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पांच साल में प्रतिवर्ष 2 मी घट रहा भू-जल

तेजी से घटते भू-जल स्तर के बावजूद नहीं रूक रहे अवैध बोरवेल खनन
अक्सर आधी रात को उढ़ता है प्रतिबंध का मखौल, जिम्मेदारों की नींद खुलते-खुलते सब कुछ गूल
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

जिले का भू-जल स्तर पिछले पांच सालों से प्रतिवर्ष औसतन 2 मीटर गिरता ही चला जा रहा है। बावजूद इसके जिले में अवैध बोरवेल उत्खनन का गौरख धंधा काबू में नहीं आ रहा है। चाहे जिला मुख्यालय की कोई नई बसाहट हो या ग्रामीणांचलों के खेत या रहवासी इलाके अक्सर आधी रात के अंधेरे में बोरवेल खनन प्रतिबंध के नियमों का माखौल उढ़ता दिख रहा है। कई बार एसा भी होता है कि रात को ही बुद्धिजीवी वर्ग जिम्मेदारों को फोन भी लगता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती और सुबह नींद खुलते-खुलते सब कुछ गूल हो जाता है।
जिले में गत वर्ष औसत बारिश के बाद भी भू-जल स्तर में गिरावट हुई है। भू-जल स्तर 40 से 45 मीटर तक पहुंच गया। जिले का भू-जल स्तर प्रतिवर्ष औसतन एक मीटर नीचे जा रहा है। सात सालों में करीब 1& मीटर पानी जमीन में नीचे चला गया है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने बोरवेल खनन पर प्रतिबंध तो लगा दिया, लेकिन खनन बंद नहीं हुआ। गिरते भू-जल स्तर पर वर्ष 2016 में तत्कालीन प्रभारी मंत्री ने भी चिंता व्यक्त करते हुए खेत कुंड एवं अन्य कार्यों के लिए निर्देश जारी किए। इसके बावजूद पिछले तीन सालों में भू-जल स्तर में तीन मीटर की गिरावट हो गई। अब पीएचई विभाग ने भू-जल स्तर की गिरावट को रोकने के लिए रिचार्ज इंस्ट्रक्चर बनाने की डीपीआर तैयार की है। ईई का कहना है कि अनावश्यक दोहन भी इसका प्रमुख कारण है। जले की जमीन में पानी तेजी से नीचे जा रहा है। इसके कारण आने वाले समय में पानी को लेकर जिले में भयावह स्थिति बन सकती है। औसत बारिश के बावजूद इस साल भू-जल स्तर अप्रैल माह में ही 45 मीटर पर पहुंच गया है, इससे प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। सबसे अधिक गिरावट वर्ष 201&-14 में दर्ज हुई थी। इस दौरान जल स्तर लगभग 11-1& मीटर से अधिक नीचे गिरा था। उसके बाद दो सालों तक अ’छी बारिश होने से भू-जल स्तर में सुधार आया। फिर भी जनवरी 2016 से अप्रैल 2019 तक करीब तीन मीटर की गिरावट हो गई। भू-जल स्तर गिरने के कारण जल स्त्रोतों में तेजी से पानी खत्म हो रहा है। अप्रैल माह में ही नलकूप, हैडपंप दम तोडऩे लगे है। पिछले साल जून तक भूजल स्तर 48 मीटर तक पहुंच गया था, इस वर्ष भी इतनी गिरावट होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या हुआ एक खेत एक कुंड का
तत्कालीन प्रभारी अर्चना चिटनीस वर्ष 2016 में छह व सात अगस्त को मंदसौर-नीमच जिले में आई थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक में जिले में घट रहे भूजल स्तर पर चिंता जताई थी। भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए एक साल तक मिशन मोड़ के तहत कार्य योजना बनाने के निर्देश देते हुए खेत कुंड बनाने के निर्देश दिए थे। ताकि प्रत्येक खेत में कुंड बनने से जमीन का पेट भरा रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। 2016 से अब तक भूजल स्तर बढऩे की बजाय तीन मीटर कम हो गया है।


बंद पड़े हैं 337 हैंडपंप
भू जल स्तर कम होने के कारण 337 हैंडपंप बंद हो गए हैं। जिले में कुल 5803 हैंडपंप है। पीएचई के अधिकारियों का कहना है कि जो 337 हैंडपंप बंद हुए है वह भूजल स्तर नीचे चले जाने के कारण बंद हुए है ये सभी हैंडपंप बारिश के बाद पुन: चालू हो जाते हैं। इसी तरह की शिकायते अन्य हैंडपंप, नककूपों में भी हो रही है, जमीन में पानी नीचे जाने के कारण जल स्त्रोतों में पानी की कमी हो रही है।
आचार संहिता बाद होगा काम
भू जल स्तर गिर रहा है। अभी 40 से 45 मीटर पर पहुंच गया है। इसको देखते हुए रिचार्ज इंस्ट्रक्शन बनाने के लिए डीपीआर तैयार की है, आचार संहिता के बाद इस पर कार्य होगा। इसके अलावा तीन साल से प्रायवेट बोरिंग पर भी प्रतिबंध है। भूजल स्तर गिरने के कारण जिले में &&7 हैंडपंप बंद हो गए है, जुलाई में पानी आते ही चालू हो जाएंगे। अभी लगभग 25 सिंगल फेस भी डाले गए है।
संजीव दुबे, ईई, पीएचई, मंदसौर
इस तरह घटता गया भू-जल स्तर
वर्ष भू-जल स्तर
201& &0-&2 मीटर
2014 41-4& मीटर
2015 &8-40 मीटर
2016 40-42 मीटर
2017 &8-44 मीटर
2018 40-48 मीटर
2019 40-45 मीटर
(स्त्रोत: पीएचई विभाग मंदसौर)

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