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सियासत की शतरंज पर साधु संतों ने दिखाया अपना दम

भोपाल। भोपाल का संसदीय क्षेत्र का चुनाव अब राजनेताओं के बीच ही नहीं बल्कि साधु-संतों के बीच भी रार करवा रहा है एक तरफ भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया तो पहले तो उमा भारती नाराज हो गई और उन्होंने कटनी में यहां तक तंग कर दिया था कि वह प्रज्ञा ठाकुर के बराबर नहीं हो सकती वे मूर्ख और नासमझ इंसान हैं किंतु जब आरएसएस ने उमा भारती को मनाया तो उमा भर्ती ने भोपाल आकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से मिली और जिस प्रकार से उन्होंने विलाप किया और समाचार पत्रों में मीडिया ने उसे कवरेज किया वो चुनाव प्रचार का एक अच्छा तरीका भाजपा ने निकाला इसका कितना फायदा होता है यह तो मतदान के बाद ही पता चलेगा।
जिस प्रकार साधु संतों में भी आपसी मनमुटाव और कुर्सी को लेकर संघर्ष हो रहा उससे लगता हैं भोपाल लोकसभा का चुनाव साधु संतों की लड़ाई में तब्दील होता जा रहा हैं। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त हैं, उन्होंने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को साध्वी मानने से भी इंकार कर दिया, उन्होंने बताया कि कोई भी साधु-संतों या साध्वी अपने नाम के आगे ठाकुर नहीं लगाता है क्योंकि साध्वी, साधु -संत बनने से पहले वह अपना तर्पण कर देता है और खुद को समाज के अर्पण कर देता है, वह गिरी पुरी गोस्वामी आदि शब्द लगाता है जो माननीय सम्मानीय और श्रद्धा के सूचक होते हैं किंतु कोई साधु संत अपने नाम के आगे ठाकुर लगाए जाति का सरनेम लगा है वह साधु संत साध्वी नहीं हो सकते।


वहीं कंप्यूटर बाबा ने भी हजारों साधुओं के साथ दिग्विजय सिंह के लिए प्रचार का मोर्चा खोल दिया है महामंडलेश्वर वैराग्य नंद ने तो यहां तक कह दिया कि वह हजारों संतो के साथ भोपाल विधानसभा में दिग्विजय सिंह का प्रचार करेंगे 5 क्विंटल मिर्ची हवन यज्ञ करेंगे और अगर दिग्विजय सिंह हार गए तो वे जिंदा समाधि ले लेंगे, निर्वाचन आयोग इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा जबकि ये शपथ जिंदा समाधि लेना आत्महत्या है, अगर चुनाव आयोग इस पर अगर कार्यवाही करता है तो इससे वैराग्य नंद को और अधिक प्रचार प्रसार मिल जाएगा और उनका मकसद जो बयान देने का है वह पूरा हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में लिख दे सकते हे कि दिग्गी राजा सनातन हिन्दू धर्म के उपासक हैं चुनाव वे ही जीतेगें। इस प्रकार से देखें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों की भोपाल की राजनीति साधु संतों में भी रार मची हैं।

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