संचालक द्वारा बिना किसी सरकारी डर के खौलते हुए तेल की कड़ाई सुबह सात बजे से सड़क पर लगा दी जाती है… तो वहीं दिनभर गर्मागर्म व्यंजनों की एक टेबल और इसके पास तान दी जाती है… रही सही कसर शाम ढलते ही दूध का कड़ाव और ग्राहकों के लिए बैठने की कुर्सियां भी सड़क पर रखकर पूरी की जाती है… इसके चलते सुबह सात से रात 11 बजे तक इस दुकान के कारण करीब 40 फिट की सड़क 20 फिट की ही रह जाती है… यहां तक की खौलते तेल की कढ़ाई, सुलगती भट्टी तथा गर्म दुध के कड़ाव में खुदा-न-खास्ता कोई वाहन अनियंत्रित होकर घुस गया तो बड़ी जनहानि होने का डर है… क्योंकि सेव की भट्टी घासलेट से और दुध का चुल्हा एलपीजी सिलेंडर से इस तरह बिना सावधानी के चलाया जा रहा है। बात यदि प्रशासनिक तंत्र यातायात अमले या नपा की करें तो दोनों ने ही जब भी इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाओ मुहिम चलाई कभी किसी ने न जाने क्यों शंकर दादा के इस अतिक्रमण पर कोई उल्लेखनीय कार्रवाई नहीं की… तो क्या एसे में मान लिया जाए कि शंकरजी की प्रसाद से प्रशासनिक जिम्मेदारों को भी बरोबर नवाजा जा रहा है।

patallok

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