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व्यापम से भी बड़ा घोटाला एईओ चयन परीक्षा

2०० से 3०० सौ करोड़ का भ्रष्टाचार भाजपा के ‘शिवÓराज सरकार में

मंदसौर। मंदसौर जिले सहित पूरे प्रदेश में राज्य शिक्षा सेवा के अंतर्गत नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए सरकार ने जुलाई 2013 में राज्यसेवा शिक्षा सेवा का गठन किया और 8 सितंबर 2013 को मंदसौर जिले सहित पूरे प्रदेश में 3286 एरिया एजुकेशन ऑफिसर (एईओ) की भर्ती के लिए वैकेंसी जारी की, 400 फीस लेकर ऑनलाइन आवेदन करना था जिसमें 50,000 शिक्षकों और अध्यापकों ने आवेदन दिए चयन परीक्षा भी हुई और चयन भी हुआ, किंतु आज तक यह मामला कोर्ट और सरकार के बीच में झूलता रहा, क्योंकि जिस प्रकार से पूर्वर्ती मध्य प्रदेश सरकार ने एक संगठन विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा करने के लिए यह प्लान बनाया था किंतु हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया और फिर लौट कर राज्य सरकार के पास आ गया है।
इस की नियुक्ति में करोड़ों रुपए की राशि तत्कालीन शिक्षा मंत्री के खासम खास सलाहकारों ने एकत्रित की थी किंतु मामला न्यायालय में जाने के कारण ना तो एरिया एजुकेशन ऑफिसर की नियुक्ति हुई और ना ही उन्हें उनकी राशि वापस मिली, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पाले में गेंद डाल दिए देखना है कि शिक्षा मुख्यमंत्री इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।
सर्वाधिक रिट याचिकाएं लगी
लगभग 200 याचिकाएं जबलपुर हाईकोर्ट में लगी जिसमें सभी वर्गों ने अपने अपने बात रखी की पात्रता के अनुसार उन्हें भी नैसर्गिक न्याय के आधार पर उच्च श्रेणी शिक्षक व्याख्याता सहायक अध्यापकों को भी इस एरिया एजुकेशन परीक्षा में सम्मिलित किया जाना चाहिए था किंतु नहीं किया तो यह नियुक्तियां रुकवा दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ने अब गेंद राज्य सरकार के पाले में फेंक दी है निर्णय राज्य सरकार को करना है।
एरिया एजुकेशन ऑफिसर अपनी जीत बता रहे
एरिया एजुकेशन ऑफिसर के संगठनों ने इसे अपनी जीत बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्हें न्याय मिला है और उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है अब राज्य सरकार को उनकी नियुक्ति करना है किंतु यह भ्रम है, निर्णय के अनुसार राज्य सरकार को यह तय करना है कि एरिया एजुकेशन ऑफिसर की परीक्षा फिर से ली या नही?
क्या था गोलमाल
ऑनलाइन परीक्षा हो गई थी और आज तक उस ऑनलाइन परीक्षा की अंकसूची किसी भी एरिया एजुकेशन ऑफिसर को नहीं दी गई केवल चयन सूची प्रकाशित कर दी गई और इसमें प्रत्येक अभ्यर्थी से 3 से 5 लाख रूपए तक लेकर के और इन्हें पास किया गया इस प्रकार से लगभग 2000 से 3000 शिक्षकों से 200 सौ से 300 सौ करोड़ रुपए की राशि भ्रष्टाचार के रूप में एकत्रित हुई है, जिसकी जांच एसटीएफ, लोकायुक्त या फिर सीबीआई से कि जाना करवाई जाना चाहिए। क्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में बिल्कुल पारदर्शिता नहीं थी और आज तक उसका जवाब सरकार नहीं दे पाई।
वित्त विभाग की आपत्ति
सरकार में बैठे एक संगठन विशेष के लोगों को 20 से 30 हजार रूपए प्रतिमाह फायदा देने के लिए जन अभियान परिषद और माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की तरह यहां भी पूरे शिक्षा विभाग में एरिया एजुकेशन ऑफिसर उनकी नियुक्ति होना थी और उसमें एक संगठन विशेष के लोगों को प्रतिमा 20 से 30 हजार रूपये का फायदा देने के लिए यह प्लानिंग थी किंतु वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति जता दी थी, जिस कारण से भी मामला उलझन में घिरता दिखाई दिया।
जांच की मांग
निष्पक्ष पारदर्शी हो जांच की मांग मध्य प्रदेश सरकार से मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव वित्त मंत्री को ज्ञापन देकर मांग की है कि एरिया एजुकेशन ऑफिसर की नियुक्तियां और इसमें सहायक संचालक तक की नियुक्तियां शिक्षा आयोग पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
इन्हें भी मिले मौका
सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, शिक्षक माध्यमिक शिक्षक, उच्च माध्यमिक शिक्षक, व्याख्याता सभी को इस परीक्षा में बैठने की पात्रता होना चाहिए और वरिष्ठता के आधार पर इनकी नियुक्तियां सहायक संचालक, एरिया एजुकेशन ऑफिसर, हाई स्कूल प्राचार्य के पदों पर जाना चाहिए। प्रोफेशनल प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड या राज्य शिक्षा आयोग के गठन से बाद यह और परीक्षा में प्राप्तांको की वरिष्ठता के आधार पर नियुक्तियां दी जाए। इस बात में विशेष ध्यान रखा जाए कि सहायक संचालक, एरिया एजुकेशन ऑफिसर को उनके गृह जिले में नियुक्ति नहीं दी जावें। उनके गृह जनपद या गृह जिले से दूर की जाएगी यह शर्त पहले ही लगा दी जावे ताकि जो इच्छुक हैं वही इन पदों पर आवेदन देंगे।
शिक्षक कांग्रेस ने उठाया मामला
मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने इस मामले को मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव के संज्ञान में लाया है की जिस प्रकार से अनियमितताएं एरिया एजुकेशन ऑफिसर की नियुक्ति में हुई है, इस परीक्षा को निरस्त की जा कर पुन: नए सिरे से शिक्षा आयोग के गठन करके और नियुक्तियों में की जाए नियुक्तियों में पारदर्शिता हो ताकि किसी भी प्रकार का आक्षेप न लगे और मामला फिर कोर्ट की में ना जाए। मामला कोर्ट में क्यों गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री के निकट रहने वाले कतिपय अध्यापकों ने एक प्लानिंग के तहत केवल अध्यापक संवर्ग और शिक्षक एवं प्रधान अध्यापक माध्यमिक विद्यालय को एरिया एजुकेशन ऑफिसर के लिए पात्र माना और इन्हें लगभग वेतन के अलावा 20,000 अधिक वेतन दिया जाना था। जब अध्यापकों का वेतन लगभग 18 से 20 हजार था वह बढ़कर लगभग 40,000 होना था, इसे लेकर वरिष्ठ अध्यापक जिनका वेतन 23 से 25 हजार था, इस परीक्षा में नहीं बैठ पाए इस कारण से उन्होंने भी न्यायालय की शरण ली। सहायक शिक्षक भी पात्रता रखते थे उन्हें भी इससे वंचित होना पड़ा जबकि वे योग्य थे।

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