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चंबल से निकली अवैध 300 ट्रॉली रेत बरामद

साबाश प्रशासन, रेत स्टॉक पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

एक रोजगार सचिव सहित पांच खनन माफियाओं की बताई जा रही रेत
खनन माफियाओं में हड़कंप

पालो रिपोर्टर = मंदसौर
जिले से गुजरने वाली चंबल नदी में सालों से हो रहे अवैध रेत खनन से निकली स्टॉक रेत पर एक बड़ी कार्रवाई मंगलवार शाम राजस्व तथा खनिज विभाग के संयुक्त दल ने ग्राम बसई में की। प्रशासनिक अमले ने बसई स्कूल के पास अवैध रूप से स्टॉक करके रखी हुई सारी रेत जब्त कर ली। समाचार लिखे जाने तक कार्रवाई जारी थी। उक्त रेत अनुमानित करीब 300 से अधिक ट्रॉली होने की संभावना प्रत्यक्षदर्शियों ने है। अवैध रूप से स्टॉक की गई रेत पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। बता दें कि दैनिक पाताल लोक ने मंगलवार को ही चंबल के छलनी सीने को बड़ी कार्रवाई का इंतजार शिर्षक से एक खबर का प्रकाशन प्रमुखता से किया था, जिसे के बाद न सिर्फ खनन माफियाओं में हड़कंप मचा और प्रशासनिक अमले ने बसई पहुंचकर यह व्यापक कार्रवाई की।
चंबल नदी में अवैध रेत खनन का सिलसिला यों तो सालों से चलता आ रहा है, लेकिन पिछले करीब आधे दशक से यहां बड़े पैमाने पर रेत माफिया सक्रिय हो चुके हैं। सूत्र बता रहे हैं, कि रेत से होने वाले अवैध मोटे मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा इस अवैध काम को रोकने व जग जाहिर करने वालों के पास भी पहुंच रहा है और होता यह भी है, कि जो नहीं बिकता उसे दादागिरी कर दबाने का प्रयास किया जाता है। कुछ इसी तरह की जानकारियां लगातार प्रशासन के आला अधिकारियों को ही नहीं बल्कि भोपाल तक के प्रशासनिक अमले को लगातार मिल रही थी। इसके चलते स्थानिय खनिज अमले और राजस्व अमले ने इस गौरख धंधे के खिलाफ अब कहीं जाकर त्योरियां चढ़ाई और दो दिन पूर्व ही बसई से गुजरने वाली चंबल से अवैध रूप से रेत निकालने वाले संसाधनों को जब्त किया गया। इसके बाद अभी साल-6 महिने में जिले में आए प्रशासनिक नुमाईंदों को लगा कि शायद खनन माफिया सुत-सावल में आ जाएं, लेकिन जैसा की ग्रामीणों और मुखबिरों ने आशंका जताई थी वैसा ही हुआ। खनन माफिया रात-रात को नदी से अवैध रूप से रेत निकाल-निकालकर बसई स्थित सरकारी स्कूल के पास अपनी भूमि पर स्टॉक कर रहे थे। इधर, प्रशासनिक अमला तो पहले ही तुन्नक में था ही। बस फिर क्या था पहुंच गया करीब दर्जनभर अधिकारियों कर्मचारियों का दल बसई और यहां अवैध रूप से स्टॉक कर रखी सारी की सारी रेत जमा कर ली गई। हालांकि ये रेत किस की है इस संदर्भ में अधिकारिक रूप से तो कोई जानकारी नहीं आई, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि किसी ग्रापं के इंद्र को भी जीत लेने वाले किसी रोजगार सचिव, एक पोरवाल सहित करीब 5 रेत माफियाओं का ये माल है। इसमे सबसे बड़ा हिस्सा रोजगार सचिव का बताया जा रहा है। मौके पर पहुंचने वाले अधिकारियों में खनिज अधिकारी ब्रजेशसिंह जमरे, एसडीएम डाबर, तहसीलदार प्रीति बीसे सीतामउ, सीतामउ एसडीओपी ओपी शर्मा, नायाब तहसीलदारद्वय प्रणाली तोमर, पंकज जाट, सुवासरा टीआई यादव सहित पटवारियों का दल शामिल है।
50 हजार की रॉयल्टी बनती है
मौके से प्रशासनिक अमले ने जो रेत बरामद की है। उसकी नियमानुसार रॉयल्टी लगभग 50 हजार पहुंच रही है। दरअसल खनिज विभाग द्वारा एक ट्रॉली रेत पर औसतन 250 रूपए रॉयल्टी वसूली जाती है। इस तरह मौके से करीब 200 ट्रॉली रेत जब्ती में ली गई, जिसकी रॉयल्टी पचास हजार के बनती है।
बेनकाब होने चाहिए रसुखदार रेत माफिया
प्रशासन ने मंगलवार को जो यह जब्ती की कार्रवाई की वह वाकई प्रशंसनिय है, किंतु साथ ही खनिज विभाग को यह अवैध रेत जिन-जिन सफेद पोश और इसे खनन करने में जिन-जिन रसुखदारों के नाम शामिल है उन्हें भी बेनकाब करना चाहिए। सूत्र बताते हैं, कि पूर्व में तो सत्ता के ही कई लोग इसमे शामिल थे, जिससे जिम्मेदार अधिकारी भी इन्हें बेनकाब करने में कतरा थे, लेकिन अब तो सत्ता भी परिवर्तन हो गई है और आचार संहिता भी चल रही है। एसे में जिम्मेदार प्रशासनिक मशीनरी को चाहिए कि एसे तमाम रसुखदारों की अक्कल ठिकाने लाने के लिए इनके मय फोटो सहित कार्रवाई के प्रेस नोट जारी करें।
12 लाख का धन जब्ती में
मंगलवार को जो रेत जब्ती में ली गई बाजार रेट से उसकी किमत करीब 8 लाख पहुंच रही है। दरअसल ये रेत प्रति ट्रॉली खनन माफिया बिना बाजार में करीब 4 हजार रूपए तक में बेचते हैं। इस मान से 300 ट्रॉलियों की किमत 12 लाख हो रही है। जबकि सूत्रों पर भरोसा करें तो ये स्टॉक बारिश के लिए किया जा रहा था। जब यही एक ट्रॉली पांच हजार तक में बेची जाती है, जिस मान से यह करीब 12 लाख का धन था।
गत वर्ष मार्च में पालो ने किया था बड़ा खुलासा
चंबल और रेतम नदी पर होने वाले अवैध रेत खनन को लेकर 13 मार्च 2018 के अंक में दैनिक पाताल लोक ने चंबल और रेतम की कोख पर अवैध उत्खनन का खंजर शिर्षक से एक खबर का प्रकाशन प्रमुखता से किया था। इस खबर में पालो ने एक अनुमान के आधार पर खुलासा किया था कि अकेले मंदसौर जिले में अवैध रेत खनन से प्रशासन को 20.19 अरब रूपए प्रतिमाह का चुना लगाया जा रहा है। उस वक्त दोनों नदियों में सूत्रों के मुताबित 40 अवैध मशीनें, प्रतिदिन 1600 ट्रॉली उत्खनन कर 64 करोड़ रूपए के राजस्व की चपत प्रतिदिन प्रशासन को लगा रही थी।

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