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सालो से ढांडों की समस्या हल नहीं कर पाई नपा

दावा पकडऩे का, घूम रहे सड़कों पर
शहर की प्रमुख समस्या नहीं हो रही समाप्त, नपा की कार्यशैली से नहीं हो रहा स्थायी समाधान

पालो रिपोर्टर = मंदसौर
इस शहर में उम्मीदों के इतने महासागर भी हैं, जो हमारी नपा से शहर को मेट्रो सिटी बनाने तक की उम्मीद तक सालों से लगाए बैठे हैं, लेकिन असल कड़वा सत्य तो एक यह भी हैै, कि हमारी नपा से सालों से मात्र एक छोटी सी सड़कों पर बेतरतीब घुमते ढांडे-ढोर की समस्या तक स्थाई रूप से हल नहीं हुई है। इसकी परिणीति यह हो रही है, कि रोज किसी न किसी चौक-चौराहे पर लोग इनके कारण हाथ-पैर टूटवा रहे हैं, तो कई बार इनके अचानक बीच में आने से होने वाले हादसों से लोगों अपनी जान तक से हाथ धोने पड़े हैं।
शहर के लगभग सभी मार्गों पर घूम रहे मवेशियों की रोकथाम के लिए नपा कोई ठोस उपाय नहीं कर पा रही है। लगातार पकडऩे का दावा करने के बाद भी सड़कों से उनकी संख्या कम नहीं हो रही है। गलियों और कॉलोनी की सड़कों पर तो ठीक है पर प्रमुख चौराहों पर भी यातायात में व्यवधान कर रहे मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नपा की कार्यशैली ही जिम्मेदार बन रही है। वोट बैंक की राजनीति के कारण पशुपालकों को नाराज नहीं करने के परिणामस्वरूप मवेशियों की सड़कों पर संख्या बढ़ती जा रही है। शहर के नयापुरा, गोल चौराहा, बालागंज, गोल चौराहा, नयापुरा रोड, नरसिंहपुरा, जनकूपुरा क्षेत्रों में रह रहे पशुपालक सभी की समस्या बने हुए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों कालिदास मार्ग, भारतमाता तिराहा, घंटाघर, गांधी चौराहे पर दिन भर मवेशी बैठे ही रहते हैं। सबसे व्यस्ततम महू-नीमच राजमार्ग पर भी जगह-जगह बैठे मवेशी यातायात में व्यवधान ही पैदा कर रहे हैं। नपा द्वारा सड़कों पर से मवेशियों को हटाने के लिए सालों से आवारा पशुओं को पकडऩे के अभियान चलाए जा रहे हैं। पर यह अभियान कागजों में ही दिखाई दे रहे हैं। मवेशियों के चक्कर में दुपहिया वाहन चालक भी छुटपुट दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।
पशुपालकों की हठधर्मिता
नपा अमले पर पशुपालक भारी पड़ते हैं। नपा द्वारा मवेशियों को पकडऩे के बाद कुछ पशुपालक तो दादागिरी से अपने पशु छुड़ा लाते हैं। कई बार अभियान के बाद भी शहर की सड़कों से मवेशियों की समस्या कम नहीं हुई है। कुछ पशुपालक कांजी हाउस पर प्रतिदिन जुर्माना देकर पशु छुड़ा लेते हैं। अगले दिन मवेशियों को फिर से सड़कों पर छोड़ देते हैं।
अधिकांश हादसों का कारण
यदि जिलेभर में प्रतिवर्ष होने वाले सड़क हादसों के पिछे के कारण टटोले जाएं तो लगभग 60 प्रतिशत हादसों में एक ही कारण सामने आएगा, कि गाड़ी के आगे अचानक पशु आ जाने से वाहन अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो गया। इस तरह के हादसों में कई सारी जाने भी अब तब चली गई, तो वहीं कई लोग कुछ इस तरह घायल हुए कि जीवनभर के लिए अपाहिज हो चुके हैं।
दुर्घटना का कारण
सड़कों पर बैठे मवेशियों से काफी परेशानियां होती हैं। कई बार बड़े वाहन को ओवरटेक करते समय मवेशी सामने आ जाते हैं। इससे कई लोग दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
-संजय पोरवाल, व्यापारी
जुर्माना बढ़ाना चाहिए
नपा को मवेशियों को छुड़ाने के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाना चाहिए। जुर्माना कम होने से भी लोग नपा की कार्रवाई से नहीं डरते हैं।
-दिलीप मकवाना, इलेक्ट्रीशियन
सख्त कदम उठाएं
नपा को मवेशियों की समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाना होंगे। ऐसा नहीं करने पर शहर की समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा
-नेहा देवड़ा, गृहणी

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