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सेहत के नाम पर बिक रहा कैंसर

गोदामों में कार्बाइड से भारी मात्रा में पकाए जा रहे कच्चे आम
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

लोग तो अच्छी सेहत बनाने के लिए बड़ी उम्मीदों से बाजार से फल खरीद रहे हैं। पर थोक विक्रेता थोड़े से लालच में कार्बाइड जैसे जहर परोस रहे हैं। आम, पपीता, केले सहित अन्य फलों को जल्दी पकाने के चक्कर में कार्बाइड और सेब व अन्य फलों को चमकाने के चक्कर में वैक्स लगाया जा रहा है। यह सेहत के लिए खासा हानिकारक है। चिकित्सकों की मानें तो कार्बाइड की ज्यादा मात्रा शरीर के आहार तंत्र को खराब करने के साथ ही कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी भी हो सकती है। खास बात यह है, कि पांच साल पूर्व शहर के दो गोदामों से ढाई किलो कार्बाइड जब्त करने वाला खाद्य अमला भी महज इस एक कार्रवाई के बाद सब कुछ सेट होने पर चुपचाप माल सूतने में लगा है।
गर्मी के मौसम में शरीर में तरावट बनाए रखने के लिए फलों के सेवन को प्राथमिकता दी जाती है। चिकित्सक भी मरीजों को पानी का संतुलन बनाए रखने के लिए फल और ज्यूस लेने की सलाह दे रहे हैं। बाजार में रसायनों से जल्दी तैयार किए गए फल सेहत को पोषण देने के बजाय नुकसान पहुंचा रहे हैं। शहर के लगभग सभी फल विक्रेता केले, पपीते, आम, संतरे जैसे फलों को कार्बाइड से पकाकर बेचने का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। शायद यही कारण है, कि आज लगभग कोई भी फल खाने के लिए आपको उसके विशेष सीजन का इंतजार करने की जरूरत नहीं। किसी भी सीजन में बाजार में उक्त फल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। जैसे केला ही ले लो जो घंटाघर से मंडी तक हर ठेले पर आसानी से पूरे साल उपलब्ध हो रहा है। यदि आप बाजार में आम खरीदने निकले हो तो आपको पहले की तरह अच्छे और पके हुए आम के लिए पूरे बाजार में भटकना नहीं पड़ेगा। दरअसल अब तो हर ठेले और दुकान पर आप को पीले शा बादाम और लाल सूर्ख लाल पट्टा आम आसानी से मिल जाएंगे। खबरों के अनुसार यह सब इसलिए भी संभव हुआ है। क्योंकि प्राकृतिक पके हुए आम के लिए तो फिर भी इंतजार करना पड़ता है, लेकिन ये तो सब कार्बाइड से पकाए गए हैं।


अप्राकृतिक रूप से पकाता है फल को
कार्बाइड फलों की नमी और ऑक्सीजन से क्रिया करके गैस विसर्जित करता है। इससे बनने वाली ऊर्जा फलों को अप्राकृतिक रूप से समय से पहले पका देती है। कार्बाइड से फल तो जल्दी पक जाते हैं लेकिन फलों में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा खत्म हो जाती है। साथ ही रसायनिक तत्व फलों के साथ शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालते हैं। इसके अलावा यह फल जल्दी खराब भी होने लगते हैं।
बस स्टैंड पर बिक रही बीमारियां
नेहरू बस स्टैंड, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन सहित शहर के हर क्षेत्र में कार्बाइड से पके हुए फलों को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। गोदामों में कार्बाइड से पके हुए फल बस स्टैंड में यात्रियों और जिला अस्पताल के बाहर से अस्पताल में मरीजों के पास पहुंच रहे हैं।
सजा का है प्रावधान
रसायनों से पके और वैक्स कोडिंग किए फल बेचने पर 2 लाख रुपए तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है। मिलावटी खाद्य बेचने पर छह माह की सजा हो सकती है। यदि असुरक्षित खाद्य से कोई स्थायी विकलांग हो जाए तो विक्रेता को तीन-चार साल तक की सजा और पांच लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान भी है।
कैंसर तक की संभावना
कार्बाइड शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। कार्बाइड से पके हुए फल खाने से शरीर का आहार तंत्र प्रभावित होता है। खासकर लीवर, आंत, अमाशय को कार्बाइड से काफी नुकसान होता है। पाचन में सहायक अवयवों को प्रभावित करने से पाचन शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है। अधिक मात्रा में कार्बाइड शरीर में जाने से कैंसर तक की संभावना हो सकती है।
-डॉ व्हीएस मिश्र, एमडी

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