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मुस्कुराइये आप राठौर्स डेन्टल क्लीनिक में है

कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर का पेनकोस्मिआ टेलेन्ट ऑफ हेल्थ केयर प्रोफेशनल अवार्ड समारोह २०१९ में अपने द्वारा संचालित डॉ राठौर डेन्टल एण्ड रिसर्च सेन्टर को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ डेन्टल क्लीनिक का अवार्ड दिलाने वाले युवा दम्पत्ति डॉ कुणाल एवं दीप्ति राठौर इस सप्ताह हमारे फेस टू फेस कॉलम का चेहरे है।
डॉ कुणाल बताते है कि बचपन से घर में मम्मी पापा को बिजी देखकर सोचा था कि डॉक्टर नहीं बनूंगा पर धीरे-धीरे लगा कि यहीं एक प्रोफेशन है जिसमें सम्मान, सेवा की संतुष्टि और जीवन यापन तीनों मौजूद है। २००४ में डेन्टिस्ट की संख्या कम थी इसलिए उन्होंने यह फील्ड चुना २००९ में उन्होंने इंदौर से बीडीएस किया उसके बाद सुपर स्पेशलिस्टी करने हेतु वे उदयपुर चले गए जो २०१३ में साध्य हुई इसके साथ ही २०१३ में डॉ राठौर दम्पत्ति जिले के पहले डेन्टल सुपर स्पेशलिस्ट बने, तब उन्होंने डॉ राठौर डेन्टर एण्ड रिचर्स सेन्टर प्रारम्भ किया, उन्होंने मालवा में बच्चों के दांतों की समस्या पर रिसर्च किया है।
पीटीआई अवार्ड २०१९
पीटीआई अवार्ड के बारे में कुणाल कहते है कि इसके लिए उनके क्लीनिक के फेसबुक पेज जिसके २०८५ फालोवर्स है जिसमें क्लीनिक के पेशेन्ट्स के किए गए ईलाज के फोटो ग्राफ देखकर पीटीएम अवार्ड एसोशिएशन की टीम का इस क्लीनिक की और ध्यान गया तथा इस टीम ने डॉ कुणाल को एप्रोच किया और क्लीनिक की डिटेल भेजने को कहा जिससे संतुष्ट होकर कुणाल दम्पत्ति और क्लीनिक को पीटीआई अवार्ड हेतु चयनित किया गया, उसके बाद ३ केटेगरी की कठिन प्रक्रिया से गुजर कर जूरी ने उनको पुरस्कार योग्य माना उनके पांच साल के पेशेन्ट की रिकार्ड हिस्ट्री और सक्सेस रेशो भी है, पूरे क्लीनिक का इन्फ्राट्रक्चर यूज की जाने वाली मशीनों की भी क्वालिटी परखी गई।
क्वालिटी पर जोर
डॉ कुणाल का कहना है कि अब हमारा समाज दांतों की केयर पर ध्यान देने लगा है तथा क्वेक्स और झोला छाप डेन्टिस्ट के पास जाना बंद कर रहा है उन्होंने बताया कि उनका जोर क्वालिटी ऑफ ट्रीटमेन्ट पर है जो उपकरण वे उपयोग में लाते है वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के है, पेशेन्ट भी अवेयर हो रहे है, उनके क्लीनिक पर ६ स्पेशलिस्ट डॉ विजिट पर आते है।
डॉ तृप्ति राठौर
डॉ तृप्ति मृदुभाषी और मितभाषी है वे मानती है एक अच्छे डेन्टस्टीट, साइंस एवं आर्ट दोनों का मिश्रण होना चाहिए क्योंकि दांतों का ट्रीटमेंट भी एक आर्ट है, साइंस और कला के मिश्रण से दांतों का इलाज परफेक्ट होता है। उनका मानना है कि पेशेन्ट्स से सिर्फ विनम्रता से बात कर ली जाए और उसकी परेशानी को गोर से समझी जाए तथा पेशेन्ट को आत्मीयता मिले तो उसे बीमारी और दर्द से राहत मिल जाती है।
डॉ तृप्ति बताती है कि उनके घर में डॉक्टरी का कोई माहौल नहीं था पर वे डॉक्टर बनना चाहती थी और बनी। वे कहती है कि महिलाएं घर और प्रोफेशन दोनों में सामंजस्य बिठाना जानती है। दांतों का इन्प्लाटेंशन उनकी स्पेशलिटी है।
डॉ तृप्ति फुरसत के लम्हो में कभी-कभी पेन्टिंग करती है तथा उनकी संगीत में भी गहरी रूची है वे वाध्य यंत्र सिथसाइजर बहुत अच्छे से बजा लेती है।
पेन्टिंग
राठौड़ दम्पत्ति मंदसौर में डेन्टल क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा का अध्याय जोड़ रहे है लेकिन उनका कहना है कि ‘केयर इलाज से बेहतर हैÓ भारत में माऊथ केन्सर की संख्या ओर इससे होने वाली मौातों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोग गुटका, तम्बाकू, पान मसाला छोड़ दें और माऊथ केयर पर ध्यान दें तो ज्यादातर समस्याओं से बचा जा सकता है। डॉ कुणाल राठौर अंत में बताते है कि वे अर्थोडेन्टीस्ट है जो चेहरे व दांतों की विकृतियों को सुधारते है व ठीक भी करते है, यह चीजें बढ़ती उम्र में यानि जब बालक १२ से १८ वर्ष का होता है तब उसका ईलाज अच्छे से हो जाता है लेकिन दु:ख की बात है कि पेशेन्ट हमारे पास २५ की उम्र में आते है, खासकर लड़कियां वो भी तब जब उनकी शादी की उम्र होती है लेकिन तब इलाज तो हो जाता है परन्तु चाहे गए रिजल्ट भी देर से मिलते है तथा समय भी ज्यादा लगता है। ऐसे में पेशेन्ट के पास समय भी नहीं रहता, इसलिए मां-बाप को इस हेतु बच्चों के अवेरनेेस की जरूरत रहती है क्योंकि बच्चे जब छोटे रहते तब मालूम नहीं पड़ती और जब बड़े हो जाते है तब समय निकल जाता है।

patallok

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