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ऊल जलूल आदेश निकालते अधिकारी, सरकार की फजीहत

ऊल जलूल आदेश निकालते अधिकारी, सरकार की फजीहत

ऊल जलूल आदेश निकालते अधिकारी, सरकार की फजीहत

मंदसौर। लगता है शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कमलनाथ सरकार को बदनाम करने का ठेका ले रखा है रोज ऊल जलुल आदेश निकालते हैं जिससे सरकार की फजीहत हो रही है।
शिक्षा मंत्री अधिकारियों की चिकनी चुपड़ी बातों में आ रहे हैं। अधिकारियों की बात मानकर सरकार ने लाखों शिक्षकों से बुराई मोल ले ली हैं सरकार को पता चल गया है विधानसभा चुनाव में उसके एक चौथाई भी डाक मत पत्र लोकसभा में नहीं दिए क्योंकि जिस प्रकार से अधिकारी मनमानी करने पर तुले हुए हैं और भाजपा से मिलकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उसका ऑडियो एम पी ई बी के अधिकारी से हुई चर्चा का वायरल हो चुका इसे सरकार को समझना चाहिए।
संचालनालय लोक शिक्षण में संगठन विशेष और भाजपा समर्थित अधिकारी ही कुंडली जमाए बैठे हैं और उन्होंने शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द अपना घेरा कस लिया है, इस कारण से वे अपनी मनमर्जी से आदेशों को तोड़ मरोड़ देते हैं।
ऐसा ही आदेश क्रमांक 44-4/2019/22-2 दिनांक 9/6/2019जो जयश्री कियावत ने जारी किया है उसके अंतर्गत शिक्षा मंत्री के आदेश का पालन करके और बच्चों की छुट्टियां 14 जून की बजाय 23 तारीख तक बढ़ा दी है,अब 24 तारीख जून से बच्चों के लिए स्कूल खुलेंगे।
किंतु गोलमाल कर शेष आदेश 18/3/20 19 के अनुसार ही रहेगा अर्थात शिक्षकों को तो 10 तारीख से स्कूल जाना ही है, स्कूलों में लाइट नहीं है, पंखे नहीं है, पीने के पानी की सुविधा नहीं है किंतु भरी दोपहरी में शिक्षकों को स्कूल जाना है और वहां बैठकर गर्मी में अपने आप को खपाना है, क्योंकि बच्चे ही नहीं आएगी तो स्कूलों में शिक्षक करेंगे क्या? रिजल्ट घोषित हो चुके हैं एडमिशन हो चुके हैं स्कूल खुलते ही पढ़ाई शुरू करना 10 तारीख से 24 तारीख शिक्षक स्कूल में बैठकर गर्मी में अपने आप को तपाना हैं।
अधिकारियों की मनमर्जी तो हो गई किंतु सरकार बदनामी करने में अधिकारी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं, आदेश में यह लिख देते कि शिक्षकों की छुट्टियां नहीं रहेगी तो इससे शायद शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री नाराज हो जाते हैं, इसलिए उन्होंने गोलमाल लिख दिया कि शेष आदेश 18/3/2019 का अनुसार ही रहेगा इस प्रकार से सरकार को बदनाम करने में शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को चाहिए कि भाजपा समर्थित संगठन विशेष के मानसिकता पाले बैठे लोगों को से जल्दी से जल्दी ही राज्य शिक्षा केंद्र और लोक शिक्षण संचनालय को मुक्त कराएं वरना स्थानीय संस्थाओं के चुनाव में कर्मचारियों को सरकार को शिक्षकों के कोप का भाजन होना पड़ेगा और उसके लिए दोषी शिक्षक नहीं बल्कि वे अधिकारी और जनप्रतिनिधियों में जो शिक्षकों की भावनाओं को नहीं समझते हुए अधिकारियों के गिरफ्त में आकर उनके अनुसार आदेश निकाल रहे हैं, और उस आदेश की मंशा समझ नहीं पा रहे हैं। अधिकारियों ने एक आदेश निकाला है कि स्कूलों में रंगाई पुताई जैसे काम इन अवकाश के दिनों में करवा लिया जाए, कितना हास्यास्पद और या यूं कहें मूर्खतापूर्ण आदेश के कारण की बरसात में रंगाई पुताई जो भी अभी कराई जाएगी सब धुल जाएगी और फिर बरसात बाद दुबारा रंगाई पुताई के लिए आदेश जारी कर देगे, पूरे देश में बरसात के बाद ही दिवाली से पहले रंगाई पुताई होती है और मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग मैं पूरे देश से अलग हंसी मजाक से ओतप्रोत आदेश निकाले जा रहे हैं जिसका कोई तुक नहीं है। राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी सरकार को बदनाम करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे है।

patallok

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