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नकली ऑयल निकाल रहा इंजन की ‘जान’

मिलावटी पेट्रोल के बाद मिलावटी इंजिन ऑयल का हुआ बड़ा खुलासा
शहर के दो मिलावट खोर से बरादम हुआ ७५ लीटर नकली गल्फ ऑयल, दिल्ली की टीम ने शहर पुलिस की मदद से की कार्रवाई
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

आज तक शहर में जब-जब किसी की गाड़ी खराब होती है या इंजिन में काम आता है, तो अमूमन गाड़ी मालिक और मैकेनिक के मुंह पर यही बात आती है कि आजकल शहर में मिलावटी पेट्रोल मिल रहा है, लेकिन एक चौकाने वाला खुलासा सोमवार को शहर में इंजिन ऑयल से संबंधित उस वक्त हुआ जब गल्फ ऑयल कंपनी के दिल्ली से आए चार सदस्यीय दल ने गौल चौराहे व रामटेकरी के दो मिलावट खौर से नकली व मिलावटी गल्फ ऑयल की 75 लीटर की खेप बरामद की। बता दें कि ये मिलावटखौर तो इस गौरख धंधे का महज एक छोटा सा प्यादा है। इस मामले के कई बड़े बकासुर तो सालों से करोड़ों का चुना शहरवासियों को लगा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गल्फ कंपनी को लंबे समय से नकली ऑयल की शिकायतें मिल रही थी, जिसके चलते कई दिनों से गल्फ कंपनी के कंपनी हेड संजीव बहल, खोजबीन अधिकारी सतीश शर्मा, अभिषेक शर्मा और प्रशांत शहर में डेरा डाले हुए थे। उक्त दल ने पहले गुपचूप तरिके से मिल रही शिकायतों की जांच की तो तमाम शिकायतें सही पाई गई। इसके बाद सोमवार को उक्त दल जिला पुलिसके आला अधिकारियों से मिला और पुलिस की मदद चाही। इसके बाद पुलिस की मदद से गोल चौराहा स्थित अभिनंनद ऑटो पार्टस व रामटेकरी स्थित मीरा आटो पार्टस पर दबिश दी। पुलिस व अधिकारियों टीम ने अभिनंदन से 60 व मीरा से 15 लीटर नकली ऑयल गल्फ कंपनी का बरामद किया। लेकिन जब कंपनी के अधिकारियों ने यहां रखे गल्फ कंपनी के एक-एक लीटर की पैकिंग के बॉक्स की जांच की तो दोनो जगह से एक के बाद एक 75 डब्बों में नकली ऑयल बरामद हुआ। मामले में कोतवाली पुलिस ने ऑयल बरामद कर दुकान संचालकों नीलेश जैन (अभिनंनद ऑटो पाटर््स) व खुरम शेख (मीरा ऑटो पाटर््स) पर भादसं की धारा 420, 482 के तहत केस दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया। सूत्र बता रहे हैं कि नीलेश बाबू की ढंग से जांच की जाएं तो ऑटो पाटर््स के मामले में भी चौकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
180 रूपए की हराम की कमाई
सोमवार को जो नकली ऑयल का खुलासा हुआ उसके बाद इस गौरख धंधे के सूत्र भी सक्रिय हुए और बाजार में यह भी खबर छनकर आई कि कई दशकों से इस धंधे में जमे बकासूर अब तक शहरवासियों को करोड़ों का चूना लगा चुके हैं। क्योंकि ये लोग जनरेटर में डलने वाला ऑयल जो बाजार में 70 रूपए लीटर में मिलता है। उसे बैरल का बैरल खरीदकर ब्रॉन्डेड कंपनियों डब्बों में भरकर 250 रूपए में बेच रहे हैं यानि सीधे तौर पर 180 रूपए प्रति लीटर का घायला किया जा रहा है।
25 लाख रूपए महिने का चुना
एक अनुमान के अनुसार शहर में प्रतिमाह करीब 25 लाख रूपए का चुना नकली ऑयल को बेचकर मिलावटखोर शहर की जनता को लगा रहे हैं। दरअसल शहर में करीब 30 दुकाने ल्यूब्रिकेंट ऑयल की हैै। प्रतिदिन एक दुकान की सेल करीब 30 लीटर ऑयल है। एसे में 30 दुकानों से 900 लीटर ऑयल प्रतिदिन बिक रहा है। वैसे सूत्र तो करीब एक चौथाई ऑयल नकली बता रहे हैं, लेकिन आधा ऑयल भी नकली मान लिया जाए तो 450 लीटर नकली ऑयल प्रतिदिन शहर में बिक रहा है, जिससे 81 हजार प्रतिदिन की काली कमाई की जा रही है, जो प्रतिमाह 24 लाख 430 रूपए बनती है।
ये होता है नुकसान
नकली ऑयल में ल्यूब्रिकेंट की मात्रा लगभग नाम मात्र होती है, जिसके चलते इंजिन जल्दी गर्म होने लगता है, गाड़ी एवरेज भी कम देती है और अक्सर खराब होकर बंद हो जाती है। कई बार हालात यह भी होते हैं कि नकली ऑयल से लगातार गर्म होने वाला इंजिन आग पकड़ लेता है और बड़े हादसे भी हो जाते हैं।
एसे करें नकली असली की पहचान
वैसे तो जो नकली ऑयल शहर में बिक रहा है उसमे और असली ऑयल में अंतर पता करना लगभग हर आम वाहन चालक के लिए मुश्किल ही है, लेकिन इसमें अंतर पता करने का एक आसान तरिका यह भी है, कि ऑयल खरीदने के बाद दुकानदार से पक्का जीएसटी वाला बिल लिया जाए। यदि वह पक्का बिल देता है तो ऑयल भी असली ही है। क्योंकि जो नकली ऑयल खुले ऑयल या वापरे हुए ऑयल को रिफाईंड करके बेचा जा रहा है उसमे दुकानदार जीएसटी का बिल नहीं दे सकता। क्योंकि उसकी खुद की खरीदी बिना जीएसटी के की हुई होती है।
सामने समाजसेवी, असल में दगाबाज
बता दें कि ल्यूब्रिकेंट्स ऑयल के धंधे में शहर के कई एसे बड़े बकासूर भी हैं जो शहरवासियों और समाज के सामने सफेद, कलफदार कपड़े पहनकर अपने आपको समाजसेवी दर्शातें हैं और समाज की विभिन्न कुरूतियों पर चौक-चौराहों पर ज्ञान पेलते फिरते हैं। जबकि खुद नकली और मिलावटी ऑयल का धंधा करके लोगों दगाबाजी का पाट पूरा अदा कर रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं, कि ये एक एसी मिलावट है, जिसे लेकर एकदम किसी को पल्ले नहीं पड़ती है। इसी कारण है कि इस धंधे के बकासूर इस काली कमाई से बेशुमार काली दोलत जमा कर चुके हैं।
एक कांग्रेस नेता की भी चर्चा
इधर, नकली ऑयल की इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर एक कांग्रेसी की भी चर्चा आम हुई थी। दरअलस इस चर्चा में यह तक कहा गया कि कोई कांग्रेसी नेता भी नकली ऑयल के इस गौरख धंधे में सालों से सक्रिय है और इस तरह के गौरख धंधें करने वालों का पार्टरन है। बताया जा रहा है कि ये कांग्रेसी समय-समय पर इस काले काम को छूपाने के लिए अपनी नेतागिरी का भी पूरा उपयोग करता है।
कंपनी जागी, पुलिस खुद कब जागेगी
खैर इस पूरे घटनाक्रम में वो तो गल्फ कंपनी की साख दाव पर लग रही थी। इसलिए खुद कंपनी के दिल्ली के अधिकारी मंदसौर पहुंचे और कई दिनों तक यहीं रहकर पूरे मामले की तहत पहुंचकर अंतत: कार्रवाई की। जबकि होना यह चाहिए कि खुद पुलिस को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाकर इस तरह का गौरख धंधा करने वालों पर नकेल कसनी चाहिए। यदि अब भी पुलिस ने इस दिशा में कमर नहीं कसी तो यों ही शहरवासी लूटाते रहेंगे। पहले नकली ऑयल खरीदकर और बाद में इस नकली ऑयल से अपनी गाड़ी खराब होने पर खर्चा फिजूल खर्चा करते ही रहेंगे।
कैलाश मार्ग पर अनिल का छपरा
इस मामले में सूत्रों पर भरोसा करें तो कैलाश मार्ग पर अनिल नाम से दुकानदारी करने वाला एक बंदा भी सालों से अपने अन्य काले कारनामों के साथ यह गौरख धंधा भी संचालित कर रहा है। बताया जाता है, कि दुकान उपर वाले छपरे को यदि पुलिस टटोले तो खुल्ले ऑयल की रिपैकिंग करे हुए डब्बे भारी मात्रा में बरामद हो सकते हैं, तो वहीं दुकान के तलघर में हायर सैकेंडरी स्कूल व अन्य स्थानों से चारी हुई सायकिलें मिलेगी। इसी तरह इस तलघर में चोरी की बाइक के पाट्र्स भी संभाले हुए हैं, तो वहीं जो एसीड पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित है वह इस तलघर से भारी मात्रा में मिल सकता है। सूत्र बताते हैं कि नकली बैट्री के एक मामले में तो इस दुकानदार से एक साधु अढ़ भी गया था। पहले दुकानदार अपनी दादागिरी से बाज नहीं आया तो साधु ने बाकायदा नोटिस थमा दिया। अब सुना है दुकानदार साधु के हाथ जोड़ता फिर रहा है। इसके अलावा ये महाशय चोरी के वाहनों, रेलवे की चोरी की बैट्रीयों, जीएसटी बिल में घालमेल जैसे संगीन मामलों में तोड़ बट्टे करके बादस्तुर अपनी दुकानदारी आज भी चला रहे हैं।

patallok

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