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छोटे-छोटे प्रयासों से भी बढ़ता है मतदान

मंदसौर। कई बार हम सोचते है एक वोट से क्या होगा जो हमने नहीं दिया तो क्या फर्क पड़ता है। एक-एक वोट अनमोल है इसके कई उदाहरण हमें पिछली विधानसभा में देखने को मिले। छोटे-छोटे पदों पर बैठे लोग अपने आसपास के परिवेश में ऐसे समझाईश देते है कि वो जिले के मतदान का प्रतिशत बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाते है। मतदाताओं को जागरूक करना ही उनका लक्ष्य नहीं होता असल परीक्षा होती है मतदान के दिन केन्द्र तक मतदाताओं को लाना। यहां हम बात कर रहे है ग्राम बोहराखेड़ी, ढिकोला जैसे कई ग्रामों की विधानसभा 28 नवम्बर 2018 चुनाव में ग्राम बोहराखेड़ी की शकुबाई सुथार बुथ क्रमांक 39 पर 4.30 बजे तक वोट देने नहीं पहुंची आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रजनी दुबे ने कई बार उसे बुलवाया लेकिन वह नहीं आई 4.45 पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रजनी दुबे स्वयं उसके घर गई परिवार से पूछा क्यों वोट नहीं दे रहे उनकी नाराजी थी नल कनेक्शन और शौचालय नहीं मिला पंंचायत से रजनी दुबे तुरन्त सरपंच को बुलवाया और परिवार को विश्वास दिलाया कि पंचायत सबसे पहले जो भी संभव होगा आपका काम करेगी। परिवार के तीनों सदस्यों ने 4.55 पर आकर वोटिंग की जिसमें एक सदस्य दिव्यांग है। ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों से ग्राम का मतदान 95 प्रतिशत रहा। इस बार शकुबाई मतदान के लिए दुसरी महिला को प्रेरित कर रही है।
ग्राम ढिकोला के एक ही परिवार की दो बुजुर्ग गुर्जर महिलाओं का 10 दिनों के अंतराल में सावित्री बाई और रामकुंवर बाई का देहान्त हो गया था। सावित्री बाई का उठावना और रामकुंवर बाई का घाटा मतदान के दिन आ रहा था आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मंजु सोनी ने परिवार से सम्पर्क किया चिंता की बात थी 22 वोट उस परिवार में थे परिवार ने बताया हम भी यही सोच रहे है कि क्या करें, मेहमान भी आएंगे तो वो भी वोट नहीं दे सकेंगे आपसी समझ और तालमेल से परिवार ने मतदान को महत्व दिया और दोनों कार्यक्रम सुबह के समय परिवर्तन करते हुए शाम को कर दिया गया। ग्राम में रहने वाले इन परिवारों ने परम्पराओं को तोड़ते हुए कि सुबह ही घाटा होगा या तीसरे की बैठक होगी अपनी नई सोच का परिचय दिया और लोकतंत्र को मजबू त करने के लिये ना सिर्फ स्वयं परिवार ने 22 वोट दिए बल्कि मेहमानों को भी वोट देने का समय दिया ये वो कम पढ़े लिखे और छोटे-छोटे लोग है जो अपनी बढ़ी सोच से अपनी परम्पराओं को भी देश के लिये बदल देते है।
ग्राम हांसली का मतदान ग्राम दमदम के मतदान केन्द्र 172 पर होता है बीएलओ ग्राम दमदम बैठते ग्राम हांसली के लगभग 50 नाम मतदाता सूची में नहीं थे आंगनवाड़ी मिनी केन्द्र हांसली की निर्मला 5वीं पढ़ी थी वो यह कार्य नहीं कर पा रही थी ये कार्य में सक्षम नहीं थी ऐसे में उनके पति सत्यनारायण चन्द्रवंशी ने सिर्फ अपना सहयोग ही नहीं दिया बल्कि तहसील जाकर उन्होंने मतदाता सूची की कॉपी ली सभी निवासियों के नाम मिलाए और 50 लोगों के आवेदन भरकर बीएलओ से साईन कराने दमदम गए तहसील तक पहुंचाने में भी सहयोग दिया। मंदसौर से 10 किमी दूर ग्राम के सत्यानारायण चन्द्रवंशी की वजह से 50 वोट बढ़ गए मंदसौर का मतदान बढ़ाने में एक आम नागरिक का सहयोग हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जहां चाह वहां राह मिल जाती है।
मल्हारगढ़ विधानसभा के ग्राम बर्डियाखेड़ी में बीएलओ की डयूटी कोई भी करने को तैय्यार नहीं था आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा मीणा ने जब मुझे बताया कि 124 लोगों के नाम अभी तक फॉर्म 6 में नहीं भरे तब कई प्रयास के बाद भी बीएलओ की जिम्मेदारी लेने में कोई तैय्यार नहीं था। आखिर ये जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा मीणा ने स्वयं ली और जब तक फॉर्म उन तक पहुंचते सभी के दस्तावेज रेखा ने इक_े किए सेक्टर अधिकारी से तत्काल फॉर्म पहुंचे और दो दिन में रेखा ने 124 लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े और प्रशासन ने तुरंत उन्हें बीएलओ का प्रभार दिया। पिछली विधानसभा चुनाव में हम इन जैसे कई हमारे साथी है जिन्होंने सुझबूझ और समर्पण से जिले को नया आकार देने में अपनी भागीदारी निभाई, आप भी सहयोग कर सकते है इस लोकसभा चुनाव में।
श्रीमती ज्योति नवहाल
स्वीप सहायक नोडल अधिकारी

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