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लापरवाह विद्युतकर्मियों की सरकार ने की बत्ती गुल

अविभाजित मंदसौर जिले में 51 व संभाग में 300 निलंबित
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

प्रदेश में बिजली की उत्पादन सर प्लस होते हुए भी जिस प्रकार से कांग्रेस सरकार बनने के बाद बिजली गुल हो रही थी उससे कई सवाल खड़े हो रहे थे ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार से बिजली कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे थे, उससे कांग्रेस की छवि खराब होती जा रही थी।
10 अप्रैल को पालो ने ग्राउंड रिपोर्ट कोठड़ा बुजूर्ग से प्रकाशित की थी रात्रि में 4 घंटे में 5 बार लाइट गई थी यह स्थिति पूरे प्रदेश में बन गई थी। शहरी क्षेत्रों में कटौती कम थी किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत ज्यादा कटौती हो रही थी और विद्युत मंडल के कर्मचारी लापरवाही की हद तक जा चुके थे, वह ग्रामीण जनता के प्रति और अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह और उदासीन हो गए थे, इसे लेकर कांग्रेसी नेताओं ने अपने विधायकों, सांसदों पर दबाव भी बनाया मंत्रियों ने भी इसमें संज्ञान लिया और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए की जब सरप्लस बिजली है तो बिजली कटौती इतनी ज्यादा क्यों हो रही है? शुक्रवार को इंदौर में कांग्रेस कार्यालय में ढाई घंटे तक बिजली नहीं आई जबकि वहां बैठक चल रही थी, इसको लेकर जीतू पटवारी ने बिजली विभाग के पश्चिम विभाग के एमडी पर आरोप लगाए। प्रमुख ऊर्जा सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर अपने सभी जिला कलेक्टरों से और अपने डिविजनल इंजीनियर से चर्चा की वहां किन किन कारणों से कब बंद हुई तब चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए और उन्होंने जानबूझकर बिजली बंद कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। मंदसौर जिले में विभिन्न क्षेत्रों में 27 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया पूरे संभाग में लगभग 300 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को सर्जिकल स्ट्राइक कर बाहर का रास्ता बता दिया, जिससे उनकी बत्ती गुल हो गई।
इस समय गर्मी है, चुनाव का समय है और इससे कांग्रेसी सरकार आने पर जिस प्रकार बिजली जा रही है तो निश्चित है कि लोकसभा में भी उसका फायदा भाजपा को मिलता और कांग्रेस को उसका खामियाजा भुगतना पड़ता।
गहन जांच पड़ताल के बाद जो लापरवाह और कर्तव्य के प्रति उदासीन कर्मचारी के उनमें से कुछ को सस्पेंड कर दिया और आउटसोर्सिंग के जो कर्मचारी जिनकी नियुक्ति राजनीतिक आकाओं के द्वारा हुई थी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया, कई कर्मचारी आउटसोर्सिंग में ऐसे थे जो ड्यूटी पर कभी कभी जाते थे और पूरा वेतन दे रहे थे, वे राजनीतिक दलों के आकाओं के यहां अपना अपनी सेवाएं दे रहे थे, इसे लेकर पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ था।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने जब सर्जिकल स्ट्राइक की तो बिजली कंपनियों के जो कर्मचारी राजनेताओं के संरक्षण में काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारी और बिजली विभाग के कर्मचारी के ऊपर गाज गिरी जिले में भी कई ऐसे कर्मचारी जो कभी कभी ही अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाया गया चुनाव के समय कांग्रेस के इस कदम से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में अभी अधिक कटौती हो रही थी वहां पर सरकार के प्रति आस्था जगी है और विश्वास बढ़ा है। वही विद्युत मंडल के कर्मचारी संगठन ज्ञापन और धरने के लिए अपने अपने प्रेस नोट जारी कर रहे हैं निर्वाचन का समय हैं वे धरना नहीं दे सकते केवल ज्ञापन दे सकते हैं, किंतु विद्युत मंडल के कर्मचारियों को यह सोचना चाहिए की जनता की सेवा के लिए विद्युत मंडल में उन्हें रखा गया है, जनता को बिजली लगातार मिलती रहे, समय पर मिलते रहे यह उनकी ड्यूटी है।
आंधी तूफान तो अभी 1 सप्ताह में ही आए उसके पहले तो कोई आंधी तूफान नहीं आ रहे थे फिर भी लाइटें क्यों जा रही थी? इसका जवाब उनके पास नहीं है उनकी ड्यूटी की लापरवाही और राजनीतिक दलों के संरक्षण में काम करने की सजा उन्हें मिली है, हो सकता है उसमें कुछ गेहूं के साथ घुन पीस गये हो, पर यह सर्जिकल स्ट्राइक बिजली विभाग के इन कर्मचारियों पर हुआ है जो कर्तव्य के प्रति उदासीन थे।
इनका कहना
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लाइट जा रही थी और इसके लिए हमने सांसद प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन से भी चर्चा की थी और उन्होंने विश्वास दिलाया था कि वे ऊर्जा मंत्री से चर्चा कर कोई ठोस निर्णय करवाएगी।
तुलसीराम प्रजापति
कोटडा बुजुर्ग
जो कर्मचारी अपने ड्यूटी के प्रति लापरवाह है और गलतियां कर रहे थे उनको दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया है और आउटसोर्स के जो कर्मचारी थे उन्हें सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की है। दो सब इंजीनियर, तेरह कर्मचारियों को निलंबित किया और बारहा कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया।
दिनेश एस चौहान
अधीक्षण यंत्री मध्य प्रदेश विद्युत मंडल पश्चिमी क्षेत्र मंदसौर

patallok

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